अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद में साइबर ठगों ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के नाम पर एक बुजुर्ग महिला को निशाना बनाकर करीब ₹47.35 लाख की ठगी कर ली। आरोप है कि ठगों ने फोन पर महिला को यह कहकर डराया कि उसके एलआईसी खाते में गलती से ₹10 लाख जमा हो गए हैं और यदि उसने रकम वापस नहीं की तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसी डर का फायदा उठाकर ठगों ने चार साल तक अलग-अलग बहानों से महिला से पैसे ट्रांसफर कराए।
पीड़िता 73 वर्षीय महिला है, जिसने हाल ही में साइबर अपराध से जुड़ी शिकायत दर्ज कराई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह ठगी एक बार में नहीं बल्कि करीब चार वर्षों तक लगातार चलती रही। इस दौरान आरोपी अलग-अलग बहानों से महिला से पैसे मांगते रहे और वह उन्हें अलग-अलग किस्तों में रकम भेजती रही।
शिकायत के अनुसार महिला को सबसे पहले एक अनजान नंबर से फोन आया था। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को एलआईसी से जुड़ा अधिकारी बताया और कहा कि तकनीकी गलती के कारण उसके खाते में ₹10 लाख जमा हो गए हैं। आरोपी ने महिला को यह भी बताया कि यदि वह इस रकम को वापस लेना चाहती है या मामले को सुलझाना चाहती है तो उसे कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा।
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फोन करने वाले व्यक्ति ने महिला को यह कहकर डराया कि मामला अदालत तक पहुंच सकता है और इसके लिए वकील, कोर्ट फीस और अन्य प्रक्रियाओं में काफी खर्च आएगा। आरोपी ने खुद को मददगार बताते हुए यह भरोसा दिलाया कि वह पूरे मामले को सुलझाने में सहायता करेगा और महिला को कानूनी झंझट से बचा सकता है।
धीरे-धीरे आरोपी ने महिला का भरोसा जीत लिया और उसे समझाया कि केस से बचने के लिए कुछ प्रोसेसिंग फीस और अन्य चार्ज जमा कराने होंगे। इसके बाद अलग-अलग समय पर महिला से फाइल प्रोसेसिंग फीस, दस्तावेज शुल्क, टैक्स क्लियरेंस और अन्य कानूनी खर्चों के नाम पर पैसे ट्रांसफर कराए जाने लगे।
जांच में सामने आया कि महिला को कई बैंक खातों में पैसे भेजने के लिए कहा गया। महिला को यह विश्वास दिलाया जाता रहा कि हर भुगतान के बाद उसका मामला जल्द ही खत्म हो जाएगा और जमा रकम वापस मिल जाएगी। इसी भरोसे में वह लगातार भुगतान करती रही।
बैंक रिकॉर्ड की जांच में पता चला कि करीब चार साल के दौरान महिला से कुल ₹47.35 लाख की रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराई गई। लंबे समय तक ठग महिला को आश्वासन देते रहे कि प्रक्रिया पूरी होते ही उसका मामला बंद हो जाएगा और पैसा वापस मिल जाएगा।
इस पूरे मामले की जानकारी परिवार को तब हुई जब महिला ने हाल के दिनों में फिर से पैसे भेजने की बात कही। परिजनों को शक हुआ और उन्होंने पूरे मामले की जानकारी ली। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि महिला लंबे समय से साइबर ठगी का शिकार हो रही है। इसके बाद परिवार ने मामले की शिकायत साइबर अपराध से जुड़े अधिकारियों के पास दर्ज कराई।
जांच एजेंसियों ने महिला द्वारा किए गए बैंक ट्रांजैक्शन की जांच शुरू कर दी है। जिन खातों में पैसे भेजे गए हैं, उनकी पहचान की जा रही है और उनसे जुड़े मोबाइल नंबरों व डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस ठगी के पीछे संगठित साइबर गिरोह हो सकता है।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि साइबर अपराधी अब लोगों को ठगने के लिए सामाजिक मनोविज्ञान का इस्तेमाल करते हैं। उनके मुताबिक अपराधी पहले भरोसा बनाते हैं और फिर कानूनी कार्रवाई या आर्थिक नुकसान का डर दिखाकर पीड़ितों से पैसे निकलवाते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में अक्सर बुजुर्ग लोगों को निशाना बनाया जाता है, क्योंकि उन्हें आसानी से भ्रमित किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बैंक, बीमा कंपनी या सरकारी संस्था की ओर से फोन पर इस तरह की फीस जमा कराने या रकम वापस करने की मांग नहीं की जाती। यदि किसी व्यक्ति को इस तरह का फोन आता है तो उसे तुरंत सावधान हो जाना चाहिए और बिना पुष्टि किए किसी भी खाते में पैसा ट्रांसफर नहीं करना चाहिए।
जांच एजेंसियों ने लोगों से अपील की है कि वे अनजान कॉल या संदेशों से सतर्क रहें। किसी भी संदिग्ध वित्तीय मांग या कानूनी धमकी मिलने पर संबंधित संस्था से सीधे संपर्क कर जानकारी की पुष्टि करें और ऐसे मामलों की सूचना तुरंत साइबर अपराध हेल्पलाइन पर दें।
