पटना में Bank of Baroda की खजांची रोड शाखा से कथित तौर पर फर्जी रोजगार, बैंक स्टेटमेंट और जमीन के दस्तावेजों के आधार पर ऋण लेने के मामले में आठ आरोपियों पर FIR दर्ज हुई है।

फर्जी नौकरी और जमीन के कागजात से बैंक से करोड़ों का ऋण, पटना में आठ पर केस

Team The420
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पटना। बैंक ऑफ बड़ौदा की पटना स्थित खजांची रोड शाखा में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर होम लोन और सुविधा ऋण हासिल करने का मामला सामने आया है। करीब ₹1.59 करोड़ के कथित गबन के इस मामले में शाखा प्रबंधक नवीन कुमार की शिकायत पर कुल आठ आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। आरोपियों में पांच ऋण धारक, दो डायरेक्ट सेलिंग एजेंट (डीएसए) और दिल्ली की एक थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन एजेंसी शामिल है।

बैंक की आंतरिक जांच में यह मामला तब सामने आया, जब ऋण धारकों ने नियमित मासिक किस्तें यानी ईएमआई चुकाना बंद कर दिया और संबंधित खाते एनपीए घोषित हो गए। इसके बाद बैंक ने ऋण के बदले बंधक रखी गई संपत्तियों और ऋण स्वीकृति से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की। जांच में रोजगार, आय और जमीन से संबंधित दस्तावेजों में कथित अनियमितताएं सामने आईं।

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बैंक की शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी नियोक्ता विवरण, जाली बैंक स्टेटमेंट और जमीन के फर्जी कागजात का इस्तेमाल कर ऋण हासिल किया। बैंक अब यह जांच कर रहा है कि ऋण आवेदन तैयार करने से लेकर दस्तावेजों के सत्यापन और रकम जारी करने तक की प्रक्रिया में किस स्तर पर गड़बड़ी हुई।

चार ऋण खातों में सामने आया बड़ा अंतर

बैंक के उपलब्ध ऋण विवरण के अनुसार, चंदा देवी और धनंजय कुमार के नाम पर ₹32.28 लाख का होम लोन और ₹3.71 लाख का सुविधा ऋण दिया गया, जिसकी कुल राशि ₹35.99 लाख है। विजय कुमार चौधरी के खाते में ₹47.40 लाख का होम लोन और ₹3.67 लाख का सुविधा ऋण, यानी कुल ₹51.07 लाख दर्ज है।

इसी तरह रेखा देवी के नाम पर ₹40 लाख का होम लोन और ₹4.50 लाख का सुविधा ऋण, कुल ₹44.50 लाख दिया गया। दिनेश कुमार चौधरी के नाम पर ₹50 लाख का होम लोन दर्ज है। इन चार ऋण खातों में होम लोन और सुविधा ऋण की कुल राशि ₹1.81 करोड़ से अधिक बैठती है।

हालांकि, मामले में कथित गबन की कुल राशि करीब ₹1.59 करोड़ बताई गई है। ऋण वितरण के उपलब्ध ब्योरे और कथित गबन राशि में अंतर है। यह अंतर स्वीकृत और वास्तविक रूप से वितरित रकम या प्रारंभिक अनुमान के कारण हो सकता है। जांच में वास्तविक वित्तीय नुकसान की अंतिम राशि स्पष्ट होने की संभावना है।

डीएसए पर दस्तावेज तैयार कराने का आरोप

मामले में दो डायरेक्ट सेलिंग एजेंटों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। इनमें बांका के रंजोधा निवासी कंचन कुमारी और बेऊर के कुरकुरी निवासी गौतम गंभीर शामिल हैं। आरोप है कि दोनों ने ऋण आवेदकों और बैंक के बीच बिचौलिये की भूमिका निभाई तथा कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और ऋण स्वीकृत कराने में मदद की।

बैंक ऋण प्रक्रिया में डीएसए की भूमिका आवेदकों को ऋण आवेदन और संबंधित दस्तावेजों की प्रक्रिया में सहायता करने से जुड़ी होती है। इस मामले में जांच एजेंसी यह पता करेगी कि दोनों एजेंटों को दस्तावेजों की कथित हेराफेरी की जानकारी थी या नहीं और ऋण स्वीकृति में उनकी भूमिका कितनी थी।

दिल्ली की सत्यापन एजेंसी पर भी आरोप

मामले में दिल्ली स्थित मेसर्स क्रक्स रिस्क मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड को भी आरोपी बनाया गया है। एजेंसी का काम ऋण आवेदकों के रोजगार, दस्तावेज और जमीन से जुड़े दावों का भौतिक सत्यापन करना था। आरोप है कि एजेंसी की गलत या कथित फर्जी सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर बैंक ने ऋण जारी किए।

अब जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि सत्यापन रिपोर्ट किस आधार पर तैयार की गई और क्या संबंधित संपत्तियों, रोजगार तथा आय के दावों का वास्तव में भौतिक सत्यापन किया गया था। साथ ही, बैंक अधिकारियों की प्रक्रिया संबंधी भूमिका की भी जांच हो सकती है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ऋण आवेदन, बैंक रिकॉर्ड, सत्यापन रिपोर्ट और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। मामले में आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।

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