अहमदाबाद में फर्जी ‘लव गुरु’ बनकर सोशल मीडिया के जरिए महिलाओं को फंसाने, वशीकरण के नाम पर ठगी और ब्लैकमेलिंग करने वाले रैकेट का खुलासा हुआ।

‘लव गुरु’ बनकर साइबर ठगी का खौफनाक खेल: सोशल मीडिया से ₹50 लाख की ब्लैकमेलिंग रैकेट का भंडाफोड़

Team The420
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अहमदाबाद। गुजरात में साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए महिलाओं को निशाना बनाकर एक संगठित “लव गुरु” ठगी रैकेट का भंडाफोड़ किया गया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी ने फर्जी पहचान के जरिए सैकड़ों महिलाओं को पहले भावनात्मक रूप से अपने जाल में फंसाया और फिर उन्हें मानसिक दबाव और ब्लैकमेलिंग के जरिए भारी रकम वसूलने का खेल चलाया।

पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी रजनीश गोविंदलाल भार्गव (बीकानेर निवासी) है, जिसने “पूजा किन्नर गुरुमा” नाम से एक फर्जी ट्रांसजेंडर ज्योतिषी की पहचान बनाई थी। वह खुद को “लव गुरु” और आध्यात्मिक समाधान देने वाला विशेषज्ञ बताकर इंस्टाग्राम और फेसबुक पर सक्रिय था। इसी नकली पहचान के जरिए वह उन महिलाओं को टारगेट करता था जो रिश्तों, विवाह और पारिवारिक समस्याओं से परेशान थीं।

रोज 300 महिलाओं को करता था संपर्क, दर्जनों बनती थीं शिकार

जांच में सामने आया है कि आरोपी रोजाना करीब 300 महिलाओं से संपर्क करता था। इनमें से लगभग 60 से 65 महिलाएं उसके झांसे में आकर भुगतान करने लगती थीं। वह “वशीकरण”, प्रेम संबंध सुधार और पारिवारिक समस्या समाधान के नाम पर ₹3,000 से ₹15,000 तक की रकम वसूलता था।

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शुरुआत में बातचीत पूरी तरह सामान्य और भरोसेमंद माहौल में होती थी, जिससे पीड़ित महिलाओं को विश्वास हो जाता था कि सामने कोई वास्तविक आध्यात्मिक सलाहकार है। लेकिन धीरे-धीरे यही बातचीत एक योजनाबद्ध ठगी और मानसिक शोषण में बदल जाती थी।

निजी तस्वीरों का इस्तेमाल कर ब्लैकमेलिंग का खेल

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी महिलाओं से उनकी निजी जानकारी और तस्वीरें प्राप्त करता था। इन तस्वीरों का उपयोग बाद में एडिटिंग और धमकी देने के लिए किया जाता था। इसके बाद महिलाओं को “रिचुअल क्लीनिंग” के नाम पर वीडियो कॉल करने के लिए मजबूर किया जाता था।

कई मामलों में इन वीडियो कॉल्स को बिना अनुमति रिकॉर्ड कर लिया जाता था। बाद में इन्हीं आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरों के जरिए महिलाओं को ब्लैकमेल किया जाता था। यदि कोई पीड़िता अतिरिक्त पैसे देने से इनकार करती, तो उसे सामग्री सार्वजनिक करने की धमकी दी जाती थी।

एक मामले में एक महिला से करीब ₹1.43 लाख तक की वसूली किए जाने की पुष्टि हुई है।

₹40–50 लाख की अवैध कमाई का अनुमान

पुलिस का मानना है कि यह पूरा नेटवर्क पिछले ढाई वर्षों से सक्रिय था और इसके जरिए लगभग ₹40 लाख से ₹50 लाख तक की अवैध कमाई की गई है। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस रैकेट में कम से कम तीन लोग शामिल हो सकते हैं, जो फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल, बैंक अकाउंट और मोबाइल नंबरों के जरिए पूरे ऑपरेशन को चला रहे थे।

साइबर क्राइम यूनिट की कार्रवाई से खुला नेटवर्क

अहमदाबाद साइबर क्राइम यूनिट ने तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया। जांच के दौरान फर्जी इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट्स, बैंक ट्रांजैक्शन और मोबाइल नंबरों की कड़ी को ट्रेस किया गया, जिसके बाद मुख्य आरोपी को बीकानेर से गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह मामला केवल आर्थिक धोखाधड़ी नहीं, बल्कि डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर भावनात्मक और मानसिक शोषण का गंभीर उदाहरण है।

कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच जारी

आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इस नेटवर्क से और कितनी महिलाएं प्रभावित हुई हैं और इसका पूरा वित्तीय ढांचा कितना बड़ा है।

डिजिटल ठगी पर बढ़ती चिंता

विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान के जरिए साइबर ठग किस तरह भावनात्मक कमजोरियों का फायदा उठा रहे हैं। ऐसे मामलों में जागरूकता और सतर्कता बेहद जरूरी है, ताकि लोग ऑनलाइन ठगी के जाल में न फंसें।

जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले समय में इस तरह के और भी साइबर नेटवर्क सामने आ सकते हैं, क्योंकि डिजिटल ठगी के तरीके लगातार बदल रहे हैं और अधिक संगठित होते जा रहे हैं।

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