डुप्लीकेट SIM और 13 अनधिकृत RTGS लेनदेन से जुड़े 2015 के साइबर ठगी मामले में बैंक और टेलीकॉम कंपनी की जवाबदेही तय की गई है।

बैंक ऑफ इंडिया में ₹45.20 लाख की नकदी गायब, कैशियर निलंबित; शाखा प्रबंधक हटाए गए

Roopa
By Roopa
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धार। मध्य प्रदेश के धार जिले के बाग में बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में ₹45.20 लाख की नकदी के कथित गबन के मामले में बैंक ने विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है। बैंक ने हेड कैशियर हितेश निंगवाल को निलंबित कर दिया है, जबकि शाखा प्रबंधक मयूर दुबे को शाखा से हटा दिया गया है। सहायक प्रबंधक राहुल पंजवानी को भी निलंबन का नोटिस जारी कर इंदौर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में बुलाया गया है। इस बीच विपिन बाग ने नए शाखा प्रबंधक के रूप में कार्यभार संभाल लिया है।

मामला शाखा में नकदी की नियमित जांच के दौरान सामने आया। बैंक अधिकारियों द्वारा कैश का मिलान किए जाने पर रिकॉर्ड में दर्ज राशि की तुलना में ₹45.20 लाख कम पाए गए। नकदी में इतनी बड़ी कमी सामने आने के बाद बैंक स्तर पर जांच शुरू की गई। इसी दौरान हेड कैशियर हितेश निंगवाल पर संदेह गहराया। आरोप है कि वह बैंक के कैश की चाबी लेकर शाखा से फरार हो गया था।

मामले की जानकारी मिलने के बाद बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय से अधिकारियों ने शाखा पहुंचकर रिकॉर्ड और नकदी से संबंधित दस्तावेजों की जांच की। प्राथमिक जांच में नकदी की कमी की पुष्टि होने के बाद बैंक प्रबंधन ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का निर्णय लिया। मंगलवार शाम शाखा प्रबंधक की ओर से बाग थाने में मामले की एफआईआर दर्ज कराई गई।

पुलिस ने हेड कैशियर हितेश निंगवाल को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया गया। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बैंक की नकदी किस अवधि में और किस तरीके से निकाली गई तथा पूरी रकम का इस्तेमाल कहां किया गया।

वाहनों की किस्त और बाजार का कर्ज चुकाने का दावा

पूछताछ के दौरान कैशियर ने कथित तौर पर बैंक की नकदी से रकम निकालने की बात स्वीकार की है। पुलिस के अनुसार, उसके पास तीन बोलेरो वाहन थे और वह उनकी मासिक किस्त चुकाने के लिए बैंक के कैश से थोड़ी-थोड़ी रकम निकालता था। जांच में यह भी सामने आया कि उसने बाजार के लोगों से लिया गया उधार चुकाने के लिए भी बैंक की नकदी का इस्तेमाल करने की बात कही है।

पुलिस अब उसके बैंक खातों, संपत्तियों, वाहनों और अन्य वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर सकती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बैंक से कथित तौर पर निकाली गई राशि कहां खर्च हुई। इसके साथ ही बैंक के नकदी रिकॉर्ड और संबंधित अवधि के लेनदेन का मिलान किया जा रहा है।

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जांच प्रभावित न हो, इसलिए शाखा प्रबंधक हटाए गए

बैंक ने मामले की आंतरिक जांच को देखते हुए शाखा प्रबंधक मयूर दुबे को बाग शाखा से हटा दिया है। दुबे के अनुसार, जांच की प्रक्रिया प्रभावित न हो, इसलिए उन्हें शाखा की जिम्मेदारी से अलग किया गया है।

सहायक प्रबंधक राहुल पंजवानी को भी निलंबन का नोटिस दिया गया है और उन्हें इंदौर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। बैंक स्तर पर यह जांच की जा रही है कि शाखा में इतनी बड़ी नकदी की कमी कैसे हुई और निगरानी व्यवस्था में कहां चूक हुई।

नए प्रबंधक ने संभाला कार्यभार

बैंक ऑफ इंडिया ने बाग शाखा की जिम्मेदारी अब विपिन बाग को सौंपी है। उन्होंने नए शाखा प्रबंधक के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। शाखा में नकदी की कमी सामने आने और कैशियर के खिलाफ पुलिस मामला दर्ज होने के बाद बैंक की ओर से विभागीय जांच और प्रशासनिक कार्रवाई जारी है।

पुलिस की जांच में अब कथित गबन की पूरी अवधि, नकदी निकासी के तरीके और रकम के इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं को खंगाला जा रहा है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि मामले में किसी अन्य कर्मचारी की भूमिका या लापरवाही तो नहीं रही। बैंक की आंतरिक जांच और पुलिस जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होने की संभावना है।

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