वाराणसी में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 15 अवैध कॉल सेंटरों पर छापा; 175 आरोपी गिरफ्तार, 550 लोगों को ठगी के जाल से सुरक्षित निकाला

एक साल में साइबर ठगी के 277 आरोपी गिरफ्तार, 58 गिरोह का पर्दाफाश; ₹25 करोड़ की रकम होल्ड

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By Roopa
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वाराणसी। साइबर अपराधियों के खिलाफ वाराणसी पुलिस ने पिछले एक वर्ष में बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए 58 साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया और सरगनाओं समेत 277 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इस दौरान निवेश के नाम पर धोखाधड़ी, नौकरी दिलाने का झांसा, विदेशियों से ठगी और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में कार्रवाई की गई। पुलिस ने साइबर अपराध में इस्तेमाल 17 चार पहिया वाहन भी जब्त किए, जबकि 21 आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई।

सोमवार को पुलिस आयुक्त ने साइबर थाना और साइबर सेल का निरीक्षण कर विभिन्न पोर्टलों, शिकायत रजिस्टरों और लंबित मामलों की समीक्षा की। उन्होंने साइबर अपराध के पीड़ितों की सहायता के लिए हेल्प डेस्क स्थापित करने और वहां प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों की तैनाती के निर्देश दिए। शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और पीड़ितों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।

15 अवैध कॉल सेंटरों पर छापे

साइबर क्राइम पुलिस ने पिछले एक वर्ष में 15 अवैध कॉल सेंटरों का पर्दाफाश किया। इन केंद्रों से निवेश के नाम पर धोखाधड़ी, नौकरी दिलाने के बहाने ठगी और विदेशियों को निशाना बनाकर साइबर अपराध किए जाने के आरोप सामने आए। पुलिस के अनुसार, इन कॉल सेंटरों से जुड़े 175 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

जांच में सामने आया कि आरोपी खुद को अमेरिकी या संघीय अधिकारी बताकर विदेशी नागरिकों से संपर्क करते थे और विभिन्न बहानों से उनसे रकम ऐंठते थे। कार्रवाई के दौरान साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े उपकरण और अन्य सामग्री भी बरामद की गई।

550 लोगों को ठगी के जाल से निकाला

पुलिस ने मल्टीलेवल मार्केटिंग और ठगी के कथित नेटवर्क में फंसे 550 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर उनके परिजनों को सौंपा। कार्रवाई के दौरान अपराध में इस्तेमाल किए जा रहे 17 चार पहिया वाहनों को जब्त किया गया। साइबर अपराध में शामिल 21 आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

मोबाइल नंबर और उपकरण भी किए ब्लॉक

साइबर अपराधियों द्वारा मोबाइल और संचार माध्यमों के दुरुपयोग को रोकने के लिए 10,176 मोबाइल नंबर और 8,262 मोबाइल उपकरणों के आईएमईआई नंबर ब्लॉक कराए गए। पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य साइबर ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे संसाधनों को निष्क्रिय करना और उनके दोबारा दुरुपयोग की संभावना को कम करना है।

डिजिटल अरेस्ट के पांच मामलों में 36 जेल भेजे

डिजिटल अरेस्ट से जुड़े पांच मामलों में पुलिस ने 36 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। इन मामलों में आरोपियों से करीब ₹1.20 करोड़ की रकम और साइबर अपराध में इस्तेमाल किए गए उपकरण बरामद किए गए। जांच में डिजिटल माध्यमों से लोगों को डराकर और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर रकम वसूलने के मामलों में भी कार्रवाई की गई।

₹25 करोड़ की रकम कराई होल्ड

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज 16,982 शिकायतों का पुलिस ने निस्तारण किया। त्वरित कार्रवाई के जरिए साइबर ठगों के खातों में जाने वाली करीब ₹25 करोड़ की रकम अलग-अलग बैंक खातों में होल्ड कराई गई। इसके अलावा कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ₹4.50 करोड़ की रकम सीधे पीड़ितों के बैंक खातों में वापस कराई गई।

साइबर ठगी से बचाव के लिए अपील

पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों से साइबर अपराध को लेकर सतर्क रहने की अपील की। इंटरनेट बैंकिंग की यूजर आईडी, पासवर्ड और अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करने तथा संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचने की सलाह दी गई। अनजान लोगों के कहने पर कोई एप डाउनलोड नहीं करने को भी कहा गया।

ऑनलाइन वित्तीय ठगी होने पर पीड़ितों से तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करने और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर सूचना दर्ज कराने की अपील की गई है। पुलिस के अनुसार, शुरुआती समय में शिकायत मिलने पर ठगी की रकम को रोकने और उसे वापस कराने की संभावना बढ़ जाती है।

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