कानपुर में कर्ज के लिए ₹4.5 करोड़ की जमीन गिरवी रखकर हासिल की गई रकम कथित तौर पर निजी और पारिवारिक कंपनियों के खातों में ट्रांसफर; मुख्य आरोपी प्रशांत द्विवेदी पर गैर-जमानती वारंट के बाद कार्रवाई

₹7 करोड़ के बैंक फ्रॉड का मुख्य आरोपी गिरफ्तार, फर्जी चालान से रकम रिश्तेदारों की कंपनियों में भेजने का आरोप

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By Roopa
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कानपुर। करीब ₹7 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी के मामले में कल्याणपुर पुलिस ने मुख्य आरोपी प्रशांत द्विवेदी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसे तीन सितंबर की रात दलहन क्रॉसिंग के पास से पकड़ा। आरोपी के खिलाफ न्यायालय से गैर-जमानती वारंट जारी था। पुलिस के मुताबिक, मामले में बैंक से कारोबारी गतिविधियों के लिए लिया गया कर्ज कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और चालानों के जरिए दूसरी कंपनियों और निजी खातों में स्थानांतरित किया गया।

मामले की रिपोर्ट आवास विकास नंबर-एक निवासी अजय सिंह चौहान ने 19 मई को दर्ज कराई थी। शिकायत में प्रशांत द्विवेदी के अलावा राजीव त्रिपाठी, रवि त्रिपाठी और वंदना त्रिपाठी के खिलाफ साजिश और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के आधार पर रकम के पूरे लेन-देन और अन्य आरोपियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

एसबीआई से लिया गया ₹7 करोड़ का कर्ज

शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने कथित साजिश के तहत ‘राजवंदनम इंटरनेशनल एलएलपी’ के नाम पर भारतीय स्टेट बैंक की बिरहाना रोड शाखा से करीब ₹7 करोड़ का कर्ज लिया। इस कर्ज के लिए गारंटी के तौर पर अजय सिंह चौहान की निजी कंपनी की मिर्जापुर, कल्याणपुर स्थित जमीन को गिरवी रखा गया था।

पुलिस के मुताबिक, गिरवी रखी गई जमीन की अनुमानित कीमत करीब ₹4.5 करोड़ थी। आरोप है कि कर्ज की रकम मिलने के बाद आरोपियों ने बैंक से प्राप्त धन का इस्तेमाल उस कारोबारी उद्देश्य के लिए नहीं किया, जिसके नाम पर वित्तीय सुविधा ली गई थी।

फर्जी चालानों के जरिए रकम दूसरी कंपनियों में भेजने का आरोप

जांच में सामने आया कि कर्ज की रकम हासिल करने के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी प्रारूप चालान तैयार किए। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कारोबारी लेन-देन दिखाने के लिए किया गया और इसके बाद बैंक से प्राप्त रकम को आरोपियों तथा उनके रिश्तेदारों से जुड़ी कंपनियों के खातों में स्थानांतरित किए जाने का आरोप है।

पुलिस अब उन कंपनियों के बैंक खातों की जांच कर रही है, जिनमें कर्ज की रकम भेजी गई। जांच का मुख्य बिंदु यह पता लगाना है कि ₹7 करोड़ की राशि में से कितनी रकम किन खातों में पहुंची और बाद में उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया। निजी बैंक खातों में हुए कथित हस्तांतरण की भी जांच की जा रही है।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

प्रशांत के निजी खातों में भी रकम पहुंचने का आरोप

शिकायतकर्ता का आरोप है कि धोखाधड़ी की रकम का एक हिस्सा मुख्य आरोपी प्रशांत द्विवेदी के निजी बैंक खातों में भी स्थानांतरित किया गया। जब अजय सिंह चौहान ने अपनी रकम वापस करने की मांग की तो कथित तौर पर उनके साथ गाली-गलौज की गई और जान से मारने की धमकी दी गई।

पुलिस इन आरोपों की भी जांच कर रही है। इसके लिए शिकायतकर्ता के बयान, बैंक लेन-देन, कर्ज से जुड़े दस्तावेज, कथित फर्जी चालान और आरोपियों के बीच हुए संपर्कों की पड़ताल की जा रही है। जांचकर्ताओं का मानना है कि वित्तीय रिकॉर्ड से कथित साजिश और रकम की आवाजाही की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।

दुबई में होने की आशंका, अन्य आरोपियों की तलाश

मामले में नामजद राजीव त्रिपाठी, रवि त्रिपाठी और वंदना त्रिपाठी की भूमिका की भी जांच जारी है। पुलिस के अनुसार, राजीव त्रिपाठी और उसकी पत्नी के दुबई में होने की आशंका है। पुलिस उनके खिलाफ न्यायालय से आवश्यक वारंट और अन्य कानूनी प्रक्रिया पूरी कराने की तैयारी कर रही है, ताकि उन्हें भारत लाकर पूछताछ की जा सके।

पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कर्ज की रकम को अलग-अलग खातों में भेजने की योजना किस स्तर पर बनाई गई थी और इसमें कितने लोगों या कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। बैंक खातों के साथ-साथ कंपनियों के कारोबारी दस्तावेजों की जांच भी की जा रही है।

बैंक कर्ज से जुड़े दस्तावेजों की भी होगी जांच

जांच में अब बैंक से कर्ज लेने की पूरी प्रक्रिया पर भी ध्यान दिया जा रहा है। पुलिस यह पता लगाएगी कि कर्ज के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जमा किए गए थे, जमीन को गिरवी रखने की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई और कर्ज की रकम जारी होने के बाद उसका वास्तविक इस्तेमाल किस तरह हुआ।

मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को कथित बैंक धोखाधड़ी के वित्तीय नेटवर्क और अन्य आरोपियों तक पहुंचने में अहम सुराग मिलने की उम्मीद है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। पुलिस फिलहाल दस्तावेजी साक्ष्यों और बैंक लेन-देन के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

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