केरल हाईकोर्ट ने SNDP योगम माइक्रोफाइनेंस घोटाले में अभियोजन मंजूरी पर देरी को लेकर गृह विभाग की कार्यशैली पर नाराजगी जताई है।

केरल हाईकोर्ट की सख्ती, माइक्रोफाइनेंस घोटाले में अभियोजन मंजूरी पर गृह विभाग की देरी से नाराजगी

Team The420
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कोच्चि। केरल हाईकोर्ट ने श्री नारायण धर्म परिपालन (एसएनडीपी) योगम माइक्रोफाइनेंस घोटाले से जुड़े मामले में अभियोजन मंजूरी की प्रक्रिया में गृह विभाग की देरी पर कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन ने शुक्रवार को गृह विभाग की कार्यशैली पर ‘अत्यधिक नाराजगी’ व्यक्त करते हुए कहा कि अदालत के आदेश के बावजूद संबंधित फाइल आगे भेजने में हुई देरी अदालत के आदेश का पालन करने में हिचकिचाहट जैसी प्रतीत होती है।

अदालत ने पहले पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया था कि मामले में एक आरोपी अधिकारी के खिलाफ अभियोजन चलाने की मंजूरी देने में देरी क्यों हो रही है। हालांकि, गृह विभाग ने संबंधित फाइल 10 सितंबर को ही अतिरिक्त मुख्य सचिव के पास भेजी। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अदालत को बताया कि उन्हें विचार के लिए फाइल अभी प्राप्त नहीं हुई थी।

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अदालत के सवालों के बीच अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बताया कि अभियोजन मंजूरी के मुद्दे पर विचार किया जाएगा और 18 सितंबर तक इस संबंध में निर्णय लिया जाएगा। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि निर्धारित तारीख तक मंजूरी पर आदेश जारी नहीं किया जाता है तो अतिरिक्त मुख्य सचिव को अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।

यह मामला एसएनडीपी योगम को दिए गए माइक्रोफाइनेंस ऋणों में कथित गबन से जुड़ा है। आरोप है कि केरल राज्य पिछड़ा वर्ग विकास निगम की ओर से वर्ष 2003 से 2014 के बीच पिछड़े समुदायों के लाभ के लिए वितरित किए गए ऋणों में कथित तौर पर अनियमितताएं और धन के दुरुपयोग की घटनाएं हुईं।

मामले में अभियोजन मंजूरी की आवश्यकता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आरोपियों में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग से जुड़ा एक अधिकारी भी शामिल है। संबंधित अधिकारी के खिलाफ आपराधिक अभियोजन शुरू करने के लिए सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी आवश्यक है। इसी मंजूरी पर निर्णय में हो रही देरी को लेकर मामला हाईकोर्ट के समक्ष पहुंचा है।

मामले में एसएनडीपी योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नटेशन समेत एम.एन. सोमन, के.के. महेशन, के.एस. साबू, वसंतकुमार, टी. प्रभाकरन और आर. पुरुषोत्तमन के नाम आरोपी के तौर पर सामने आए हैं। इन पर माइक्रोफाइनेंस योजना के तहत वितरित ऋणों से संबंधित कथित वित्तीय अनियमितताओं और धन के दुरुपयोग के मामले में कार्रवाई की मांग की गई है।

हाईकोर्ट की ताजा टिप्पणी से स्पष्ट है कि अब अभियोजन मंजूरी की प्रक्रिया को और लंबा खींचने पर अदालत सख्त रुख अपना सकती है। 18 सितंबर की समयसीमा तक निर्णय नहीं होने की स्थिति में अतिरिक्त मुख्य सचिव की व्यक्तिगत उपस्थिति का निर्देश भी अदालत ने इसी वजह से दिया है।

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