करीब ₹87.67 करोड़ के फर्जी बिलों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने, इस्तेमाल करने और आगे पास करने का आरोप; जांच में कई आपूर्तिकर्ता फर्म अस्तित्वहीन, बंद या निष्क्रिय मिलीं

आईटीसी के नाम पर ₹15.78 करोड़ की जीएसटी धोखाधड़ी, आयरन-स्टील फर्म का साझेदार गिरफ्तार

Roopa
By Roopa
4 Min Read

नई दिल्ली। आयरन और स्टील कारोबार से जुड़ी एक फर्म के साझेदार को कथित तौर पर ₹15.78 करोड़ से अधिक का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) हासिल करने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) दिल्ली दक्षिण आयुक्तालय की कर चोरी रोधी शाखा की जांच में सामने आया कि फर्म ने ऐसी कई कंपनियों से जारी चालानों के आधार पर आईटीसी का दावा किया, जिनमें कुछ अस्तित्वहीन, कुछ गैर-संचालित और कुछ निलंबित या रद्द पाई गईं।

जांच के दौरान अधिकारियों ने संबंधित आपूर्तिकर्ताओं के घोषित कारोबारी पते का भौतिक सत्यापन भी किया। इसमें पाया गया कि कुछ आपूर्तिकर्ताओं के पंजीकृत पते पर वास्तविक कारोबारी गतिविधि नहीं हो रही थी। जांच एजेंसी के अनुसार, इन फर्मों से जारी कथित फर्जी चालानों का इस्तेमाल वास्तविक माल की आपूर्ति के बिना आईटीसी हासिल करने के लिए किया गया।

जांच में करीब ₹87.67 करोड़ के ऐसे चालानों का पता चला, जिनके आधार पर ₹15.78 करोड़ से अधिक के आईटीसी को कथित तौर पर गलत तरीके से हासिल करने, इस्तेमाल करने और अन्य प्राप्तकर्ताओं को आगे हस्तांतरित करने की गतिविधि सामने आई। अधिकारियों के अनुसार, फर्म ने जिन चालानों के आधार पर आईटीसी लिया, उनके अनुरूप वास्तविक माल की प्राप्ति नहीं हुई थी।

पूछताछ में यह भी सामने आया कि कथित तौर पर बिना किसी वास्तविक माल की आपूर्ति के चालान जारी कर आईटीसी विभिन्न अन्य प्राप्तकर्ताओं तक भी पहुंचाया गया। इस तरह फर्जी बिलों के जरिए कर क्रेडिट की पूरी श्रृंखला तैयार किए जाने की आशंका है।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

सीजीएसटी अधिकारियों ने जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के साथ-साथ केंद्रीय जीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 70 के तहत दर्ज बयानों के आधार पर कार्रवाई की। फर्म के साझेदार को 14 सितंबर को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को पटियाला हाउस अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अधिकारियों ने मामले में फर्जी चालानों के स्रोत, संबंधित आपूर्तिकर्ताओं और आईटीसी के कथित हस्तांतरण से जुड़े अन्य पक्षों की भूमिका की भी जांच शुरू की है।

कर अधिकारियों की जांच का मुख्य बिंदु यह है कि जिन लेनदेन के आधार पर आईटीसी का दावा किया गया, उनमें वास्तव में वस्तुओं की खरीद-बिक्री और आपूर्ति हुई थी या नहीं। जीएसटी व्यवस्था में आईटीसी का लाभ वास्तविक आपूर्ति और निर्धारित शर्तों के अनुपालन से जुड़ा है। ऐसे में बिना माल की वास्तविक प्राप्ति के फर्जी या कागजी चालानों के आधार पर आईटीसी का दावा जांच और कार्रवाई का आधार बन सकता है।

मामले में सामने आए कथित फर्जी चालानों का कुल मूल्य ₹87.67 करोड़ से अधिक है, जबकि इनसे संबंधित संदिग्ध आईटीसी ₹15.78 करोड़ से अधिक बताया गया है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कितनी फर्में शामिल थीं और फर्जी चालानों के जरिए आईटीसी का लाभ किन-किन कारोबारियों या संस्थाओं तक पहुंचाया गया।

हमसे जुड़ें

Share This Article