एलुरु। आंध्र प्रदेश के जंगारेड्डीगुडेम में बैंक ऑफ बड़ौदा से जुड़े करीब ₹10 करोड़ के गोल्ड लोन घोटाले में पुलिस ने तीन अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान बैंक के ऋण खातों, अभिलेखों, लॉकर प्रबंधन और कर्मचारियों के बयानों की पड़ताल में 176 खातों में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। पुलिस के अनुसार, ग्राहकों द्वारा ऋण के बदले गिरवी रखा गया असली सोना कथित तौर पर निकाल लिया गया और उसकी जगह नकली आभूषण रख दिए गए।
पुलिस के मुताबिक, मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पूर्व शाखा प्रबंधक कुमारापु भास्कर राव (35), संयुक्त प्रबंधक तन्नेरु अजय बाबू (40) और ऋण अधिकारी जंगला सैराज (33) के रूप में हुई है। तीनों पर गिरवी रखे सोने के प्रबंधन में कथित लापरवाही और मिलीभगत के जरिए वित्तीय अनियमितता में शामिल होने का आरोप है।
मामला 16 जून को दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने बैंक के भीतर ऋण स्वीकृति और सोने के रखरखाव से संबंधित रिकॉर्ड की विस्तृत जांच शुरू की। जांच में 176 गोल्ड लोन खातों में ऐसी विसंगतियां मिलीं, जिनसे गिरवी रखे आभूषणों के साथ कथित छेड़छाड़ का संकेत मिला। पुलिस के अनुसार, कुल करीब 6.449 किलो सोना गायब पाया गया, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹10 करोड़ है।
जांच में यह भी सामने आया कि ग्राहकों से गिरवी के रूप में प्राप्त सोने को कथित तौर पर बैंक के लॉकरों से निकालकर उसकी जगह नकली आभूषण रखे गए। इससे कई ऋण खातों में बैंक के पास मौजूद गिरवी संपत्ति और अभिलेखों में दर्ज विवरण के बीच अंतर सामने आया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि सोना कब और किस तरीके से बैंक से बाहर निकाला गया तथा इस प्रक्रिया में किस-किस स्तर पर लापरवाही या कथित मिलीभगत हुई।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
इस मामले में पुलिस ने इससे पहले सोने के मूल्यांकनकर्ता चालपका राजू (40) को 10 जुलाई को गिरफ्तार किया था। उसके कब्जे और उन स्थानों से, जहां कथित तौर पर आभूषण बेचे या गिरवी रखे गए थे, करीब ₹5.81 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई थी। इसमें 4.120 किलो आभूषण और ₹10 लाख नकद शामिल थे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मूल्यांकनकर्ता की गिरफ्तारी और उससे जुड़ी बरामदगी के बाद बैंक कर्मचारियों की भूमिका की जांच को आगे बढ़ाया गया। बैंक के खातों और लॉकर प्रबंधन से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल के साथ कर्मचारियों से पूछताछ की गई। इसी प्रक्रिया में तीन अधिकारियों की कथित भूमिका सामने आने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।
पुलिस अब घोटाले में गायब बचे हुए सोने की बरामदगी और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन का पता लगाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित तौर पर निकाला गया सोना किन लोगों के पास पहुंचा और उसे बेचने या गिरवी रखने से प्राप्त रकम का इस्तेमाल किस तरह किया गया।
गिरफ्तार तीनों अधिकारियों को पुलिस अदालत में पेश करेगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और मामले में अन्य संदिग्धों की भूमिका सामने आने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस ने बैंकिंग धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
