लखनऊ। कृष्णानगर के बरिगवां चौराहा निवासी कारोबारी सुनील कुमार सहगल से लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) का मकान और व्यावसायिक भूखंड दिलाने के नाम पर कथित तौर पर ₹3.20 करोड़ की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि पड़ोसी महेंद्र श्रीवास्तव ने खुद को एलडीए का कर्मचारी बताकर कारोबारी को एलआईजी श्रेणी का मकान और व्यावसायिक भूखंड दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद उसकी पत्नी रंजना और आलमबाग निवासी गुलाब सिंह की मदद से अलग-अलग किस्तों में रकम ली गई। मामले में पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर तीनों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कारोबारी सुनील कुमार सहगल कानपुर रोड पर ‘राधे-राधे अलमीरा एवं फर्नीचर’ नाम से दुकान चलाते हैं। उनकी शिकायत के मुताबिक वर्ष 2023 में पड़ोसी महेंद्र और उसकी पत्नी रंजना ने उनसे संपर्क किया था। महेंद्र ने कथित तौर पर खुद को एलडीए का कर्मचारी बताया और कहा कि वह एलआईजी श्रेणी का मकान तथा एक व्यावसायिक भूखंड दिला सकता है। संपत्ति मिलने की उम्मीद में सुनील ने आरोपियों पर भरोसा किया और रकम देना शुरू कर दिया।
किस्तों में रकम लेने का आरोप
शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने अलग-अलग समय पर किस्तों में कारोबारी से कुल ₹3.20 करोड़ लिए। सुनील का कहना है कि इतनी बड़ी रकम जुटाने के लिए उन्हें अपनी पत्नी के गहने तक बेचने पड़े और कई परिचितों से उधार लेना पड़ा। रकम लेने के बाद आरोपियों ने एलडीए के नाम से कथित फर्जी आवंटन पत्र, रसीदें और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराए।
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आरोप है कि 8 फरवरी 2024 से 19 जुलाई 2024 के बीच मकान और भूखंड से संबंधित दस्तावेज देकर उन्हें जल्द रजिस्ट्री कराने का भरोसा दिलाया जाता रहा। कारोबारी लंबे समय तक रजिस्ट्री होने का इंतजार करते रहे, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। इसके बाद उन्हें दस्तावेजों की वास्तविकता पर संदेह हुआ।
एलडीए कार्यालय पहुंचने पर खुला राज
वर्ष 2025 में सुनील ने संबंधित कागजात लेकर एलडीए कार्यालय में जांच कराई। वहां उन्हें कथित तौर पर पता चला कि आरोपियों की ओर से दिए गए आवंटन पत्र, रसीदें और अन्य दस्तावेज वास्तविक नहीं थे। शिकायत के मुताबिक, जब कारोबारी ने आरोपियों से इस संबंध में सवाल किया तो उन्होंने कथित फर्जीवाड़े को दबाने के लिए दूसरी संपत्ति दिलाने का भरोसा दिया।
इसके बाद 3 फरवरी 2025 को रुचिखंड और 22 अगस्त 2025 को कानपुर रोड स्थित एक भूखंड की रजिस्ट्री कराए जाने का दावा किया गया। हालांकि, बाद में कारोबारी को पता चला कि जिन संपत्तियों की रजिस्ट्री कराई गई, वे कथित तौर पर आरोपियों के स्वामित्व में ही नहीं थीं। शिकायत में इन रजिस्ट्रियों को भी फर्जी बताया गया है। मामले में गुलाब सिंह की कथित भूमिका और मिलीभगत की बात भी सामने आई है।
रकम मांगने पर धमकी देने का आरोप
सुनील के मुताबिक, 14 जून को जब उन्होंने आरोपियों से अपनी रकम वापस मांगी तो उन्होंने पैसे लौटाने से इनकार कर दिया और कथित तौर पर धमकी दी। इसके बाद कारोबारी ने पुलिस से शिकायत की, लेकिन स्थानीय स्तर पर प्राथमिकी दर्ज नहीं होने पर उन्होंने न्यायालय की शरण ली।
न्यायालय के निर्देश के बाद कृष्णानगर थाने में महेंद्र श्रीवास्तव, उसकी पत्नी रंजना और गुलाब सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पुलिस का कहना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। दस्तावेजों की सत्यता, रकम के लेनदेन, कथित फर्जी रजिस्ट्रियों और आरोपियों की भूमिका से जुड़े साक्ष्य जुटाए जाएंगे। पुलिस जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
