SSC GD ऑनलाइन परीक्षा में कथित हैकिंग और प्रॉक्सी सर्वर के जरिए बाहर बैठे सॉल्वर को अभ्यर्थियों के कंप्यूटर का नियंत्रण देने के मामले में मुख्य हैकर अरुण उर्फ ‘डेविल’ गिरफ्तार किया गया है।

एसएससी जीडी परीक्षा में हैकिंग का बड़ा खुलासा, ‘डेविल’ ने बदली सर्वर की प्रोग्रामिंग; 12 आरोपी गिरफ्तार

Team The420
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ग्रेटर नोएडा। कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की जनरल ड्यूटी (जीडी) कांस्टेबल ऑनलाइन परीक्षा में कथित हैकिंग और धांधली के मामले में यूपी एसटीएफ की नोएडा यूनिट ने मुख्य हैकर अरुण कुमार उर्फ ‘डेविल’ को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। मूल रूप से बिहार के पालीगंज का रहने वाला अरुण कथित तौर पर परीक्षा सर्वर की सोर्स फाइल में बदलाव कर प्रॉक्सी सर्वर तैयार करने वाले नेटवर्क का अहम हिस्सा था। आरोप है कि इसी तकनीकी व्यवस्था के जरिए परीक्षा केंद्र के बाहर बैठे सॉल्वर अभ्यर्थियों के कंप्यूटर सिस्टम को नियंत्रित कर प्रश्न हल करते थे। एसटीएफ इस मामले में अब तक 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

जांच के अनुसार, अरुण उर्फ ‘डेविल’ ने हैकर अमित राणा के साथ मिलकर परीक्षा सर्वर की मुख्य सोर्स फाइल को डिकोड किया था। इसके बाद सर्वर की प्रोग्रामिंग में कथित तौर पर बदलाव किए गए। इसी बदलाव के आधार पर एक प्रॉक्सी सर्वर तैयार किया जाता था, जो परीक्षा केंद्र में मौजूद कंप्यूटर सिस्टम और बाहर बैठे सॉल्वर के बीच कड़ी का काम करता था। इसके जरिए परीक्षा केंद्र में बैठे अभ्यर्थी के कंप्यूटर का नियंत्रण बाहर मौजूद व्यक्ति तक पहुंच जाता था।

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एसटीएफ के मुताबिक, इस व्यवस्था में अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र में मौजूद रहता था, जबकि कंप्यूटर को नियंत्रित करने और प्रश्न हल करने का काम कथित तौर पर बाहर बैठा सॉल्वर करता था। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस तकनीकी तरीके का इस्तेमाल कितने परीक्षा केंद्रों पर किया गया और नेटवर्क में कितने सॉल्वर तथा अन्य लोग शामिल थे।

मुखर्जी नगर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से शुरू हुआ सफर

पूछताछ में अरुण की तकनीकी पृष्ठभूमि भी सामने आई है। वह बीए पास है और उसने आईटीआई जहांगीरपुरी से कंप्यूटर फंडामेंटल का एक वर्षीय कोर्स किया था। वर्ष 2019 में दिल्ली के मुखर्जी नगर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान उसकी मुलाकात बिहार के दरभंगा निवासी मनोज से हुई। मनोज ऑनलाइन परीक्षाओं के संचालन से जुड़ा था। उसके साथ काम करने के दौरान अरुण ने ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली और उससे संबंधित तकनीकी पहलुओं की जानकारी हासिल की।

इसके बाद अरुण ने कथित तौर पर मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन और ऑनलाइन परीक्षा में तकनीकी तरीके से सेंध लगाने की व्यवस्था विकसित की। धीरे-धीरे उसका संपर्क उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार, झारखंड और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में सक्रिय सॉल्वर गिरोहों से हुआ। एसटीएफ के अनुसार, इसके बाद वह अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली के लिए तकनीकी मदद उपलब्ध कराने लगा।

जीडी परीक्षा के लिए बनाई विशेष स्क्रिप्ट

एसटीएफ की पूछताछ के मुताबिक, हाल में आयोजित एसएससी जीडी कांस्टेबल ऑनलाइन परीक्षा में कथित धांधली के लिए अमित कुमार को महत्वपूर्ण फाइल डिक्रिप्ट करके अरुण ने उपलब्ध कराई थी। दोनों ने मिलकर ऐसी विशेष स्क्रिप्ट तैयार की थी, जो परीक्षा केंद्र में इस्तेमाल होने वाले क्लाइंट कंप्यूटर सिस्टम को प्रॉक्सी सर्वर से जोड़ती थी।

जांच एजेंसी के अनुसार, इस व्यवस्था के बाद परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद सॉल्वर को संबंधित कंप्यूटर सिस्टम तक पहुंच मिल जाती थी। वह दूर बैठकर अभ्यर्थी की ओर से प्रश्न हल कर सकता था। एसटीएफ अब इस नेटवर्क से जुड़े तकनीकी उपकरणों और डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।

सीतापुर नर्सिंग परीक्षा में भी सामने आया था नाम

अरुण उर्फ ‘डेविल’ का नाम वर्ष 2024 में सीतापुर में आयोजित नर्सिंग स्टाफ अफसर ऑनलाइन परीक्षा में कथित धांधली के मामले में भी सामने आया था। इस संबंध में तालगांव थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच के अनुसार, मामले के मुख्य आरोपी उत्कर्ष को परीक्षा केंद्र में प्रॉक्सी सर्वर स्थापित करने के लिए पेन ड्राइव में सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराने में अरुण की कथित भूमिका थी। इस मामले में भी पुलिस और एसटीएफ उसकी तलाश कर रही थी।

12 टीएफटी स्क्रीन समेत उपकरण बरामद

एसटीएफ ने अरुण के कब्जे से 12 टीएफटी स्क्रीन, दो लैपटॉप, एक हैंडहेल्ड मेटल डिटेक्टर, आठ वीजीए स्विच, 11 रास्पबेरी पाई डिवाइस और 14 वीडियो कैप्चर डिवाइस बरामद किए हैं। इसके अलावा नौ यूएसबी-टू-टाइप-सी एडेप्टर, 13 एचडीटीवी-वीजीए एडेप्टर, नौ टीपी-लिंक यूएसबी ब्लूटूथ डोंगल, चार वीजीए-टू-एचडीटीवी एडेप्टर, एक ब्रॉडबैंड डिवाइस और दो आयरन सोल्डर मशीन भी मिली हैं।

पहले गिरफ्तार सात आरोपियों से ₹50 लाख नकद और प्रॉक्सी सर्वर बरामद किए जा चुके हैं। एसटीएफ अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और बरामद डिजिटल उपकरणों की जांच के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कथित तौर पर तैयार की गई तकनीक का इस्तेमाल अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में तो नहीं किया गया और परीक्षा केंद्रों के स्तर पर इसमें किस-किस की भूमिका रही।

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