मेरठ। गगोल स्थित पराग डेयरी में सरकारी अनुदान और वित्तीय लेनदेन में करीब ₹100 करोड़ के कथित भ्रष्टाचार के आरोपों ने प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ा दी है। डेयरी को आर्थिक नुकसान पहुंचाने, सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और दुग्ध उत्पादकों को कई महीनों से भुगतान नहीं मिलने की शिकायत पर दुग्ध आयुक्त ने विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। मामले में डेयरी की चेयरमैन रजनी देवी समेत पांच लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच 12 बिंदुओं पर की जाएगी।
दूध उत्पादक सहकारी समिति के प्रतिनिधि वेदप्रकाश ने 27 जुलाई को दुग्ध आयुक्त को शिकायत देकर पूरे मामले की जांच की मांग की थी। शिकायत में पराग दुग्ध संघ की चेयरमैन रजनी देवी, महाप्रबंधक अविनाश सत्यार्थी, क्षेत्रीय दुग्धशाला विकास अधिकारी नत्थू सिंह, चेयरमैन के ससुर बलराज और देवर प्रदीप को नामजद किया गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि डेयरी के संचालन और सरकारी धन के इस्तेमाल में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं की गईं।
शिकायत में आरोप है कि गगोल डेयरी से बागपत, दिल्ली और हापुड़ के लिए दूध की कथित फर्जी आपूर्ति दिखाई गई। इसके आधार पर परिवहन और किराए के नाम पर सरकारी धन का भुगतान किए जाने का आरोप लगाया गया है। जांच में अब यह देखा जाएगा कि संबंधित आपूर्ति वास्तव में हुई थी या अभिलेखों में केवल कागजी लेनदेन दर्ज किया गया।
इसके अलावा डेयरी में बायोमास की आपूर्ति और उसके प्रबंधन में भी कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि ठेकेदार से कथित तौर पर कमीशन की रकम ली गई और उसे एक रिश्तेदार के बैंक खाते में स्थानांतरित कराया गया। जांच अधिकारी अब संबंधित ठेके, भुगतान रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और आपूर्ति से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल करेंगे।
जांच के दायरे में कथित फर्जी वाहनों के नाम पर भुगतान निकालने का मामला भी शामिल है। आरोप है कि कुछ ऐसी गाड़ियों के नाम पर रकम निकाली गई, जिनकी वास्तविक भूमिका या आवाजाही संदिग्ध थी। इसके साथ ही बंद पड़ी दुग्ध समितियों के नाम पर कथित फर्जी अभिलेख तैयार कर दूध की आपूर्ति दर्शाने और नकली दूध खरीद या आपूर्ति के जरिए भुगतान हासिल करने के आरोप भी शिकायत में लगाए गए हैं।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
डेयरी के कर्मचारियों से जुड़े भुगतान भी जांच के दायरे में हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों ने कथित तौर पर ड्यूटी किए बिना वेतन प्राप्त किया। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित कर्मचारियों की उपस्थिति, वेतन भुगतान और तैनाती के रिकॉर्ड वास्तविक हैं या नहीं। इसके साथ ही किसानों और दुग्ध उत्पादकों के कल्याण के लिए मिले करीब ₹100 करोड़ के सरकारी अनुदान के इस्तेमाल की भी विस्तृत जांच होगी।
दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के. ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पीसीडीएफ लखनऊ के प्रबंध निदेशक को सभी 12 शिकायत बिंदुओं पर प्रारंभिक जांच कराने के निर्देश दिए हैं। आदेश में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है।
निर्देशों के अनुसार, उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम-1965 की धारा 65 और 68 के तहत जिम्मेदार लोगों से हुई आर्थिक क्षति की भरपाई की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। यानी जांच में यदि सरकारी या संस्थागत धन के नुकसान की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से रकम की वसूली का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
क्षेत्रीय दुग्धशाला विकास अधिकारी नत्थू सिंह ने बताया कि वेदप्रकाश ने मुख्यमंत्री के समक्ष भी शिकायत की थी। इसके बाद प्रबंध निदेशक स्तर से गठित उच्चस्तरीय समिति पहले ही मामले की जांच कर चुकी है। हालांकि, उन्होंने कहा कि उस जांच के निष्कर्षों की जानकारी उन्हें नहीं है। वहीं, महाप्रबंधक अविनाश सत्यार्थी का पक्ष इस मामले में उपलब्ध नहीं हो सका।
अब नई जांच में दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन, दूध आपूर्ति और अनुदान के इस्तेमाल की पड़ताल के आधार पर आरोपों की वास्तविकता तय की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित वित्तीय अनियमितताओं में किसकी कितनी भूमिका रही और संस्थान को हुई क्षति के लिए कौन जिम्मेदार है।
