चेन्नई। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के छह मामलों की जांच करते हुए पुलिस ने चार राज्यों में कार्रवाई कर 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन मामलों में कुल ₹24.54 करोड़ की वित्तीय धोखाधड़ी सामने आई है। कार्रवाई के दौरान आरोपियों से जुड़े बैंक खातों में ट्रांसफर की गई ₹44.17 लाख की रकम में से ₹42.72 लाख बरामद किए गए हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
मामले चेन्नई की केंद्रीय अपराध शाखा और उत्तरी क्षेत्र की साइबर अपराध पुलिस के पास दर्ज थे। जांच को आगे बढ़ाने के लिए चार विशेष टीमों का गठन किया गया था। इन टीमों ने तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली में अलग-अलग स्थानों पर डेरा डालकर संदिग्धों की गतिविधियों और वित्तीय लेनदेन की जानकारी जुटाई।
जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के बीच पैसों के लेनदेन और कथित साइबर ठगी से जुड़े संपर्कों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिले। इसके आधार पर तमिलनाडु और केरल से छह, महाराष्ट्र से दो और गुजरात से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार किए गए 10 लोगों में से छह के बैंक खातों में कुल ₹44.17 लाख की रकम ट्रांसफर हुई थी, जबकि बाकी चार लोगों पर कथित तौर पर बिचौलियों के रूप में काम करने का आरोप है।
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कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से आठ मोबाइल फोन, सिम कार्ड, मेमोरी कार्ड, दो बैंक पासबुक और एक चेकबुक बरामद की है। जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों और बैंकिंग दस्तावेजों की जांच के जरिये पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों ने साइबर ठगी की रकम को किस तरह अलग-अलग खातों में भेजा और आगे उसका इस्तेमाल या निकासी कैसे की गई।
गिरफ्तार आरोपियों में से आठ को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वहीं, दो अन्य आरोपियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी किया गया है। पुलिस ने कहा कि मामले में आगे की जांच जारी है और ठगी में सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल अन्य लोगों की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
जांच का दायरा चेन्नई तक सीमित नहीं है। अलग-अलग राज्यों में आरोपियों की मौजूदगी सामने आने से पुलिस को आशंका है कि साइबर ठगी के लिए कई स्तरों पर काम करने वाला नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। इसमें बैंक खातों की व्यवस्था करने वाले, रकम स्थानांतरित करने वाले और आरोपियों के बीच संपर्क स्थापित करने वाले लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
पुलिस अब जब्त मोबाइल फोन और मेमोरी कार्ड से डिजिटल जानकारी निकालने के साथ-साथ बैंक खातों और लेनदेन का विश्लेषण कर रही है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि ₹24.54 करोड़ की कथित ठगी से जुड़े मामलों में रकम किन खातों से होकर गुजरी और क्या गिरफ्तार आरोपियों के अन्य राज्यों में मौजूद लोगों से भी संपर्क थे।
जांच अधिकारियों के अनुसार साइबर वित्तीय अपराधों में आरोपी अक्सर अलग-अलग राज्यों में मौजूद सहयोगियों और बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे मामलों में रकम को कई खातों के बीच स्थानांतरित करने के बाद उसकी निकासी या दूसरे माध्यमों से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी वजह से जांच एजेंसियों के लिए डिजिटल संपर्क और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ना अहम होता है।
पुलिस ने लोगों से साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तत्काल शिकायत दर्ज कराने की अपील की है, ताकि संदिग्ध खातों में पहुंची रकम को समय रहते रोकने और बरामद करने की संभावना बढ़ सके। जांच एजेंसियां गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर छह मामलों में कथित ठगी की पूरी श्रृंखला और उससे जुड़े अन्य संदिग्धों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
