सलेम। तमिलनाडु के सलेम में कथित बहुकरोड़ रुपये के निवेश घोटाले का मामला सामने आया है, जिसमें 3,000 से अधिक लोगों के ठगे जाने की आशंका है। शेयर बाजार से जुड़े निवेश के नाम पर असामान्य रूप से अधिक रिटर्न का वादा करने वाली कंपनी पर निवेशकों से रकम जुटाने और बाद में वादा किया गया रिटर्न तथा मूलधन वापस नहीं करने का आरोप है। आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने मामले में एक प्रमुख आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि दंपती समेत चार अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान मदुरै निवासी 45 वर्षीय शेनपगापांडियन के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, वह वर्ष 2014 में सलेम के अलगापुरम में शुरू की गई प्रोफिटेबल एवर ऑनलाइन ट्रेडर्स कंपनी का निदेशक था। विजयाराघवन कंपनी में प्रबंधक के तौर पर काम करता था।
जांच के अनुसार, कंपनी ने शेयर बाजार से जुड़े निवेश की योजना के नाम पर लोगों को अपने साथ जोड़ा। आरोप है कि निवेशकों को 51 प्रतिशत तक रिटर्न देने का वादा किया गया था। इसके अलावा निवेश की अवधि पूरी होने पर अतिरिक्त भुगतान का भरोसा भी दिलाया गया। कंपनी की ओर से अलग-अलग स्थानों पर बैठकें आयोजित कर लोगों को निवेश के लिए आकर्षित किया जाता था।
कंपनी की योजना के जरिए कई जिलों के लोगों से लगातार रकम जुटाई गई। बाद में निवेशकों ने शिकायत करनी शुरू की कि कंपनी ने वादा किया गया रिटर्न देना बंद कर दिया है। इसके साथ ही जमा की गई मूल रकम भी वापस नहीं की जा रही थी।
मामला तब आर्थिक अपराध शाखा के संज्ञान में आया, जब सलेम की एक निजी पेंट कंपनी में प्रबंधक के रूप में काम करने वाले मोहन मुरली ने शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने कंपनी में ₹28 लाख का निवेश किया था, लेकिन उन्हें वादा किया गया रिटर्न नहीं मिला। शिकायत के आधार पर ईओडब्ल्यू ने मामला दर्ज कर कंपनी की गतिविधियों और वित्तीय लेनदेन की जांच शुरू की।
इसके बाद विशेष पुलिस टीम मदुरै पहुंची और शेनपगापांडियन को गिरफ्तार कर लिया। उसे कोयंबटूर की अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
जांच एजेंसी अब कंपनी के प्रबंधक विजयाराघवन, उसकी पत्नी और तीन अन्य कथित सहयोगियों की तलाश कर रही है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने अलगापुरम स्थित कंपनी के परिसर में ताला लगा दिया और इसके बाद फरार हो गए। उनकी तलाश के साथ-साथ जांचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि निवेश योजना के संचालन में प्रत्येक आरोपी की क्या भूमिका थी।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि विभिन्न जिलों के निवेशकों ने कंपनी में ₹100 करोड़ से अधिक जमा किए थे। हालांकि, कथित घोटाले में कुल कितनी रकम शामिल है, इसका अंतिम आकलन अभी नहीं हुआ है। आर्थिक अपराध शाखा वित्तीय रिकॉर्ड और बैंक लेनदेन की जांच के बाद वास्तविक राशि का पता लगाने में जुटी है।
जांच के दौरान कंपनी के वित्तीय दस्तावेज, निवेशकों का विवरण, बैंक खातों में हुए लेनदेन और अन्य संबंधित रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि निवेशकों से कितनी रकम जुटाई गई, उसका इस्तेमाल कहां किया गया और वादा किए गए रिटर्न का भुगतान किस तरीके से किया जाना था।
मामले ने ऐसे निवेश प्रस्तावों को लेकर चिंता बढ़ा दी है, जिनमें बहुत कम समय में असाधारण रूप से अधिक रिटर्न देने का दावा किया जाता है। खास तौर पर आम लोगों से बैठकों और व्यक्तिगत संपर्क के जरिए रकम जुटाने वाली ऐसी योजनाओं की वैधता और वित्तीय गतिविधियों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। अधिकारियों की प्राथमिकता फरार आरोपियों को पकड़ने के साथ-साथ कथित निवेश घोटाले से जुड़े पूरे वित्तीय लेनदेन का पता लगाना है।
3,000 से अधिक संभावित पीड़ितों और ₹100 करोड़ से ज्यादा के शुरुआती निवेश के सामने आने के बाद अब जांच का मुख्य फोकस पूरे नेटवर्क की पहचान, रकम के प्रवाह का पता लगाने और निवेशकों को हुए कथित कुल नुकसान का आकलन करने पर है।
