नई दिल्ली। भारत में त्योहारी खरीदारी का मौसम शुरू होने के साथ ऑनलाइन शॉपिंग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एजेंटों का इस्तेमाल नया बदलाव ला सकता है। अब एआई का इस्तेमाल केवल यह पता लगाने के लिए नहीं हो रहा कि कौन-सा उत्पाद खरीदना है, बल्कि ऐसे एजेंट विकसित किए जा रहे हैं जो ग्राहक की जरूरत समझकर उत्पाद और विक्रेता खोजने, कीमतों की तुलना करने और आगे चलकर खरीदारी पूरी करने में भी सक्षम हो सकते हैं। बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने इस बदलाव के साथ धोखाधड़ी, डेटा गोपनीयता, भुगतान की अनुमति और किसी गलती की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने जैसे जोखिमों को लेकर चिंता जताई है।
भारत में दशहरा और दीपावली के आसपास ऑनलाइन खरीदारी में तेजी आती है। ई-कॉमर्स मंचों पर बड़े बिक्री अभियान के दौरान ग्राहक अलग-अलग विक्रेताओं की कीमत, बैंक ऑफर, डिलीवरी समय और उत्पाद की समीक्षा की तुलना करते हैं। एआई एजेंट इस पूरी प्रक्रिया का बड़ा हिस्सा अपने स्तर पर करने लगें तो भुगतान व्यवस्था के सामने यह सवाल खड़ा होगा कि ग्राहक ने वास्तव में किस कार्रवाई की अनुमति दी और एजेंट ने कौन-कौन से फैसले खुद लिए।
एआई सलाह से सीधे खरीदारी तक पहुंच
ऑनलाइन शॉपिंग में एआई का इस्तेमाल पहले मुख्य रूप से उत्पादों की जानकारी, कीमतों की तुलना और सिफारिश तक सीमित था। अब तकनीकी कंपनियां ऐसे एजेंट विकसित कर रही हैं जो ग्राहक के निर्देश के आधार पर कई चरणों को खुद संभाल सकें। ग्राहक अपनी जरूरत, बजट और पसंद बता सकता है और एजेंट उसके आधार पर उपलब्ध विकल्पों को खोजकर उनकी तुलना कर सकता है।
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अगले चरण में यही एजेंट किसी उत्पाद और विक्रेता का चयन कर खरीदारी की प्रक्रिया शुरू या पूरी कर सकता है। इससे ग्राहक को हर चरण पर स्वयं क्लिक करने की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि, सुविधा बढ़ने के साथ यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि अगर एआई ने गलत उत्पाद चुन लिया, गलत विक्रेता का चयन कर लिया या तय सीमा से ज्यादा खर्च कर दिया तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।
पारंपरिक ऑनलाइन खरीदारी में ग्राहक उत्पाद चुनता है, भुगतान की जानकारी दर्ज करता है और लेनदेन को अधिकृत करता है। एआई एजेंट वाले मॉडल में ग्राहक केवल निर्देश दे सकता है, जबकि बाकी कई कदम सॉफ्टवेयर कर सकता है। इस बदलाव से भुगतान की पुष्टि और विवाद की स्थिति में ग्राहक की वास्तविक सहमति निर्धारित करना अधिक जटिल हो सकता है।
एआई के जरिए ठगी का खतरा पहले से मौजूद
भारतीय बैंक पहले से ही एआई की मदद से होने वाली साइबर ठगी को लेकर ग्राहकों को सावधान कर रहे हैं। अपराधी आवाज की नकल, वास्तविक दिखने वाले वीडियो, फर्जी बातचीत और व्यक्तिगत जानकारी के आधार पर तैयार संदेशों का इस्तेमाल कर लोगों को विश्वास में लेने की कोशिश कर रहे हैं। एआई की मदद से तैयार सामग्री सामान्य फर्जी संदेशों की तुलना में अधिक विश्वसनीय दिखाई दे सकती है।
त्योहारी सीजन में फर्जी छूट, उपहार, पुरस्कार और खरीदारी ऑफर के नाम पर भेजे जाने वाले संदेश भी साइबर अपराधियों का सामान्य तरीका हैं। व्हाट्सएप, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और अन्य मंचों के जरिए लोगों को संदिग्ध वेबसाइटों या लिंक तक पहुंचाने की कोशिश की जाती है।
ऐसे मामलों में वेबसाइट का डोमेन जांचना, अनजान लिंक से बचना और कार्ड नंबर, सीवीवी, पिन, नेट बैंकिंग पासवर्ड तथा लेनदेन संबंधी ओटीपी किसी के साथ साझा नहीं करना जरूरी है। लेकिन एआई एजेंट के मामले में जोखिम का स्वरूप अलग हो सकता है, क्योंकि ग्राहक स्वयं किसी संदिग्ध वेबसाइट पर गए बिना भी एजेंट के जरिए लेनदेन करा सकता है।
ग्राहकों का भरोसा अभी पूरी तरह नहीं बना
एक वैश्विक उपभोक्ता अध्ययन में 17 देशों के 28,000 लोगों को शामिल किया गया। अध्ययन के अनुसार, 82 प्रतिशत प्रतिभागियों ने एआई का इस्तेमाल किया है। वहीं, 50 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे एआई को अपनी जरूरत बताकर उसके जरिए विकल्प पाने और एक ही जगह पर खरीदारी करने को प्राथमिकता देंगे। हालांकि, 58 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि वे खरीदारी से पहले एआई की सिफारिशों की दोबारा जांच करते हैं।
यह अंतर बताता है कि लोग एआई को खरीदारी सहायक के रूप में इस्तेमाल करने में अधिक सहज हो सकते हैं, लेकिन पूरी खरीदारी प्रक्रिया का नियंत्रण उसे सौंपने को लेकर अभी सावधानी बरत रहे हैं। एआई आधारित स्वचालित खरीदारी का इस्तेमाल शुरुआती दौर में बार-बार खरीदी जाने वाली और अपेक्षाकृत कम जोखिम वाली वस्तुओं में अधिक होने की संभावना बताई जा रही है।
बैंकों के सामने भुगतान और जिम्मेदारी का सवाल
बैंकों के लिए चुनौती केवल यह नहीं है कि एआई एजेंट भुगतान कर सकता है या नहीं। असली सवाल यह है कि ऐसे भुगतान को प्रमाणित, निगरानी और विवाद की स्थिति में उसी तरह संभाला जा सकेगा या नहीं, जैसे ग्राहक द्वारा सीधे किया गया लेनदेन।
वैश्विक स्तर पर कुछ बैंक चाहते हैं कि ग्राहक को स्पष्ट रूप से बताया जाए कि किसी लेनदेन में एआई एजेंट शामिल है। इसके साथ यह भी जरूरी माना जा रहा है कि एआई द्वारा लिए गए फैसलों की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो और ग्राहक का वित्तीय डेटा सुरक्षित रहे।
अगर किसी एजेंट ने ग्राहक की ओर से गलत उत्पाद खरीदा या अनधिकृत कार्रवाई की तो बैंक, ग्राहक, एआई सेवा प्रदाता, ई-कॉमर्स मंच और विक्रेता के बीच जिम्मेदारी कैसे तय होगी, यह भी महत्वपूर्ण प्रश्न है। भुगतान व्यवस्था को ऐसे लेनदेन के लिए नए सुरक्षा मानकों और निगरानी तंत्र की जरूरत पड़ सकती है।
त्योहारी सीजन बनेगा एआई शॉपिंग की परीक्षा
इस साल का त्योहारी मौसम एआई आधारित खरीदारी के लिए बड़ा परीक्षण बन सकता है। ग्राहक सौदे खोजने, कीमतों की तुलना करने और उत्पाद चुनने में एआई का अधिक इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं ई-कॉमर्स कंपनियों और भुगतान संस्थानों को यह समझना होगा कि उनके मंचों पर एआई एजेंट किस तरह और किस अनुमति के तहत काम कर रहे हैं।
बैंकों के सामने वैध एआई-सहायता प्राप्त लेनदेन और संदिग्ध गतिविधि के बीच अंतर करने की चुनौती होगी। ई-कॉमर्स कंपनियों को यह पहचानना होगा कि कौन-से एआई एजेंट अधिकृत हैं और वे किस सीमा तक कार्रवाई कर सकते हैं। ग्राहकों के लिए सबसे अहम सवाल यह होगा कि जब एआई सिफारिश देने से आगे बढ़कर खरीदारी करने लगे, तब भी अंतिम नियंत्रण उनके हाथ में किस तरह बना रहे।
एआई भुगतान पृष्ठ से पहले ही खरीदारी को प्रभावित कर रहा
अध्ययन में 58 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने खरीदारी से पहले एआई की सिफारिशों की जांच करने की बात कही, जबकि 46 प्रतिशत ने कहा कि एआई की सिफारिश के कारण उन्होंने विचार किए जाने वाले ब्रांड बदल दिए। इसका मतलब है कि एआई का प्रभाव केवल भुगतान के समय तक सीमित नहीं रहेगा। वह यह भी प्रभावित कर सकता है कि ग्राहक किन उत्पादों, ब्रांडों और विक्रेताओं को अपनी अंतिम सूची में शामिल करता है।
इसलिए एआई आधारित खरीदारी के साथ केवल भुगतान सुरक्षा ही नहीं, बल्कि सिफारिशों की पारदर्शिता और उनकी विश्वसनीयता भी महत्वपूर्ण होगी। ग्राहक को यह समझने की जरूरत होगी कि किसी उत्पाद की सिफारिश किस आधार पर की गई और खरीदारी से पहले अंतिम निर्णय पर उसका नियंत्रण कितना है।
त्योहारी मौसम में ऑनलाइन खरीदारी बढ़ने के साथ एआई एजेंटों का इस्तेमाल भी बढ़ सकता है। इससे एक तरफ खरीदारी आसान और तेज होने की संभावना है, तो दूसरी तरफ बैंकों और वित्तीय संस्थानों को ऐसे लेनदेन में धोखाधड़ी, ग्राहक की अनुमति, डेटा सुरक्षा और विवाद निपटाने के नए तरीकों पर काम करना होगा। एआई के सलाहकार से कार्रवाई करने वाले एजेंट में बदलने के साथ ऑनलाइन खरीदारी की सुरक्षा व्यवस्था के सामने भी नई परीक्षा शुरू हो गई है।
