नर्मदापुरम। डीजल भरवाने पर 2 प्रतिशत तक छूट का लालच देकर एक किसान से ₹4.35 लाख की साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने झारखंड से एक आरोपी को हिरासत में लिया है। आरोपी की पहचान झारखंड के हजारीबाग जिले के बानादाग निवासी टिंकू कुमार (36) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने एक निजी कंपनी से जुड़ा होने का दावा कर डीजल पर छूट दिलाने का झांसा दिया और इसके लिए पीड़ित के मोबाइल पर APK फाइल भेजी। फाइल डाउनलोड करने के बाद मोबाइल की गतिविधियों पर साइबर अपराधियों का नियंत्रण होने और बैंक खाते से अलग-अलग बार में रकम ट्रांसफर किए जाने का आरोप है।
मामला डांगीवाड़ा निवासी दिनेश मुराडीया से जुड़ा है। जनवरी 2026 में उन्होंने माखननगर थाने में साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, उनके व्हाट्सऐप पर एक APK फाइल भेजी गई थी। इसे डाउनलोड करने के बाद मोबाइल में संदिग्ध गतिविधियां शुरू हो गईं। कुछ समय बाद उनके बैंक खाते से अलग-अलग लेनदेन के जरिए कुल ₹4.35 लाख ट्रांसफर हो गए।
जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी ने खुद को ट्रांसपोर्ट से जुड़ी कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए डीजल पर डेढ़ से 2 प्रतिशत तक डिस्काउंट देने का प्रस्ताव दिया था। इसके अलावा मैकेनिक सुविधा उपलब्ध कराने और करीब ₹3 हजार की राशि में फ्यूल कार्ड बनवाने की बात कही गई। इस ऑफर पर भरोसा कर पीड़ित ने आरोपी की ओर से भेजी गई लिंक और फाइल पर अपनी जानकारी दर्ज कर दी।
FCRF Launches India-Focused BFSI Compliance Certification for Emerging Governance Professionals
आरोप है कि इसी प्रक्रिया के दौरान उसके मोबाइल पर फर्जी फ्यूल कार्ड तैयार किया गया। इसके बाद उसके नाम और कार्ड से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल डीजल रिचार्ज के नाम पर लेनदेन के लिए किया गया। इसी दौरान बैंक खाते से रकम निकाल ली गई। पीड़ित को जब खाते से पैसे ट्रांसफर होने की जानकारी मिली तो उसने पुलिस से शिकायत की।
शिकायत के बाद पुलिस ने साइबर सेल से तकनीकी जानकारी जुटाई। जांच में लेनदेन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर झारखंड के हजारीबाग जिले के टिंकू कुमार की भूमिका सामने आने का दावा किया गया। इसके बाद पुलिस टीम ने झारखंड पहुंचकर कार्रवाई की और आरोपी को अभिरक्षा में लेकर नर्मदापुरम लाया।
पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि APK फाइल किस माध्यम से तैयार की गई थी, पीड़ित के मोबाइल से कौन-कौन सी जानकारी हासिल की गई और बैंक खाते से रकम ट्रांसफर करने में किन खातों का इस्तेमाल हुआ। पुलिस को मामले में अन्य लोगों के भी शामिल होने की आशंका है। उनकी पहचान और भूमिका की जांच की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, डिजिटल ठगी में आरोपियों ने पहले भरोसा हासिल करने के लिए छूट और सुविधा का लालच दिया और बाद में मोबाइल पर भेजी गई फाइल डाउनलोड कराई। साइबर जांच के जरिए लेनदेन से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को जोड़कर आरोपी तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। आरोपी से पूछताछ के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
