आदिलाबाद। देश में तेजी से फैल रहे साइबर अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच आदिलाबाद जिले में एक बड़े फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जहां ‘ऑपरेशन क्रैकडाउन 1.0’ के तहत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच के दौरान 74 संदिग्ध म्यूल बैंक खातों की पहचान की गई है, जो देशभर में दर्ज 12 साइबर ठगी मामलों से जुड़े पाए गए। इन मामलों में कुल ₹7.01 करोड़ की धोखाधड़ी सामने आई है, जिससे इस गिरोह के संगठित और व्यापक नेटवर्क का अंदाजा लगाया जा रहा है।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह गिरोह फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग ऐप्स के जरिए लोगों को झांसे में लेता था। पीड़ितों को उच्च रिटर्न का लालच देकर निवेश के लिए उकसाया जाता और फिर उनके पैसे अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए जाते। इन खातों को ‘म्यूल अकाउंट्स’ के रूप में इस्तेमाल किया जाता था, जिससे असली आरोपियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था।
इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राजावर्धन, पेटला श्रीअक्षय, राजेंद्र और एस.के. समीर के रूप में हुई है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इन चारों के अलावा इस नेटवर्क में कई अन्य लोग भी शामिल हैं, जिनमें बैंक खाताधारक और तकनीकी सहयोगी शामिल हो सकते हैं। अधिकारियों ने बताया कि जिन 74 खातों की पहचान हुई है, उनमें से कई खाताधारक या तो लालच में आकर अपने खाते उपलब्ध कराते थे या फिर उन्हें इस नेटवर्क के असली मकसद की जानकारी ही नहीं होती थी।
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साइबर अपराध के विशेषज्ञों का मानना है कि म्यूल अकाउंट्स आज के डिजिटल फ्रॉड का सबसे बड़ा हथियार बन चुके हैं। प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, “साइबर अपराधी अब सीधे पीड़ितों से पैसा नहीं रखते, बल्कि म्यूल अकाउंट्स के जरिए उसे कई लेयर में घुमाते हैं, जिससे ट्रेसिंग बेहद मुश्किल हो जाती है। सोशल इंजीनियरिंग और फर्जी निवेश योजनाओं का संयोजन इन अपराधों को और खतरनाक बना रहा है।”
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग किया। फर्जी वेबसाइट, नकली ऐप और प्रोफेशनल दिखने वाले डैशबोर्ड तैयार कर लोगों को यह भरोसा दिलाया जाता था कि वे किसी वैध निवेश प्लेटफॉर्म का हिस्सा हैं। शुरुआती चरण में छोटे मुनाफे दिखाकर विश्वास जीता जाता और फिर बड़ी रकम निवेश कराने के बाद संपर्क तोड़ दिया जाता था।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में आम लोग अक्सर लालच और जल्द मुनाफे की उम्मीद में बिना जांच-पड़ताल के निवेश कर बैठते हैं। यही कमजोरी साइबर अपराधियों के लिए सबसे बड़ा अवसर बनती है। इस मामले में भी कई पीड़ितों ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर यह कार्रवाई संभव हो सकी।
जांच एजेंसियां अब इन 74 खातों के जरिए पैसे के फ्लो को ट्रैक कर रही हैं, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। साथ ही, अन्य राज्यों से भी इस गिरोह के लिंक सामने आने की संभावना जताई जा रही है। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ आम लोगों को सलाह दे रहे हैं कि किसी भी ऑनलाइन निवेश या गेमिंग प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता की पूरी जांच करें। अनजान लिंक, ऐप या कॉल के जरिए मिलने वाले ऑफर्स से सतर्क रहें और कभी भी अपने बैंक खाते या केवाईसी विवरण किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें।
यह मामला एक बार फिर इस बात की पुष्टि करता है कि डिजिटल युग में सुविधा के साथ जोखिम भी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
