पणजी। गोवा में कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल कर ₹2 करोड़ की साइबर ठगी करने के आरोप में पुणे के दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि जालसाजों ने व्हाट्सऐप पर कंपनी के सीईओ की पहचान का इस्तेमाल करते हुए अकाउंटेंट को बड़ी रकम अलग-अलग बैंक खातों में आरटीजीएस के जरिए भेजने के लिए कहा। शिकायत मिलने के बाद साइबर अपराध पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए मामले के पंजीकरण के 48 घंटे के भीतर दोनों आरोपियों को पकड़ लिया।
पुलिस के मुताबिक, साइबर ठगी की शिकायत सामने आने के बाद जांच में पता चला कि आरोपियों ने कंपनी के सीईओ के नाम और प्रोफाइल फोटो का इस्तेमाल कर व्हाट्सऐप पर अकाउंटेंट से संपर्क किया था। बातचीत के दौरान ऐसा माहौल बनाया गया कि रकम भेजने का निर्देश स्वयं कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी की ओर से दिया गया है। भरोसे में आए अकाउंटेंट ने कथित निर्देशों के आधार पर ₹2 करोड़ कई बैंक खातों में आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर कर दिए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर अपराध पुलिस ने तुरंत संबंधित बैंक खातों की जानकारी जुटानी शुरू की। जांचकर्ताओं ने उन खातों की पहचान की, जिनमें ठगी की रकम पहुंची थी। इसके बाद रकम के लेन-देन और उससे जुड़े बैंकिंग रिकॉर्ड का विश्लेषण कर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की गई।
जांच के दौरान पैसे के लेन-देन की कड़ियां पुणे तक पहुंचीं। इसके बाद पुलिस की एक टीम पुणे भेजी गई। वहां लोहेगांव स्थित पुणे अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के आसपास कार्रवाई करते हुए दीपक मसके और श्याम कासार को पकड़ लिया गया। दोनों आरोपी पुणे के रहने वाले बताए गए हैं।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को गोवा लाया गया और अदालत के समक्ष पेश किया गया। पुलिस अब मामले में आगे की जांच कर रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य ₹2 करोड़ की पूरी रकम के लेन-देन का पता लगाना, संबंधित बैंक खातों की भूमिका स्पष्ट करना और इस साइबर ठगी से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करना है।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस तरह की ठगी में केवल रकम हासिल करने वाले व्यक्ति ही नहीं, बल्कि बैंक खातों की व्यवस्था करने, धन को अलग-अलग खातों में भेजने और आगे निकालने वाले अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। ऐसे में पुलिस पैसे की पूरी आवाजाही और प्रत्येक संदिग्ध खाते के इस्तेमाल की पड़ताल कर रही है।
यह मामला साइबर ठगी के उस तरीके को भी उजागर करता है, जिसमें जालसाज किसी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल कर कर्मचारियों से वित्तीय लेन-देन कराने की कोशिश करते हैं। व्हाट्सऐप प्रोफाइल पर अधिकारी की वास्तविक तस्वीर लगाने से कर्मचारी को संदेश की विश्वसनीयता का भ्रम हो सकता है। इसके बाद तत्काल भुगतान, गोपनीयता या आपात स्थिति का हवाला देकर बिना स्वतंत्र पुष्टि के रकम ट्रांसफर कराने का दबाव बनाया जाता है।
पुलिस ने कारोबारियों और आम लोगों से अपील की है कि व्हाट्सऐप, ईमेल या किसी अन्य डिजिटल माध्यम से बड़ी रकम ट्रांसफर करने का निर्देश मिलने पर केवल संदेश या प्रोफाइल फोटो के आधार पर भरोसा न करें। ऐसे अनुरोधों की संबंधित अधिकारी से किसी वैकल्पिक और आधिकारिक माध्यम से पुष्टि करनी चाहिए। किसी संदिग्ध लेन-देन या साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल पुलिस को सूचना देना भी जरूरी है, ताकि रकम को आगे स्थानांतरित होने से रोकने के लिए समय रहते कार्रवाई की जा सके।
