मुंबई। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने करीब आठ वर्षों से फरार चल रहे बिल्डर अभिषेक व्यास को कथित ₹25 करोड़ के हाउसिंग धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने अपनी कंपनी A & A Shelters के माध्यम से एक आवासीय परियोजना शुरू कर लगभग 40 फ्लैट खरीदारों से करोड़ों रुपये वसूले, लेकिन तय समय पर उन्हें फ्लैट का कब्जा नहीं दिया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी को शुक्रवार को सांताक्रूज़ स्थित एक पांच सितारा होटल से गुप्त सूचना और तकनीकी निगरानी (Technical Surveillance) के आधार पर गिरफ्तार किया गया। अदालत में पेश किए जाने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
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जांच के मुताबिक, अभिषेक व्यास ने वर्ष 2010 में मुंबई के कांदिवली क्षेत्र में एक आवासीय परियोजना शुरू की थी। उसने खरीदारों को तीन वर्ष के भीतर फ्लैट का कब्जा देने का वादा किया था। हालांकि, कई खरीदारों ने लगभग छह वर्षों तक भुगतान करने के बावजूद फ्लैट नहीं मिलने पर अंबोली पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर आरोपी के खिलाफ छह प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गईं।
आर्थिक अपराध शाखा के अनुसार, इस मामले में लगभग 40 फ्लैट खरीदारों से करीब ₹25 करोड़ की कथित धोखाधड़ी हुई है। जांच एजेंसी परियोजना से जुड़े वित्तीय लेनदेन, खरीदारों के भुगतान रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है।
पुलिस का यह भी आरोप है कि आरोपी ने अंबोली क्षेत्र की कई हाउसिंग सोसाइटियों के पुनर्विकास (Redevelopment) का कार्य भी अपने हाथ में लिया था, लेकिन वहां भी पुनर्विकसित मकानों का कब्जा नहीं दिया गया और न ही प्रभावित निवासियों को तय किराया उपलब्ध कराया गया।
जांच में सामने आया कि वर्ष 2018 में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद अभिषेक व्यास को अदालत से जमानत मिल गई थी। इसके बाद उसने अदालत में पेश होना बंद कर दिया। लगातार अनुपस्थित रहने पर उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (Non-Bailable Warrant) जारी किया गया और वह पिछले आठ वर्षों से फरार चल रहा था।
EOW ने बताया कि आरोपी की तलाश के लिए लगातार खुफिया सूचनाएं एकत्र की जा रही थीं। हाल ही में मिली सूचना और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उसकी लोकेशन का पता लगाया गया, जिसके बाद उसे सांताक्रूज़ स्थित होटल से गिरफ्तार कर लिया गया।
जांच एजेंसी अब आरोपी के वित्तीय लेनदेन, परियोजना से जुड़े बैंक खातों, खरीदारों से प्राप्त धनराशि के उपयोग तथा अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि कथित रूप से एकत्र की गई धनराशि का उपयोग किन उद्देश्यों के लिए किया गया।
फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन (FCRF) के अनुसार, रियल एस्टेट धोखाधड़ी के मामलों में परियोजना की वास्तविक स्थिति, डेवलपर की वित्तीय क्षमता और वैधानिक स्वीकृतियों का स्वतंत्र सत्यापन करना अत्यंत आवश्यक है। खरीदारों को केवल सभी आवश्यक अनुमतियों वाले प्रोजेक्ट में ही निवेश करना चाहिए तथा भुगतान से पहले परियोजना के कानूनी दस्तावेजों और नियामकीय पंजीकरण की पुष्टि अवश्य करनी चाहिए।
फिलहाल आर्थिक अपराध शाखा मामले की विस्तृत जांच कर रही है। जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी और आवश्यक कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।
About the author — Suvedita Nath is a science student with a growing interest in cybercrime and digital safety. She writes on online activity, cyber threats, and technology-driven risks. Her work focuses on clarity, accuracy, and public awareness.
