अहमदाबाद। शहर में आयोजित 2025 के नोर्टा नगरी गरबा कार्यक्रम में टिकटों की बिक्री को लेकर कथित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। आयोजन से जुड़े एक साझेदार ने आरोप लगाया है कि प्रायोजकों और परिचितों के लिए जारी किए गए मुफ्त टिकटों को अन्य साझेदारों की जानकारी और सहमति के बिना बिक्री योग्य बनाकर बेचा गया। शिकायत के आधार पर चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। कथित तौर पर इस पूरे मामले में ₹8 से ₹10 करोड़ तक की रकम के अनुचित तरीके से हासिल किए जाने की आशंका जताई गई है।
शिकायतकर्ता अरुणभाई गगाभाई भूटिया, उम्र 36 वर्ष, ने 9 सितंबर को शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार नोर्टा नगरी गरबा आयोजन के लिए भूटिया, जिगरभाई चौहान, कृष्णा गढ़वी और दर्शनभाई शाह साझेदार थे। आयोजन को लेकर 26 अगस्त 2025 को एएआई इवेंट के माध्यम से नोटरीकृत समझौता भी किया गया था। समझौते के तहत आयोजन से जुड़े टिकटों और अन्य व्यवस्थाओं में साझेदारों की सहमति महत्वपूर्ण थी।
आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान प्रायोजकों, परिचितों और अन्य संबंधित लोगों के लिए प्रतिदिन करीब 4,000 मुफ्त टिकट जारी किए जाते थे। इन मुफ्त टिकटों को किसी अन्य व्यक्ति को बेचने या बिक्री के लिए उपलब्ध कराने से पहले सभी साझेदारों की सहमति आवश्यक थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि दर्शनभाई शाह ने बड़ी संख्या में टिकट एक एजेंसी के माध्यम से बेचने का सुझाव दिया था, लेकिन इस संबंध में कोई औपचारिक समझौता नहीं किया गया।
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मामले ने उस समय गंभीर रूप ले लिया जब आयोजन स्थल पर दो अज्ञात लोगों को टिकट बेचते हुए देखा गया। शिकायत के अनुसार इन लोगों ने बताया कि उन्हें टिकट टिकट टावर कंपनी से जुड़े उमंगभाई के माध्यम से मिले थे। जब इस संबंध में जानकारी जुटाई गई तो कथित तौर पर उमंगभाई ने बताया कि टिकट दर्शनभाई शाह की ओर से उपलब्ध कराए गए थे और मुफ्त टिकटों को भी बिक्री के लिए दिया जा रहा था।
कार्यक्रम समाप्त होने के बाद टिकटों से जुड़े आंकड़ों की जांच में भी कई सवाल सामने आए। शिकायत में जिला मंच के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि आयोजन के दौरान कुल 1,55,980 टिकट बेचे गए, जबकि 30,634 टिकट जारी किए गए थे। इसके अलावा 1,04,576 टिकट मुफ्त श्रेणी में बताए गए। वहीं, 3,857 टिकट आयोजन स्थल पर और 16,913 टिकट ऑनलाइन बिक्री के माध्यम से जारी किए गए।
शिकायतकर्ता ने टिकट वितरण और बिक्री के आंकड़ों में कथित अंतर को आधार बनाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि टिकटों की बिक्री से जुड़े विवरण की जानकारी सामने आने के बाद दर्शनभाई शाह से स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन उन्होंने टिकटों की बिक्री में किसी भूमिका से इनकार किया और कथित तौर पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
मामले में दर्शनभाई शाह के अलावा जयेशभाई परमार, रविभाई शाह और संजयभाई देसाई के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि चारों ने कथित तौर पर एक-दूसरे के साथ मिलकर प्रायोजकों और अन्य लोगों के लिए जारी मुफ्त टिकटों को बिक्री योग्य टिकटों में बदलने और उन्हें ऑनलाइन बेचने की व्यवस्था की। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस प्रक्रिया से अन्य साझेदारों की जानकारी और अनुमति के बिना करोड़ों रुपये की कथित कमाई की गई।
जांच में अब साझेदारी समझौते, टिकट जारी करने और बिक्री के रिकॉर्ड, ऑनलाइन टिकटिंग से जुड़े आंकड़े, बैंक खातों और भुगतान विवरण की जांच की जा रही है। टिकट वितरण में शामिल मध्यस्थों और एजेंसियों से भी पूछताछ की जा सकती है। जांच अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि मुफ्त टिकटों की वास्तविक संख्या कितनी थी, उनमें से कितने टिकट बिक्री के लिए उपलब्ध कराए गए और उनसे कितनी रकम प्राप्त हुई।
पुलिस के अनुसार मामले में आरोपों की पुष्टि दस्तावेजी और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। टिकटिंग मंचों से प्राप्त आंकड़ों, बैंक लेनदेन और संबंधित व्यक्तियों के बीच हुए संपर्कों की जांच के बाद ही कथित धोखाधड़ी की वास्तविक रकम और प्रत्येक आरोपी की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल मामला जांच के चरण में है और लगाए गए आरोपों की पुष्टि होना बाकी है।
