मुंबई। महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) की ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले की जांच में पुलिस को एक महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिला है। नाले से बरामद लैपटॉप अब पूरे मामले की जांच की अहम कड़ी बन गया है। पुलिस के अनुसार, इसी लैपटॉप में परीक्षा से जुड़े 294 प्रश्न और उनके विकल्प मौजूद थे। जांच एजेंसियां अब क्षतिग्रस्त लैपटॉप से डेटा सुरक्षित तरीके से निकालने की कोशिश कर रही हैं। यदि इसमें मौजूद जानकारी सफलतापूर्वक पुनर्प्राप्त हो जाती है, तो पेपर लीक की कथित साजिश, प्रश्नों के स्रोत और आरोपियों के बीच संपर्क से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग सामने आ सकते हैं।
मामले की मुख्य आरोपी ऋतुजा पाटिल को नंदूरबार से गिरफ्तार करने के बाद पुलिस उसे मुंबई लेकर आई थी। बुधवार को उसे छह अन्य गिरफ्तार आरोपियों के साथ अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान पुलिस ने अदालत को लैपटॉप की बरामदगी और उससे जुड़े घटनाक्रम की जानकारी दी। पुलिस का दावा है कि एमपीएससी अधिकारी विश्वेश्वर नकाते ने कथित तौर पर सबूत नष्ट करने के इरादे से लैपटॉप को नाले में फेंक दिया था।
नाले में फेंका गया था अहम डिजिटल साक्ष्य
पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान अधिकारी द्वारा लैपटॉप को नाले में फेंके जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने तलाशी अभियान चलाकर लैपटॉप बरामद कर लिया। लंबे समय तक पानी और गंदगी में पड़े रहने के कारण उपकरण के क्षतिग्रस्त होने की आशंका है। इसके बावजूद जांच दल इसमें मौजूद डिजिटल सामग्री को बचाने की कोशिश कर रहा है।
जांचकर्ताओं के लिए लैपटॉप की अहमियत इसलिए बढ़ गई है क्योंकि पुलिस के अनुसार इसमें ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के 294 प्रश्न और उनके विकल्प मौजूद थे। इन प्रश्नों से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि परीक्षा की गोपनीय सामग्री कथित तौर पर किस स्तर से बाहर निकली और किन लोगों तक पहुंची।
डेटा रिकवरी से खुल सकते हैं कई राज
अब जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा लैपटॉप से डेटा पुनर्प्राप्त करना है। डिजिटल विशेषज्ञ इसकी मेमोरी और अन्य उपलब्ध हिस्सों की जांच कर रहे हैं। प्रयास किया जा रहा है कि उपकरण में मौजूद फाइलों, दस्तावेजों, संपर्क संबंधी जानकारी और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित तरीके से निकाला जा सके।
यदि डेटा का बड़ा हिस्सा बरामद हो जाता है, तो पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि परीक्षा के प्रश्नों को किसने तैयार किया, किस डिवाइस पर रखा गया और उन्हें आगे किन लोगों के साथ साझा किया गया। इससे कथित पेपर लीक नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने में भी मदद मिल सकती है।
जांचकर्ता यह भी देख सकते हैं कि लैपटॉप में मौजूद सामग्री किसी मोबाइल फोन, कंप्यूटर या अन्य डिजिटल माध्यम से साझा की गई थी या नहीं। इससे आरोपियों के बीच कथित संपर्क और सूचना के प्रसार की कड़ियों को जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पैसों के लेन-देन की कड़ी भी तलाशेगी पुलिस
पेपर लीक के मामलों में गोपनीय प्रश्नपत्र या उसके हिस्से उपलब्ध कराने के बदले पैसों के कथित लेन-देन की भी जांच की जाती है। पुलिस के मुताबिक, लैपटॉप में मौजूद डिजिटल जानकारी से आरोपियों के बीच हुए संभावित वित्तीय लेन-देन से जुड़े सुराग भी मिल सकते हैं।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि परीक्षा की सामग्री के बदले किसी तरह का भुगतान हुआ था या नहीं और यदि हुआ तो रकम किन माध्यमों से भेजी गई। हालांकि, किसी भी वित्तीय लेन-देन और उसकी भूमिका की पुष्टि जांच पूरी होने तथा संबंधित साक्ष्यों के सत्यापन के बाद ही हो सकेगी।
सात आरोपियों से पूछताछ जारी
मुख्य आरोपी ऋतुजा पाटिल समेत सात गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश किए जाने के बाद पुलिस उनकी कथित भूमिकाओं की जांच कर रही है। पूछताछ में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि परीक्षा से संबंधित संवेदनशील जानकारी आरोपियों तक कैसे पहुंची और उसे आगे किस तरीके से प्रसारित किया गया।
नाले से बरामद लैपटॉप अब इस जांच में एक महत्वपूर्ण डिजिटल कड़ी के रूप में सामने आया है। यदि उसका डेटा सफलतापूर्वक पुनर्प्राप्त होता है, तो पुलिस को पेपर लीक की कथित साजिश की कड़ियां जोड़ने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है। 294 प्रश्नों का स्रोत, उन्हें साझा करने वाले लोगों की पहचान, आरोपियों के बीच संपर्क और संभावित आर्थिक लेन-देन की जानकारी सामने आने से मामले की जांच को नई दिशा मिल सकती है।
फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के साथ डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। लैपटॉप से मिलने वाली जानकारी यह समझने में अहम हो सकती है कि एमपीएससी ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा की गोपनीय सामग्री कथित तौर पर कितने लोगों तक पहुंची और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे।
