रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) की विशेष जांच टीम ने 250 से अधिक अभ्यर्थियों से पूछताछ पूरी कर ली है। जांच में अब तक 100 से अधिक सफल अभ्यर्थियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने की बात सामने आई है। सीआईडी इन अभ्यर्थियों से जुड़ी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपने की तैयारी में है। शनिवार को भी करीब दो दर्जन सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ की गई।
सीआईडी की एसआईटी परीक्षा में कथित गड़बड़ी के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि किन अभ्यर्थियों ने अनुचित साधनों का इस्तेमाल कर परीक्षा में सफलता हासिल की और उनके पीछे किस तरह का नेटवर्क काम कर रहा था। जिन अभ्यर्थियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, उनके बारे में अलग से सरकार को जानकारी देने की तैयारी की जा रही है।
सीजीएल परीक्षा में कथित अनियमितता की जांच दोबारा शुरू होने के बाद मामले में कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़ी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के मामले में सबसे पहले अभय तिवारी को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उसके भाई अक्षय तिवारी, अभय की पत्नी सुषमा तिवारी, सफल अभ्यर्थी और कथित एजेंट समीर कुमार, उमेश कुमार राय, विजय कुमार तिवारी, दीपक कुमार और आनंद कुमार सिंह को भी गिरफ्तार किया गया। सीआईडी ने इन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही सरकार को इसकी जानकारी दे दी थी।
अब जांच का फोकस उन सफल अभ्यर्थियों पर है, जिनकी भूमिका पूछताछ और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर संदिग्ध सामने आई है। सीआईडी यह भी पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा में कथित अनुचित साधनों का इस्तेमाल किस स्तर पर हुआ और इसमें अभ्यर्थियों के अलावा एजेंट या अन्य बिचौलियों की क्या भूमिका थी।
जेएसएससी कार्यालय में लगातार तीसरे दिन जांच
सीआईडी की एसआईटी ने शनिवार को लगातार तीसरे दिन जेएसएससी कार्यालय पहुंचकर परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। टीम गुरुवार से आयोग के कार्यालय में रिकॉर्ड खंगाल रही है। शनिवार को सचिव सुधीर कुमार गुप्ता की मौजूदगी में सीजीएल परीक्षा और उससे जुड़ी एजेंसियों के दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। जांच टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त भी किए हैं।
बीते तीन दिनों के दौरान सीआईडी अधिकारियों ने परीक्षा आयोजन, संबंधित एजेंसियों और अभ्यर्थियों से जुड़े कई रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए हैं। इन दस्तावेजों का मिलान पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों से किया जा रहा है। जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि परीक्षा प्रक्रिया के किस चरण में नियमों का उल्लंघन हुआ और संबंधित जिम्मेदार लोगों की भूमिका क्या रही।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
28 सफल अभ्यर्थी पहले ही डिबार
सीआईडी की पूर्व जांच के आधार पर 28 सफल अभ्यर्थियों को पहले ही परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया से डिबार किया जा चुका है। बताया गया था कि ये अभ्यर्थी नेपाल के वीरगंज गए थे। हालांकि अन्य सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी कर दिए गए थे। अब जिन अभ्यर्थियों की गतिविधियां या परीक्षा परिणाम जांच के दौरान संदिग्ध पाए गए हैं, उनके बारे में सरकार को अलग रिपोर्ट भेजी जाएगी।
दो आरोपियों को न्यायिक हिरासत
सीआईडी ने आईसीएन कंपनी से जुड़े सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार को आठ दिन की रिमांड पूरी होने के बाद शनिवार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। दोनों को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा भेजा गया है। पूछताछ के दौरान दोनों ने कथित तौर पर मिथिलेश सिंह की प्रमुख भूमिका की जानकारी एसआईटी को दी है। जांच एजेंसी अब मिथिलेश सिंह की गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है। उसकी गिरफ्तारी के बाद परीक्षा में कथित गड़बड़ी से जुड़े नेटवर्क के बारे में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
जेपीएससी मामले में पूर्व अध्यक्ष को राहत नहीं
इसी बीच, झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षा में कथित अनियमितता के मामले में जेल में बंद पूर्व मुख्य सचिव और जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते को अदालत से राहत नहीं मिली। अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत ने शनिवार को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
सीआईडी ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत में अभय तिवारी के कथित स्वीकारोक्ति बयान का हवाला दिया। जांच एजेंसी के अनुसार, तिवारी ने अपने बयान में जेपीएससी परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ी में ख्यांगते की भूमिका का उल्लेख किया है। सीआईडी का आरोप है कि परीक्षा आयोजन का जिम्मा टीडीपीएल को देने में ख्यांगते की अहम भूमिका थी और उन्हें संबंधित परीक्षाओं में पारदर्शिता नहीं बरते जाने की जानकारी थी, इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।
वहीं, ख्यांगते की ओर से अदालत में कहा गया कि उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं हैं और उनके परिसरों पर हुई छापेमारी में भी ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला, जिससे कथित संलिप्तता साबित हो। जेपीएससी परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान सीआईडी अब सॉल्वर गिरोह से जुड़े सदस्यों की भूमिका भी खंगाल रही है।
