पटना। दारोगा मुख्य परीक्षा की दूसरी पाली के दौरान खगौल स्थित बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय के एक परीक्षा कक्ष से दो प्रश्नपत्र बुकलेट गायब होने के मामले में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने नई प्राथमिकी दर्ज की है। यह कार्रवाई अभ्यर्थी बबीता कुमारी की शिकायत और उनसे हुई पूछताछ के बाद की गई। ईओयू की विशेष जांच टीम की जांच में सामने आया कि परीक्षा शुरू होने से पहले ही किसी अज्ञात व्यक्ति ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र की चेन ऑफ कस्टडी तोड़कर उसे अवैध तरीके से हासिल कर लिया था।
जांच एजेंसी के अनुसार, प्रश्नपत्र हासिल करने के बाद उन्हें कथित तौर पर सॉल्वर गैंग को बेचकर बड़ी रकम जुटाई गई। मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और बिहार लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। प्राथमिकी में परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र की गोपनीयता, शुचिता और चेन ऑफ कस्टडी भंग करने को गंभीर संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध के तौर पर दर्ज किया गया है।
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मामले की जांच ईओयू के एएसपी कुमार इंद्रप्रकाश को सौंपी गई है। ईओयू की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग पहले ही दारोगा मुख्य परीक्षा को रद्द कर चुका है। अब नई प्राथमिकी के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र किस स्तर पर गायब हुए और उन्हें कथित तौर पर किसके माध्यम से सॉल्वर गैंग तक पहुंचाया गया।
सील खुली मिलने पर अभ्यर्थी ने की थी शिकायत
ईओयू की पूछताछ में अभ्यर्थी बबीता कुमारी ने बताया कि बालिका उच्च विद्यालय के कमरा संख्या 10 में परीक्षा शुरू होने से पहले दो प्रश्न-पुस्तिकाओं की पेपर सील खुली हुई मिली थी। इस कमरे में कुल 48 अभ्यर्थियों के बैठने की व्यवस्था थी, जबकि दो अभ्यर्थी अनुपस्थित थे। शिकायत के अनुसार, परीक्षा केंद्र प्रशासन ने अनुपस्थित अभ्यर्थियों के लिए रखी गई प्रश्न-पुस्तिकाएं देकर हंगामा कर रहे अभ्यर्थियों को शांत कराने का प्रयास किया।
कमरे में मौजूद अभ्यर्थियों ने जब इस स्थिति का विरोध किया तो केंद्राधीक्षक ने उन्हें आश्वासन दिया कि यदि परीक्षा के दौरान प्रश्नपुस्तिका में वास्तविक रूप से कोई गड़बड़ी पाई गई तो बाद में उसका संज्ञान लिया जाएगा। इसके बाद परीक्षा प्रक्रिया आगे बढ़ी। हालांकि, प्रश्नपत्रों की सील पहले ही खुली मिलने की घटना ने परीक्षा की गोपनीयता और सुरक्षित रखे जाने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।
दो प्रश्नपत्रों के नंबर की भी पहचान
ईओयू के एसपी प्रशासन राजेश कुमार के नेतृत्व में गठित आठ सदस्यीय एसआईटी ने मामले की जांच के दौरान पाया कि प्रश्नपत्र संख्या 22514351 और 22514352 की पेपर सील खुली हुई थी। टीम ने परीक्षा केंद्र से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ शुरू की।
जांच के क्रम में केंद्राधीक्षक मेहरे दरख्शां और वीक्षक विनोद कुमार को ईओयू कार्यालय बुलाकर उनके बयान दर्ज किए गए। एसआईटी उपलब्ध बयानों, परीक्षा केंद्र से संबंधित रिकॉर्ड और फुटेज की जांच कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा शुरू होने से पहले दोनों प्रश्नपत्रों तक किसकी पहुंच हुई और सुरक्षा व्यवस्था में सेंध किस स्तर पर लगी।
मुख्य आरोपी की पहचान में जुटी एसआईटी
ईओयू के मुताबिक, मामले में अभी मुख्य आरोपी की पहचान और उसकी भूमिका स्पष्ट करने के लिए जांच जारी है। एसआईटी प्रश्नपत्रों की आवाजाही, परीक्षा केंद्र की व्यवस्था, संबंधित कर्मचारियों की गतिविधियों और उपलब्ध फुटेज को जोड़कर घटनाक्रम की कड़ी तैयार कर रही है। जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि गायब प्रश्नपत्रों को कथित तौर पर सॉल्वर गैंग तक किस माध्यम से पहुंचाया गया और इसके बदले कितनी रकम का लेनदेन हुआ।
नई प्राथमिकी के बाद अब जांच का दायरा केवल परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र गायब होने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कथित तौर पर प्रश्नपत्र हासिल करने, उसे आगे पहुंचाने और उससे आर्थिक लाभ लेने वाले लोगों की भूमिका तक बढ़ेगा। ईओयू की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में कितने लोग शामिल थे और प्रश्नपत्र लीक की पूरी श्रृंखला किस तरह संचालित हुई।
