नई दिल्ली। तमिलनाडु के सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) ने शनिवार को द्रमुक नेता और पूर्व मंत्री केएन नेहरू के तिरुचिरापल्ली स्थित आवास समेत उनसे जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी ली। यह कार्रवाई नगर प्रशासन एवं जलापूर्ति विभाग (MAWS) में उनके मंत्री कार्यकाल के दौरान कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से जुड़े मामले में की गई।
तलाशी तिरुचिरापल्ली के थिल्लई नगर इलाके में स्थित नेहरू के आवास और अन्य संबंधित परिसरों में की गई। कार्रवाई के दौरान द्रमुक कार्यकर्ता उनके आवास के बाहर जुट गए। पूर्व मंत्री अनबिल महेश पोय्यामोझी भी नेहरू के घर पहुंचे। तलाशी की कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रही।
भर्ती से लेकर ठेकों और तबादलों तक आरोप
मामला नेहरू के उस कार्यकाल से जुड़ा है, जब वह नगर प्रशासन एवं जलापूर्ति विभाग के प्रभारी मंत्री थे। उनके कार्यकाल के दौरान सरकारी भर्ती, ठेकों के आवंटन तथा अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।
मद्रास हाईकोर्ट के निर्देश के बाद DVAC ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी। प्राथमिकी में नेहरू के अलावा उनके रिश्तेदारों और कई अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी आरोपों से जुड़े दस्तावेजों और लेनदेन की कड़ियों की पड़ताल कर रही है।
सबसे गंभीर आरोप सरकारी नौकरियों के बदले कथित तौर पर पैसे वसूलने से जुड़ा है। जांच में करीब ₹888 करोड़ के कथित कैश-फॉर-जॉब घोटाले का आरोप सामने आया है। आरोप है कि सरकारी पदों पर नियुक्ति दिलाने के नाम पर उम्मीदवारों से रकम एकत्र की गई। इसके अलावा विभाग से जुड़े करीब ₹1,020 करोड़ के ठेकों में भी कथित अनियमितताओं के आरोप हैं।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
तबादलों और पदस्थापना में भी कथित गड़बड़ी
मामले में अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों तथा पदस्थापना को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि विभाग में स्थानांतरण और तैनाती की प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन किया गया और कथित तौर पर प्रभाव का इस्तेमाल किया गया।
DVAC इन आरोपों के अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही है। तलाशी के दौरान अधिकारियों द्वारा संबंधित दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य सामग्री की जांच किए जाने की संभावना है। हालांकि, तलाशी से बरामद किसी विशिष्ट सामग्री का तत्काल विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है।
ED ने पहले साझा की थी अनियमितताओं की जानकारी
मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भूमिका भी सामने आई है। ED ने पहले कथित अनियमितताओं से संबंधित जानकारी तमिलनाडु के अधिकारियों के साथ साझा की थी। इसके बाद नगर प्रशासन एवं जलापूर्ति विभाग से जुड़े आरोपों को लेकर जांच तेज हुई।
हालांकि, मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के दौरान मद्रास हाईकोर्ट ने सतर्कता एजेंसी की आगे की कार्रवाई और आरोपियों के खिलाफ चल रही कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इस वजह से मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई अलग-अलग चरणों से गुजरती रही है।
अब DVAC की ताजा तलाशी को जांच में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित तौर पर सरकारी नौकरियों के नाम पर धन की वसूली कैसे की गई और इस रकम का इस्तेमाल या हस्तांतरण किन लोगों के माध्यम से हुआ।
जांच के साथ बढ़ेगी राजनीतिक हलचल
पूर्व मंत्री के आवास पर कार्रवाई के बाद तमिलनाडु की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है। नेहरू द्रमुक के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और उनके खिलाफ जांच का राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है। हालांकि, तलाशी अपने आप में आरोपों को साबित नहीं करती और मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
DVAC मामले से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच आगे बढ़ने के साथ कथित भर्ती घोटाले, ठेका आवंटन और तबादलों से जुड़े आरोपों में अन्य लोगों की भूमिका भी स्पष्ट हो सकती है। मामले की कानूनी कार्यवाही जारी है।
