प्रयागराज। मांडा के कोसड़ा कला गांव में खेतों के बीच नर्सरी की आड़ में संचालित कथित अवैध फैक्टरी से बरामद करीब ₹139 करोड़ की मेथामफेटामाइन (एमडी) ने मादक पदार्थों के बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क की आशंका को गहरा कर दिया है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि बरामद नशीले पदार्थ का कथित नेटवर्क केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था, बल्कि मुंबई और गुजरात समेत कई राज्यों तक इसकी सप्लाई के तार जुड़े हो सकते हैं। भारी मात्रा में एमडी मिलने के बाद जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुट गई हैं।
जांच का मुख्य केंद्र इस समय यह पता लगाना है कि इतनी बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ तैयार करने या उसे यहां तक पहुंचाने के लिए आवश्यक कच्चा माल कहां से आया। एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कच्चे माल की आपूर्ति किसने की, उसे खेत तक किस माध्यम से पहुंचाया गया और कथित फैक्टरी में तैयार एमडी को किन स्थानों पर भेजने की तैयारी थी।
कोसड़ा कला में खेतों के बीच नर्सरी की आड़ में गतिविधियां संचालित होने की जानकारी सामने आने के बाद जांच का दायरा स्थानीय स्तर से बढ़ाकर अंतरराज्यीय स्तर तक किया गया है। एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि खेत का इस्तेमाल केवल नशीले पदार्थ को कुछ समय के लिए छिपाकर रखने के लिए किया गया था या यहां से एमडी की तैयार खेप को अलग-अलग राज्यों में भेजने का कोई संगठित तंत्र भी काम कर रहा था।
करीब पांच दिन पहले मुंबई में हुई कार्रवाई के बाद इस नेटवर्क से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की बात कही जा रही है। इसके बाद मांडा में खेत के भीतर बड़ी मात्रा में एमडी छिपाए जाने की जानकारी सामने आई। इतनी बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित मादक पदार्थ ग्रामीण इलाके में मौजूद होने से स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं। हालांकि, जांच एजेंसियां अब इन सवालों से आगे बढ़कर पूरे नेटवर्क की संरचना और इसके संभावित संचालकों की पहचान पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
जांच में मुंबई और गुजरात तक सप्लाई के संकेत
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि एमडी की कथित सप्लाई उत्तर प्रदेश के अलावा मुंबई और गुजरात समेत अन्य राज्यों तक भी की जाती थी। एजेंसियां अब संभावित खरीदारों, वितरकों और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान के लिए उपलब्ध सूचनाओं का मिलान कर रही हैं। अलग-अलग राज्यों में सामने आए मादक पदार्थों से जुड़े मामलों और संदिग्ध गतिविधियों से भी इस नेटवर्क की संभावित कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।
करीब ₹139 करोड़ मूल्य की एमडी की बरामदगी को जांच एजेंसियां एक सामान्य बरामदगी के तौर पर नहीं देख रही हैं। इतनी बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ की मौजूदगी से आशंका है कि इसके पीछे कई स्तरों पर काम करने वाला संगठित गिरोह सक्रिय हो सकता है। हालांकि, गिरोह की वास्तविक संरचना, इसमें शामिल लोगों की संख्या और उनकी भूमिकाएं जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगी।
एजेंसियां अब बरामद एमडी के संभावित स्रोत से लेकर उसके अंतिम गंतव्य तक की पूरी आपूर्ति श्रृंखला का पता लगाने में जुटी हैं। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि नशीले पदार्थ की खरीद, निर्माण, भंडारण और परिवहन के लिए किस तरह की व्यवस्था की गई थी। इसके साथ ही संभावित आर्थिक लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है, ताकि नेटवर्क से जुड़े प्रमुख लोगों तक पहुंचा जा सके।
स्थानीय संपर्कों की भी होगी जांच
मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ खेत, कथित फैक्टरी और नर्सरी से जुड़े लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि परिसर का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था और वहां आने-जाने वाले लोगों तथा वाहनों की गतिविधियां क्या थीं।
जांच एजेंसियां तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर स्थानीय संपर्कों से लेकर मुंबई और गुजरात तक संभावित नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही हैं। यदि प्रारंभिक जांच में सामने आए संकेतों की पुष्टि होती है तो मांडा से बरामद ₹139 करोड़ की एमडी की कार्रवाई से अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
