आगरा में कथित बोगस फर्म द्वारा फर्जी किरायानामा और बिजली बिल से GST पंजीकरण कर ₹1.02 करोड़ से अधिक ITC लेने के मामले में FIR दर्ज की गई है।

बोगस फर्म से 1 करोड़ से ज्यादा की आईटीसी ठगी, फर्जी किरायानामा और बिजली बिल से कराया जीएसटी पंजीकरण

Team The420
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आगरा। बोगस फर्म के जरिये एक करोड़ रुपये से अधिक की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का कथित फर्जीवाड़ा सामने आया है। लोहामंडी थाने में टेढ़ी बगिया स्थित एमएस निहाल ट्रेडिंग कंपनी के संचालक के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। आरोप है कि फर्म का जीएसटी पंजीकरण कराने के लिए ऑनलाइन आवेदन में फर्जी पते का बिजली बिल और किरायानामा अपलोड किया गया था। विशेष अनुसंधान शाखा की जांच में फर्म के घोषित कारोबारी पते पर उसका अस्तित्व नहीं मिला, जिसके बाद मामले में कार्रवाई की गई।

प्राथमिकी राज्य कर विभाग के अधिकारी की शिकायत पर दर्ज कराई गई है। जांच के दौरान आरोपी फर्म से संबंधित जीएसटी पोर्टल पर उपलब्ध दस्तावेजों और लेनदेन के आंकड़ों की समीक्षा की गई। रिकॉर्ड के अनुसार फर्म ने 10 जुलाई 2018 को जीएसटी पंजीकरण हासिल किया था। ऑनलाइन आवेदन में कारोबारी स्थल का पता ‘शॉप नंबर बगिया’ दर्ज किया गया था। इसके साथ ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर और एक्सिस बैंक का खाता भी उपलब्ध कराया गया था।

राज्य कर विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, सहायक आयुक्त राज्य कर, आगरा सेक्टर ने 21 अक्टूबर 2019 को फर्म का पंजीकरण निरस्त कर दिया था। इसके बाद विशेष अनुसंधान शाखा ने मामले की जांच आगे बढ़ाई। जांच टीम ने पंजीकरण के समय बताए गए कारोबारी पते का सत्यापन किया तो वहां संबंधित फर्म का कोई कार्यालय या कारोबार संचालित होता नहीं मिला। इससे पंजीकरण के लिए दिए गए दस्तावेजों की सत्यता पर सवाल खड़े हुए।

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जांच में यह भी सामने आया कि फर्म के कारोबारी पते से जुड़े दस्तावेजों में टेढ़ी बगिया निवासी एक व्यक्ति का बिजली बिल लगाया गया था। संबंधित व्यक्ति ने फर्म के लिए किरायानामा देने से इनकार किया। जांच के दौरान उन्होंने फर्म के नाम और उसके कथित कारोबार के बारे में भी जानकारी होने से इनकार किया। विभाग के अनुसार ये दस्तावेज ऑनलाइन आवेदन के दौरान अपलोड किए गए थे।

जांच में फर्म के जरिये बड़े पैमाने पर कथित बोगस लेनदेन किए जाने की बात सामने आई। रिकॉर्ड के अनुसार फर्म ने 5.69 करोड़ रुपये की बोगस इनवर्ड सप्लाई प्राप्त दिखाई। इसके आधार पर करीब 1.02 करोड़ रुपये की आईटीसी का दावा कर उसका इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। विभाग अब इस लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों, आपूर्ति करने वाली इकाइयों और आईटीसी के उपयोग की प्रक्रिया की भी जांच कर रहा है।

मामले में आउटवर्ड सप्लाई से जुड़े आंकड़े भी जांच के दायरे में हैं। रिकॉर्ड में 53.88 करोड़ रुपये से अधिक की आउटवर्ड सप्लाई घोषित किए जाने और 46.59 लाख रुपये से अधिक की बोगस आईटीसी पास ऑन किए जाने की बात सामने आई है। विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि इन लेनदेन के पीछे वास्तविक कारोबारी गतिविधियां थीं या केवल कागजी बिलों के जरिये आईटीसी का लाभ लेने और उसे आगे बढ़ाने की व्यवस्था बनाई गई थी।

कर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, जीएसटी पंजीकरण के दौरान कारोबारी स्थल, किरायानामा और बिजली बिल जैसे दस्तावेजों का सत्यापन महत्वपूर्ण है। फर्जी दस्तावेजों के जरिये पंजीकरण हासिल कर लेने के बाद ऐसी फर्मों का इस्तेमाल बिना वास्तविक माल की आपूर्ति के बिल बनाने और आईटीसी के लेनदेन में किया जा सकता है। इसी वजह से जांच एजेंसियां संबंधित फर्म के बैंक खातों, जीएसटी रिटर्न, इनवर्ड और आउटवर्ड सप्लाई तथा लेनदेन से जुड़े पक्षों की जानकारी खंगाल रही हैं।

विभाग के अनुसार आगरा में आईटीसी से जुड़े फर्जीवाड़े के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। पुलिस और कर विभाग इन मामलों में जांच कर रहे हैं। मौजूदा मामले में भी प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच करेगी। जांच के आधार पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने, उनका इस्तेमाल करने और कथित बोगस आईटीसी लेनदेन में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आने की संभावना है।

पुलिस के अनुसार मामले में जांच जारी है और उपलब्ध दस्तावेजों तथा लेनदेन के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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