कानपुर। एक ऑटो चालक के दस्तावेजों का कथित दुरुपयोग कर उसके नाम पर फर्जी फर्म बनाई गई और बैंक से 80 लाख रुपये का लोन स्वीकृत कराकर रकम हड़प ली गई। मामले का खुलासा तब हुआ, जब चालक के घर बैंक की ओर से हर महीने करीब 81 हजार रुपये की ईएमआई जमा करने का नोटिस पहुंचा। पीड़ित का आरोप है कि उसके दस्तावेजों के जरिए कई अन्य लोगों के नाम पर भी इसी तरह लोन और वित्तीय धोखाधड़ी की गई और पूरा नेटवर्क करीब 200 से 250 करोड़ रुपये का हो सकता है।
मामले में बैंक के तत्कालीन दो सहायक महाप्रबंधकों, एक तत्कालीन बैंक मैनेजर, जीएसटी अधिकारी और बिचौलियों समेत नौ लोगों के खिलाफ कल्याणपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने तीन आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। जांच अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती पड़ताल में मामला संगठित तरीके से बैंक लोन हासिल करने वाले गिरोह से जुड़ा नजर आ रहा है।
मामले की शुरुआत सितंबर 2024 में हुई। विनायकपुर निवासी ऑटो चालक की मुलाकात सीवान निवासी एक व्यक्ति से हुई थी। उसने खुद को चार्टर्ड अकाउंटेंट बताते हुए चालक को लखनपुर स्थित अपने कार्यालय में नौकरी देने का भरोसा दिया। कुछ समय बाद उसने सरकारी योजनाओं के तहत 10 लाख रुपये तक का लोन दिलाने की बात कही। इसी बहाने चालक से आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और अन्य जरूरी दस्तावेज ले लिए गए।
आरोप है कि इसके बाद चालक को बैंक के तत्कालीन मैनेजर से मिलवाया गया। उसे बताया गया कि यदि वह दूसरे लोगों को भी लोन के लिए लेकर आएगा तो प्रत्येक फाइल पर 20 हजार रुपये कमीशन मिलेगा। इस लालच में चालक ने करीब 10 से 12 अन्य लोगों के दस्तावेज भी उपलब्ध करा दिए। बाद में उसकी मुलाकात बैंक के तत्कालीन दो सहायक महाप्रबंधकों से भी कराई गई।
जांच में आरोप लगाया गया है कि चालक के नाम पर ‘फ्लोर एंड राइस मिल’ नाम से एक फर्जी फर्म तैयार की गई। इसके लिए जीएसटी पंजीकरण में भी कथित तौर पर नियमों की अनदेखी की गई। आरोप है कि जीएसटी अधिकारी को पांच हजार रुपये देकर पंजीकरण कराया गया। फर्म के नाम पर सरकारी योजना के तहत बैंक लोन लेने की प्रक्रिया शुरू की गई।
लोन स्वीकृत कराने के लिए मशीनों की खरीद के नाम पर कथित तौर पर फर्जी कोटेशन तैयार किए गए। आरोप है कि इनमें फर्जी जीएसटी नंबरों का इस्तेमाल किया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि लोन के भौतिक सत्यापन के दौरान ऑटो चालक की मृत मां को जीवित दर्शाया गया। उनकी जमीन से जुड़े दस्तावेजों को कथित तौर पर बैंक के सामने बंधक के रूप में प्रस्तुत किया गया।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
इन दस्तावेजों और कथित फर्जी कोटेशन के आधार पर बैंक से 80 लाख रुपये का लोन स्वीकृत करा लिया गया। आरोप है कि लोन की पूरी रकम निकालकर हड़प ली गई, जबकि जिस व्यक्ति के नाम पर फर्म और कर्ज लिया गया, उसे इसकी जानकारी तक नहीं थी। ऑटो चालक को जब बैंक की ओर से ईएमआई चुकाने का नोटिस मिला, तब उसे अपने नाम पर हुए इस कथित फर्जीवाड़े की जानकारी हुई।
नोटिस में हर महीने करीब 81 हजार रुपये की ईएमआई जमा करने को कहा गया था। इसके बाद चालक बैंक पहुंचा और अपने नाम पर लिए गए लोन के बारे में जानकारी मांगी। आरोप है कि वहां उसे मामले को लेकर धमकाया गया। इसके बाद उसने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की।
शिकायत के आधार पर कल्याणपुर थाने में जालसाजी, धोखाधड़ी, धमकी और अन्य संबंधित धाराओं में नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने तीन आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। बैंक के रिकॉर्ड, लोन से जुड़े दस्तावेज, फर्जी फर्म के पंजीकरण और जीएसटी विवरण की जांच की जा रही है।
पीड़ित का दावा है कि उसके अलावा 10 से 12 अन्य लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल भी इसी तरह किया गया। उसके अनुसार, इन लोगों के नाम पर स्वीकृत कराए गए कर्ज और अन्य कथित वित्तीय लेनदेन को मिलाकर धोखाधड़ी की रकम 200 से 250 करोड़ रुपये तक हो सकती है। हालांकि, इस बड़े दावे की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी फर्मों का जाल कितने लोगों के नाम पर तैयार किया गया, कितने बैंक खातों से रकम निकाली गई और इस पूरी प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका थी। जांच में बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े लोगों, जीएसटी पंजीकरण, फर्जी कोटेशन तैयार करने और लोन की रकम के इस्तेमाल की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, जांच आगे बढ़ने पर कथित नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और धोखाधड़ी की वास्तविक रकम का खुलासा हो सकता है।
