बरेली में किसानों से जमीन खरीदने के नाम पर करोड़ों की कथित ठगी के मामले में पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री पन्नालाल कश्यप को गिरफ्तार किया गया है।

Cairn India के ₹5,725 करोड़ Buyback पर फिर उठे सवाल, ₹5.25 करोड़ जुर्माने का केस SAT लौटा

Team The420
6 Min Read

नई दिल्ली। Cairn India के पुराने शेयर बायबैक मामले में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में हुए ₹5,725 करोड़ के शेयर बायबैक से जुड़े ₹5.25 करोड़ के जुर्माने के विवाद को Securities Appellate Tribunal (SAT) के पास वापस भेज दिया है। यह जुर्माना Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने कंपनी पर लगाया था। हालांकि, बाद में SAT ने नियामक के आदेश को रद्द कर दिया था। SEBI ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। अब शीर्ष अदालत ने मामले पर नए सिरे से विचार करने के लिए इसे फिर ट्रिब्यूनल को भेज दिया है।

यह पूरा मामला जनवरी 2014 में Cairn India की ओर से घोषित किए गए खुले बाजार शेयर बायबैक प्रस्ताव से जुड़ा है। कंपनी ने उस समय ₹5,725 करोड़ तक के शेयरों की पुनर्खरीद की योजना बनाई थी। बायबैक के लिए अधिकतम कीमत ₹335 प्रति शेयर तय की गई थी। कंपनी का उद्देश्य बाजार से अपने शेयर वापस खरीदना था, लेकिन प्रस्ताव की अवधि समाप्त होने तक वह अधिकतम प्रस्तावित शेयरों का केवल 21.48 प्रतिशत ही खरीद सकी।

FCRF Launches India-Focused BFSI Compliance Certification for Emerging Governance Professionals

यही कम खरीद नियामक के लिए प्रमुख सवाल बन गई। SEBI के संबंधित बायबैक नियमों के तहत यदि कंपनी प्रस्तावित अधिकतम संख्या के कम से कम 50 प्रतिशत शेयर वापस नहीं खरीद पाती है तो इस स्थिति की नियामकीय जांच हो सकती है। बाजार नियामक ने मामले की जांच के दौरान कंपनी की खरीद प्रक्रिया और बायबैक की घोषणा के प्रभाव का परीक्षण किया।

SEBI का आरोप था कि बाजार में पर्याप्त तरलता उपलब्ध होने के बावजूद Cairn India ने शेयर खरीदने के लिए पर्याप्त आदेश नहीं लगाए। नियामक के अनुसार, कंपनी ने जिस बड़े पैमाने पर बायबैक की घोषणा की थी, उसके मुकाबले वास्तविक खरीद काफी कम रही। इससे निवेशकों के बीच कंपनी की बायबैक योजना की क्षमता और उसके संभावित परिणाम को लेकर भ्रम पैदा हो सकता था। जांच पूरी होने के बाद SEBI ने 2021 में कंपनी पर ₹5.25 करोड़ का जुर्माना लगाया।

Cairn India ने नियामक के इस आदेश को SAT में चुनौती दी। कंपनी ने अपनी दलील में कहा कि बायबैक पूरा नहीं हो पाने के पीछे बाजार की परिस्थितियां जिम्मेदार थीं। उसके अनुसार, प्रस्ताव की अवधि के दौरान कंपनी के शेयर का बाजार भाव ज्यादातर समय ₹335 की निर्धारित अधिकतम बायबैक कीमत से ऊपर रहा। ऐसे में खुले बाजार से उस कीमत पर पर्याप्त शेयर खरीदना संभव नहीं था।

कंपनी का तर्क था कि केवल कम शेयर खरीद पाने के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उसने जानबूझकर बायबैक को पूरा नहीं किया या निवेशकों को गुमराह किया। SAT ने कंपनी की दलीलों पर विचार करते हुए SEBI की कार्रवाई को चुनौती के अनुरूप राहत दी और ₹5.25 करोड़ के जुर्माने को रद्द कर दिया।

इसके बाद SEBI ने SAT के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। शीर्ष अदालत में विवाद का मुख्य मुद्दा बायबैक के दौरान कंपनी की वास्तविक खरीद, बाजार में शेयर की कीमत और कंपनी की ओर से किए गए प्रयासों का मूल्यांकन रहा। साथ ही यह सवाल भी सामने आया कि क्या घोषित बायबैक लक्ष्य पूरा नहीं होने और कम खरीद होने की परिस्थितियों में कंपनी के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई उचित थी।

अब सुप्रीम कोर्ट ने मामले को SAT के पास वापस भेज दिया है। इसका मतलब है कि ₹5.25 करोड़ के जुर्माने पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। SAT को मामले के तथ्यों, कंपनी की दलीलों और SEBI के आरोपों पर दोबारा विचार करना होगा। ट्रिब्यूनल की नई सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि SEBI का जुर्माना बरकरार रहता है या कंपनी को फिर राहत मिलती है।

इस मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि Cairn India का बाद में Vedanta समूह में विलय हो गया और कंपनी अब Vedanta के कारोबार का हिस्सा है। इसलिए पुराने बायबैक से जुड़ा यह विवाद समूह के लिए भी नियामकीय महत्व रखता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश किसी अंतिम दोष या जुर्माने की पुष्टि नहीं करता, बल्कि मामले को SAT में नए सिरे से विचार के लिए भेजता है।

शेयर बायबैक को बाजार में निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण कॉरपोरेट फैसले के तौर पर देखा जाता है। कंपनी जब बड़ी मात्रा में अपने शेयर वापस खरीदने की घोषणा करती है तो निवेशक उसके आधार पर भविष्य की रणनीति और शेयर मूल्य को लेकर आकलन कर सकते हैं। ऐसे में घोषित योजना और वास्तविक खरीद के बीच बड़ा अंतर होने पर नियामक कंपनी की प्रक्रिया और निवेशकों को दी गई जानकारी की जांच कर सकता है।

अब इस पुराने मामले की अगली कड़ी SAT में तय होगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद विवाद एक बार फिर नियामकीय मंच पर लौट आया है और ₹5.25 करोड़ के जुर्माने को लेकर अंतिम स्थिति SAT की नई सुनवाई और आदेश पर निर्भर करेगी।

हमसे जुड़ें

Share This Article