कुशीनगर। फर्जी जीएसटी अधिकारी बनकर लोगों से कथित तौर पर साइबर ठगी करने वाले गिरोह के पांच आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोप है कि आरोपी खुद को जीएसटी विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को अलग-अलग तरीकों से विश्वास में लेते थे और रकम अपने बैंक खातों में मंगवाते थे। शुरुआती जांच में मामला साइबर अपराध से जुड़ा सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस ने पांचों आरोपियों को हमीरपुर पुलिस के हवाले कर दिया है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क, ठगी की रकम और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
मामले का खुलासा हमीरपुर में दर्ज एक लूट के मुकदमे की जांच के दौरान हुआ। हमीरपुर के कोतवाली नगर थाने में 22 सितंबर को लूट का मामला दर्ज किया गया था। पुलिस इस मामले में आरोपियों और उनके संपर्कों की जानकारी जुटा रही थी। इसी दौरान जांच में ऐसे लोगों की गतिविधियां सामने आईं, जो कथित तौर पर जीएसटी अधिकारी बनकर लोगों से पैसे अपने खातों में मंगवा रहे थे।
जांच के दौरान मिली जानकारी के बाद पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित की गई। टीम ने कार्रवाई करते हुए कुशीनगर क्षेत्र से पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तमकुहीराज क्षेत्र के कोईंदी गोसाई पट्टी निवासी भोला यादव, कृष यादव, अभिनव रावत और अमन यादव के रूप में हुई है। इसके अलावा तरयासुजान क्षेत्र के अहिरौली दान निवासी अंकित गुप्ता को भी गिरफ्तार किया गया है।
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पुलिस के अनुसार, आरोपियों पर फर्जी जीएसटी अधिकारी बनकर लोगों से संपर्क करने और सरकारी अधिकारी होने का विश्वास दिलाकर उनसे रकम हासिल करने का आरोप है। जांच में यह भी सामने आया कि कथित तौर पर ठगी से प्राप्त रकम आरोपियों के बैंक खातों में मंगाई जाती थी। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि आरोपियों ने कितने लोगों को निशाना बनाया और उनके माध्यम से कुल कितनी रकम की ठगी की गई।
गिरफ्तारी की सूचना हमीरपुर पुलिस को दी गई। गुरुवार सुबह हमीरपुर पुलिस की टीम कुशीनगर पहुंची, जिसके बाद स्थानीय पुलिस ने गिरफ्तार किए गए सभी पांच आरोपियों को हमीरपुर पुलिस को सौंप दिया। अब हमीरपुर पुलिस मामले में आरोपियों से पूछताछ कर रही है और उनके मोबाइल फोन, बैंक खातों तथा अन्य उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच किए जाने की संभावना है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अभी जांच शुरुआती चरण में है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित साइबर ठगी का कुल वित्तीय नुकसान कितना है। इसके साथ ही पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका क्या थी और क्या वे सीधे लोगों से संपर्क करते थे या किसी बड़े नेटवर्क के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने तथा रकम स्थानांतरित करने का काम कर रहे थे।
जांच एजेंसियां आरोपियों से जुड़े बैंक खातों में हुए लेनदेन की जानकारी जुटाकर रकम के स्रोत और उसके आगे के प्रवाह का पता लगाने में जुट सकती हैं। साइबर अपराध के मामलों में बैंक खाते, मोबाइल नंबर, सिम कार्ड और डिजिटल संचार के माध्यम से जुड़े लोगों की भूमिका सामने आने के बाद नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने में मदद मिलती है।
पुलिस ने संकेत दिया है कि जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पांचों आरोपियों से पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की आगे की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद कथित ठगी करने वाले पूरे नेटवर्क और उसमें शामिल लोगों की भूमिका का खुलासा होने की उम्मीद है।
