गृह सचिव गोविंद मोहन से 2025 के फैसले के अमल की जानकारी तलब; कोर्ट ने कहा- 25 साल सेवा दे चुके CAPF अधिकारियों को जिम्मेदार पदों से दूर रखना गलत, अगली सुनवाई 22 सितंबर को

सुप्रीम कोर्ट ने IPS प्रतिनियुक्ति पर केंद्र से मांगा जवाब, CAPF अधिकारियों की तरक्की और अधिकारों पर उठे सवाल

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By Roopa
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नई दिल्ली। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में वरिष्ठ पदों पर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। बुधवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन से मई 2025 के उस फैसले को लागू करने की दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी, जिसमें CAPF में वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति धीरे-धीरे कम करने का निर्देश दिया गया था।

न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की अध्यक्षता वाली पीठ सेवानिवृत्त CAPF अधिकारियों की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति भुइयां ने CAPF के कैडर अधिकारियों की स्थिति पर गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि क्या CAPF में जिम्मेदार पद संभालने के लिए सक्षम अधिकारी नहीं हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे अधिकारी 25 वर्ष से अधिक समय तक सेवा दे चुके हैं, सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान तक दे चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें महत्वपूर्ण पदों से दूर रखना उचित नहीं है।

अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि इस व्यवस्था के पीछे एक मजबूत लॉबी है और CAPF के कैडर अधिकारियों को पूरी तरह दबाया जा रहा है। अदालत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब केंद्र ने अपने हलफनामे में बताया है कि मई 2025 के फैसले के बाद भी 46 IPS अधिकारियों को CAPF में वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (SAG) स्तर तक प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है।

23 मई 2025 को न्यायमूर्ति एएस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने निर्देश दिया था कि CAPF में SAG या महानिरीक्षक (IG) तक के स्तर पर IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति वाले पदों को समय के साथ क्रमिक रूप से कम किया जाए। अदालत ने इसके लिए अधिकतम दो वर्ष की बाहरी समयसीमा का संकेत दिया था। साथ ही अदालत ने CAPF के ग्रुप-ए अधिकारियों को सभी उद्देश्यों के लिए संगठित सेवाओं का दर्जा देते हुए छह महीने के भीतर कैडर और सेवा नियमों की समयबद्ध समीक्षा का निर्देश दिया था।

केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि फैसले को लागू करने के लिए सभी CAPF में कैडर समीक्षा शुरू की गई है। IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के मुद्दे की समीक्षा की जा रही है और आवश्यक वैधानिक बदलावों पर भी काम चल रहा है। सरकार के मुताबिक, 28 अक्टूबर 2025 को पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद सभी CAPF को विस्तृत कैडर समीक्षा प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। इन प्रस्तावों की गृह मंत्रालय ने समीक्षा की और गृह मंत्री की मंजूरी के बाद उन्हें कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को भेजा गया।

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फैसले के बाद सबसे ज्यादा IPS अधिकारी सीमा सुरक्षा बल (BSF) में प्रतिनियुक्त किए गए, जहां 13 अधिकारी पहुंचे। इसके बाद केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में 11, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में नौ, सशस्त्र सीमा बल (SSB) में सात और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) में छह IPS अधिकारी प्रतिनियुक्त हुए।

DoPT ने अदालत को बताया कि CRPF, BSF, CISF, ITBP और SSB के कैडर समीक्षा प्रस्ताव 27 जुलाई से 3 अगस्त 2026 के बीच गृह मंत्रालय की ओर से भेजे गए थे। DoPT ने इनका परीक्षण कर 17 अगस्त को अपनी टिप्पणियों और सिफारिशों के साथ व्यय विभाग को भेज दिया। व्यय विभाग की राय मिलने के बाद प्रस्ताव कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली कैडर समीक्षा समिति के सामने रखे जाएंगे।

इस विवाद के बीच केंद्र ने CAPF (General Administration) Act, 2026 भी लागू किया है। संसद ने इसे 2 अप्रैल को पारित किया और 9 अप्रैल को राजपत्र में प्रकाशित किया गया। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पांच याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिन पर 18 नवंबर को सुनवाई प्रस्तावित है।

नए कानून के अनुसार CAPF में IG स्तर के कुल पदों में 50 प्रतिशत, अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) के कम से कम 67 प्रतिशत पद और विशेष महानिदेशक तथा महानिदेशक के सभी पद IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति से भरे जाने का प्रावधान है। वहीं, DIG स्तर पर CAPF ग्रुप-ए अधिकारियों के लिए पहले मौजूद 50 प्रतिशत सीमा को हटा दिया गया है। इससे IPS प्रतिनियुक्ति और CAPF कैडर अधिकारियों के बीच अधिकारों एवं पदोन्नति को लेकर विवाद और गहरा गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को तय की है।

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