सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली मामले में ED को पूर्व निदेशकों और प्रवर्तकों की संपत्तियों की पहचान कर उन्हें अटैच करने तथा घर खरीदारों की रकम की वसूली तेज करने का निर्देश दिया है।

आम्रपाली केस में सुप्रीम कोर्ट सख्त, पूर्व निदेशकों-प्रवर्तकों की संपत्तियां अटैच करने का आदेश

Team The420
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नई दिल्ली। आम्रपाली समूह से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने घर खरीदारों की फंसी रकम की वसूली को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को कार्रवाई तेज करने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने पूर्व निदेशकों और प्रवर्तकों की संपत्तियों को अटैच करने की प्रक्रिया को प्राथमिकता देने को कहा है, ताकि लंबे समय से अटकी रकम की वसूली का रास्ता साफ हो सके। अदालत ने कहा कि वर्ष 2019 में दिए गए निर्देशों के बावजूद अब तक हुई कार्रवाई की गति पर्याप्त नहीं है।

न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से की गई संपत्ति कुर्की की प्रगति पर सवाल उठाया। अदालत के समक्ष बताया गया कि करीब छह साल की अवधि में अब तक 283.7 करोड़ रुपये की संपत्तियां ही अटैच की गई हैं, जबकि घर खरीदारों से जुड़ी करीब 5,619 करोड़ रुपये की रकम की वसूली का मामला लंबित है। अदालत ने संकेत दिया कि वसूली की प्रक्रिया को केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित रखने के बजाय उसके वास्तविक परिणाम पर ध्यान देना जरूरी है।

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सुनवाई के दौरान घर खरीदारों की ओर से अदालत को बताया गया कि फोरेंसिक ऑडिट के आधार पर 5,619.47 करोड़ रुपये की रकम में से अब तक केवल 744.81 करोड़ रुपये की वसूली हो सकी है। इसके अलावा आम्रपाली समूह के पूर्व प्रवर्तकों और निदेशकों से 2,159 करोड़ रुपये से अधिक की रकम अभी भी वसूल की जानी है। संबंधित तीसरे पक्षों से भी 1,200 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली का दावा सामने रखा गया।

सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को पूर्व निदेशकों, प्रवर्तकों और समूह से जुड़े अन्य जिम्मेदार पक्षों की संपत्तियों की पहचान कर उन्हें अटैच करने की कार्रवाई को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि घर खरीदारों की रकम की रिकवरी इस मामले में प्राथमिकता होनी चाहिए। ईडी को अगली सुनवाई पर अपनी कार्रवाई की अद्यतन स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है। रिपोर्ट में यह बताना होगा कि संबंधित पूर्व निदेशकों, प्रवर्तकों और मुख्य वित्तीय अधिकारी से जुड़ी संपत्तियों के खिलाफ अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

अदालत ने कुर्क की गई संपत्तियों की बिक्री को लेकर संबंधित धनशोधन निवारण कानून (पीएमएलए) अदालतों को भी प्रक्रिया तेज करने का सुझाव दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि संभव हो तो ऐसी अर्जियों और मामलों की सुनवाई रोजाना आधार पर की जा सकती है, ताकि संपत्तियों की बिक्री और उससे मिलने वाली रकम को घर खरीदारों तक पहुंचाने में अनावश्यक देरी न हो।

आम्रपाली मामले में घर खरीदारों की समस्या केवल धन की वसूली तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में खरीदार वर्षों से अपने घरों का इंतजार कर रहे हैं। अदालत के समक्ष उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस मामले से 46 हजार से अधिक घर खरीदार प्रभावित हैं। निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने के लिए एनबीसीसी ने बड़ी संख्या में परियोजनाओं को पूरा किया है। अब तक 33,250 फ्लैट तैयार किए जा चुके हैं, लेकिन इनमें से करीब 22,350 खरीदारों को ही वास्तविक कब्जा मिल सका है।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी आम्रपाली समूह की अटकी परियोजनाओं को पूरा कराने और घर खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए कई निर्देश दिए हैं। परियोजनाओं के निर्माण के साथ-साथ वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी रकम की पहचान और उसकी वसूली भी मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी वजह से अदालत ने ईडी की कार्रवाई और संपत्तियों की कुर्की की रफ्तार पर विशेष जोर दिया है।

अब मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी। उस समय ईडी की ओर से पेश की जाने वाली अद्यतन स्थिति रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि पूर्व निदेशकों और प्रवर्तकों की संपत्तियों की पहचान तथा कुर्की की दिशा में कितनी प्रगति हुई है और घर खरीदारों की बकाया रकम की वसूली के लिए आगे क्या कदम उठाए गए हैं।

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