ED ने ड्रग तस्करी से अर्जित कथित काली कमाई की जांच में तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और केरल में 30 ठिकानों पर तलाशी ली।

गांजा से एमडीएमए तक, ड्रग नेटवर्क की काली कमाई पर ईडी का बड़ा वार; 30 ठिकानों पर तलाशी

Team The420
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नई दिल्ली। मादक पदार्थों की तस्करी से अर्जित कथित काली कमाई के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को दक्षिण भारत के चार राज्यों में एक साथ बड़ी कार्रवाई की। ईडी ने तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और केरल में कुल 30 ठिकानों पर तलाशी ली। कार्रवाई में हैदराबाद की कथित गांजा तस्करी सरगना नीतू बाई से लेकर कोझिकोड के शामनाद सीके समेत कई संदिग्धों से जुड़े परिसरों को शामिल किया गया। जांच धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की जा रही है।

ईडी के मुताबिक, इन मामलों में गांजा, मेथामफेटामाइन, हैश ऑयल और एमडीएमए जैसे मादक पदार्थों की कथित तस्करी से हासिल रकम का पता लगाया जा रहा है। एजेंसी यह जांच कर रही है कि अपराध से अर्जित धन को किन माध्यमों से दूसरे लोगों या संस्थाओं तक पहुंचाया गया और बाद में उसे बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन या संपत्तियों में कैसे लगाया गया। जांच के दायरे में हवाला नेटवर्क, संदिग्ध बैंक खाते, सोने के बदले लिए गए कर्ज और अचल संपत्तियों की खरीद शामिल है।

तमिलनाडु में मेथामफेटामाइन तस्करी के मामलों पर कार्रवाई

तमिलनाडु में ईडी चार अलग-अलग मामलों की जांच कर रही है। चेन्नई और रामनाथपुरम में दो-दो ठिकानों पर तलाशी सैयद निसारदीन और अन्य आरोपियों से जुड़े मामले में हुई। जून 2024 में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने दो श्रीलंकाई नागरिकों के कब्जे से 1.470 किलोग्राम मेथामफेटामाइन बरामद किया था। इसके अलावा चेन्नई के एक कथित हवाला केंद्र से ₹1.29 करोड़ से अधिक नकद, 30,000 अमेरिकी डॉलर और श्रीलंकाई मुद्रा बरामद हुई थी। आरोप है कि यह हवाला केंद्र निसारदीन की ओर से चलाया जा रहा था।

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एक अन्य मामले में सैयद इब्राहिम, बायसुल रहमान और अन्य आरोपी हैं। जुलाई 2024 में श्रीलंका भेजे जाने के लिए कथित तौर पर रखे गए 5.970 किलोग्राम मेथामफेटामाइन की बरामदगी के बाद यह मामला सामने आया था। रामनाथपुरम और तिरुनेलवेली में दो ठिकानों पर तलाशी ली गई। इस मामले में एनसीबी पहले ही ₹39 लाख से अधिक नकद, सोना और चांदी जब्त कर चुकी है।

कर्नाटक में ₹5.15 करोड़ के बैंक जमा की जांच

कर्नाटक के कोलार जिले में मृत्युंजय उर्फ जयन्ना और उसकी पत्नी भाग्यम्मा से जुड़े तीन परिसरों की तलाशी ली गई। ईडी के अनुसार, दोनों वर्ष 2007 से मादक पदार्थ संबंधी मामलों में कथित तौर पर सक्रिय रहे हैं। उनके बैंक खातों में कुल ₹5.15 करोड़ से अधिक की रकम जमा होने का पता चला है। इसमें करीब ₹2.40 करोड़ नकद जमा शामिल हैं।

जांच में दंपती से जुड़ी आठ अचल संपत्तियां भी सामने आई हैं, जिनकी कुल कीमत ₹99 लाख से अधिक बताई गई है। ईडी इन बैंक लेनदेन और संपत्तियों के स्रोत की जांच कर रही है।

तेलंगाना में ‘गांजा क्वीन’ के कथित नेटवर्क की पड़ताल

हैदराबाद में तीन ठिकानों पर तलाशी कथित गांजा तस्करी सरगना नीतू बाई से जुड़े मामले में हुई। वह साइबराबाद के मादक पदार्थ विरोधी विशेष अभियान दल द्वारा दर्ज कई प्राथमिकी में फरार बताई गई है। ईडी ने इन्हीं मामलों के आधार पर धनशोधन की जांच शुरू की है।

एजेंसी के अनुसार, नानकरामगुड़ा के लोढ़ा बस्ती स्थित नीतू बाई के आवास को कथित तौर पर परिवार के स्तर पर चलाए जा रहे गांजा बिक्री नेटवर्क के केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। उसके पति मुन्ना सिंह, बेटे गौतम और गोविंद तथा बेटी पर भी गांजा पैक करने और बेचने में कथित रूप से सहयोग करने का आरोप है। 10 जून 2026 को पुलिस ने उसके घर के बाहर से 49 लोगों को पकड़ा था, जो कथित तौर पर गांजा खरीदने पहुंचे थे।

ईडी की जांच में नीतू बाई के नाम पर तीन संपत्तियों का भी पता चला है। राजीव नगर, गांधी नगर और लक्ष्मी नगर में स्थित इन संपत्तियों को 2021 से 2023 के बीच कुल ₹86.78 लाख में खरीदा गया था। एजेंसी का कहना है कि नीतू बाई के पास एक छोटी किराना दुकान के अलावा ऐसा कोई घोषित आय स्रोत नहीं मिला, जो इन संपत्तियों की खरीद से मेल खाता हो।

केरल में बैंकॉक और मस्कट से जुड़े तस्करी मामलों की जांच

केरल में कोच्चि और आसपास के जिलों में चार स्थानों पर आयुष विनोद और कथित अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क से जुड़े मामले में तलाशी ली गई। आरोप है कि बैंकॉक से कोचीन अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के रास्ते हाइब्रिड गांजा भारत लाया जा रहा था।

इसके अलावा कोझिकोड में लिगीश, रफनास, शिहाबुद्दीन और शामनाद सीके से जुड़े आवासीय परिसरों की तलाशी हुई। यह मामला मस्कट से 949.26 ग्राम एमडीएमए की कथित तस्करी से जुड़ा है। संबंधित एजेंसी इस मामले में पहले ही आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।

अपराध की कमाई का पूरा रास्ता तलाशने पर जोर

ईडी ने कहा कि छापेमारी का मुख्य उद्देश्य मादक पदार्थों के कारोबार से अर्जित कथित अपराध की कमाई का पूरा वित्तीय रास्ता तलाशना है। एजेंसी बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड, संपत्तियों और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच कर रही है। तलाशी से मिले दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश होगी कि तस्करी से हासिल रकम किन लोगों और माध्यमों तक पहुंची और उसे वैध संपत्ति या वित्तीय लेनदेन का रूप देने के लिए किन तरीकों का इस्तेमाल किया गया।

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