दस्तावेज सत्यापन में विसंगति मिलने के बाद तीनों को नोटिस जारी किया गया था; पासपोर्ट जांच में अफगानिस्तान के नागरिक होने की पुष्टि, मतदाता सूची से नाम हटाए गए, मददगारों की तलाश शुरू

जमशेदपुर की वोटर लिस्ट में निकले 3 अफगानी नागरिक, पासपोर्ट जांच से खुली पोल; अब एफआईआर की तैयारी

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By Roopa
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रांची। झारखंड में चल रहे मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र की प्रारूप मतदाता सूची में तीन अफगानिस्तानी नागरिकों के नाम सामने आने से निर्वाचन व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच के दौरान दस्तावेजों में विसंगति मिलने के बाद तीनों को नोटिस जारी किया गया था। जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर उनके पासपोर्ट की जांच कराई गई, जिसमें उनके अफगानिस्तान के नागरिक होने की पुष्टि हुई। निर्वाचन विभाग ने तीनों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए हैं और अब मामले में कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

यह मामला जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र संख्या 286 से जुड़ा है। प्रारूप मतदाता सूची में आसिल खान का नाम क्रम संख्या 30, मो. असलम का नाम क्रम संख्या 31 और मो. इब्राहिम का नाम क्रम संख्या 33 पर दर्ज पाया गया। निर्वाचन विभाग की ओर से चल रही जांच के दौरान इनके दस्तावेजों का मिलान किया गया तो कुछ जानकारियों में विसंगति सामने आई। इसके बाद तीनों को संदिग्ध मामलों वाली सूची में शामिल कर नोटिस जारी किया गया।

दस्तावेज पेश नहीं कर सके तीनों

प्रशासन की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद तीनों से उनकी नागरिकता और मतदाता सूची में शामिल होने की पात्रता से जुड़े आवश्यक दस्तावेज मांगे गए। हालांकि, वे मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सके। इसके बाद निर्वाचन अधिकारियों ने मामले की आगे जांच शुरू की और उपलब्ध पहचान संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन कराया।

जांच के दौरान उनके पासपोर्ट की जानकारी का सत्यापन किया गया। इसमें सामने आया कि तीनों भारतीय नागरिक नहीं हैं और उनके पास अफगानिस्तान के पासपोर्ट हैं। इसके बाद निर्वाचन विभाग ने उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए।

पहले से मतदाता सूची में दर्ज थे नाम

मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि तीनों के नाम केवल मौजूदा प्रारूप मतदाता सूची में ही सामने नहीं आए, बल्कि वे पहले से मतदाता सूची में दर्ज थे। तीनों ने एसआईआर के तहत गणना प्रक्रिया भी पूरी की थी और इसके बाद उनके नाम नए प्रारूप में भी प्रकाशित हो गए।

अब निर्वाचन विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि इन तीनों के नाम पहली बार मतदाता सूची में कब दर्ज हुए। इसके लिए पुराने मतदाता रिकॉर्ड, आवेदन से जुड़े दस्तावेज और पहचान पत्र तैयार कराने की प्रक्रिया की जांच की जा रही है। अधिकारियों का ध्यान इस बात पर भी है कि नागरिकता के सत्यापन के दौरान पहले इन मामलों की पहचान क्यों नहीं हो सकी।

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किसने बनवाया मतदाता पहचान पत्र, होगी जांच

निर्वाचन विभाग अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि तीनों विदेशी नागरिकों को भारतीय मतदाता पहचान पत्र हासिल करने में किसने मदद की। जांच में यह भी देखा जाएगा कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था और क्या किसी स्तर पर जानबूझकर गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेज दिए गए।

मामले में जमशेदपुर के उपायुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को आवश्यक कानूनी कार्रवाई के लिए निर्देश दिए जा रहे हैं। पुलिस जांच के दौरान यह भी पता लगाने की कोशिश होगी कि तीनों ने स्वयं गलत जानकारी दी थी या उन्हें किसी अन्य व्यक्ति अथवा समूह ने मतदाता सूची में शामिल कराने में सहायता की।

राज्य के दूसरे हिस्सों पर भी नजर

जमशेदपुर में तीन विदेशी नागरिकों के नाम सामने आने के बाद निर्वाचन विभाग अब इस संभावना की भी जांच कर रहा है कि कहीं राज्य के अन्य हिस्सों में भी विदेशी नागरिक मतदाता सूची में शामिल तो नहीं हैं। एसआईआर के दौरान सामने आए संदिग्ध मामलों और नागरिकता से संबंधित दस्तावेजों की जांच को इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, यदि जांच में दूसरे स्थानों पर भी ऐसे मामले सामने आते हैं तो संबंधित नामों को नियमानुसार मतदाता सूची से हटाया जाएगा और पात्रता संबंधी नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इससे यह भी पता लगाने में मदद मिलेगी कि जमशेदपुर का मामला अलग-अलग स्तर पर हुई चूक का परिणाम है या इसके पीछे किसी संगठित तरीके से विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने की कोशिश थी।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने बताया कि तीन विदेशी नागरिकों की पहचान की गई है और उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। मामले की जांच और आगे की कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन तथा पुलिस को लिखा जा रहा है। अब जांच का मुख्य फोकस उन परिस्थितियों का पता लगाने पर है, जिनके कारण तीनों के नाम भारतीय मतदाता सूची में दर्ज हुए और उन्हें मतदाता पहचान पत्र हासिल करने में किसने मदद की।

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