इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में पुलिस ने सिम कार्ड की खरीद-फरोख्त के जरिए संचालित किए जा रहे एक साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया कि एक सिम कार्ड उसके पंजीकृत धारक से निकलकर कई लोगों के हाथों से गुजरता रहा और आखिरकार उसका इस्तेमाल लोगों को ठगने में किया गया। पुलिस ने मामले में राजेश चौधरी (42) को गिरफ्तार किया है, जबकि भगवानदास उर्फ नाना, हिमांशु जुंवाल और आशीष शर्मा की तलाश की जा रही है।
मामला भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र से मिले संदिग्ध आंकड़ों के सत्यापन के दौरान सामने आया। पुलिस की जांच में पता चला कि इंदौर शहरी क्षेत्र में 49 बिक्री केंद्र संचालकों और सिम विक्रेताओं से जुड़े 151 संदिग्ध सिम कार्ड अलग-अलग राज्यों और शहरों में दर्ज 212 वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतों में इस्तेमाल हुए थे। इसके बाद पुलिस ने संदिग्ध नंबरों, उनके पंजीकृत धारकों और सिम जारी करने की प्रक्रिया से जुड़े लोगों की जानकारी जुटानी शुरू की।
जांच के दौरान एक संदिग्ध सिम कार्ड का संबंध स्वर्णबाग कॉलोनी निवासी रोहित दलवे (27) से मिला। पूछताछ में दलवे ने बताया कि उसने 15 मार्च 2026 को जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन करने के बाद सिम राजेश चौधरी के नाम पर जारी किया था। इसके बाद पुलिस ने चौधरी से पूछताछ की तो सिम के आगे हस्तांतरण की पूरी कड़ी सामने आई।
पुलिस के मुताबिक, चौधरी ने अपने आधार कार्ड का इस्तेमाल कर सिम हासिल किया था। बाद में उसने यह सिम भगवानदास उर्फ नाना को ₹200 में दे दिया। भगवानदास ने भी इसे अपने पास रखने के बजाय आर्थिक लाभ के लिए हिमांशु जुंवाल को सौंप दिया और बदले में करीब ₹500 लिए। जांच में सामने आया कि जुंवाल ने आगे यही सिम आशीष शर्मा को दे दिया। आरोप है कि आशीष शर्मा ने बाद में इस नंबर का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया।
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इस तरह पुलिस को सिम कार्ड के एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचने की ऐसी कड़ी मिली, जिसमें पंजीकृत धारक से लेकर कई अन्य लोगों ने आर्थिक लाभ के लिए उसका हस्तांतरण किया। अंत में यही नंबर साइबर अपराध में इस्तेमाल हुआ। जांचकर्ताओं के अनुसार, सिम कार्ड के इस तरह कई लोगों के बीच घूमने से उसके वास्तविक इस्तेमालकर्ता तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
जांच में यह भी पता चला कि संदिग्ध नंबर का इस्तेमाल लोगों को जींस और पैंट थोक कीमतों पर उपलब्ध कराने का झांसा देने के लिए किया गया। आरोपियों द्वारा ग्राहकों से सामान के नाम पर रकम लेने के बाद कथित तौर पर माल की आपूर्ति नहीं की जाती थी। इसी तरह थोक कपड़ों के कारोबार की फ्रेंचाइजी देने का लालच देकर भी लोगों से पैसे वसूले गए।
उत्तर प्रदेश के खीरी जिले के रहने वाले अनिल कुमार गुप्ता की शिकायत इस मामले में महत्वपूर्ण कड़ी बनी। आरोप है कि आरोपियों ने उनसे संपर्क कर थोक जींस और पैंट कारोबार की फ्रेंचाइजी देने की पेशकश की। इसके लिए ₹30,000 की मांग की गई। बातचीत के बाद उनसे ₹10,000 ले लिए गए, लेकिन न तो फ्रेंचाइजी उपलब्ध कराई गई और न ही कोई सामान दिया गया। ठगी का एहसास होने के बाद गुप्ता ने 27 मई 2026 को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत और तकनीकी जांच से मिले तथ्यों के आधार पर एमआईजी पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने राजेश चौधरी को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं भगवानदास उर्फ नाना, हिमांशु जुंवाल और आशीष शर्मा की तलाश जारी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि 151 संदिग्ध सिम कार्ड से जुड़ी 212 वित्तीय धोखाधड़ी शिकायतों के पीछे एक ही गिरोह सक्रिय था या अलग-अलग साइबर अपराधी समूह इन सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे।
साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर जारी सिम को पैसे लेकर आगे सौंपना गंभीर जोखिम पैदा करता है। ऐसे नंबरों का इस्तेमाल धोखाधड़ी, फर्जी पहचान और अन्य आपराधिक गतिविधियों में किया जा सकता है। इस मामले ने यह भी सामने रखा है कि सिम जारी होने के बाद उसके वास्तविक इस्तेमालकर्ता और पंजीकृत धारक के बीच अंतर साइबर जांच में बड़ी चुनौती बन सकता है। पुलिस अब नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संदिग्ध सिम कार्ड के इस्तेमाल की कड़ियों की भी जांच कर रही है।
