कोर्ट के आदेश पर हजरतगंज पुलिस ने दर्ज की एफआईआर; पांच साल बाद भी संपत्ति का पूर्णता प्रमाण पत्र न मिलने और एलडीए का करीब ₹21 करोड़ बकाया होने का दावा

दो ऑफिस का सपना दिखाया, ₹2.19 करोड़ ले लिए; फर्जी एनओसी का आरोप, भाव्या क्रिएटर्स के निदेशकों पर केस

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By Roopa
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लखनऊ। राजधानी के हजरतगंज में दो व्यावसायिक कार्यालय आवंटित करने का भरोसा देकर प्रॉपर्टी डीलर से ₹2 करोड़ 19 लाख लेने और बाद में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज दिखाने का मामला सामने आया है। अशोक मार्ग स्थित ट्यूलिप अपार्टमेंट निवासी प्रॉपर्टी डीलर दिनेश गांधी की शिकायत पर भाव्या क्रिएटर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों और उनके साथियों के खिलाफ हजरतगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश पर की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि रकम लेने के बावजूद न तो कार्यालयों का कब्जा दिया गया और न ही परियोजना से जुड़े जरूरी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए गए।

मुकदमे में कंपनी के निदेशक अंबरीश तिवारी निवासी कौशांबी, गाजियाबाद, वर्णिका शर्मा और सोनी सोनकर निवासी छितवापुर भुईयन, हुसैनगंज को आरोपी बनाया गया है। दिनेश गांधी के मुताबिक, आरोपियों ने विभूतिखंड स्थित प्लॉट नंबर टीसी-24 पर विकसित किए जा रहे ‘भाव्या कारपोरेट कामर्शियल टॉवर’ में उन्हें दो कार्यालय आवंटित करने का प्रस्ताव दिया था। परियोजना पर भरोसा करते हुए उन्होंने वर्ष 2016 से 2021 के बीच अलग-अलग समय पर आरोपियों को कुल ₹2.19 करोड़ का भुगतान किया।

पांच साल तक चलता रहा इंतजार

शिकायतकर्ता का आरोप है कि रकम लेने के बाद भी निर्माण कार्य निर्धारित समय में पूरा नहीं कराया गया। वर्ष 2016 से 2021 के बीच लगातार आश्वासन दिए जाते रहे, लेकिन कार्यालयों की वास्तविक स्थिति में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई। पांच साल बीतने के बाद भी उन्हें संपत्ति का पूर्णता प्रमाण पत्र नहीं दिया गया। आरोप है कि परियोजना की स्थिति को लेकर सवाल उठाने पर भी उन्हें लगातार भरोसा दिलाया जाता रहा कि आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।

दिनेश गांधी के अनुसार, आरोपियों ने परियोजना से संबंधित अग्निशमन विभाग की एनओसी और एलडीए बोर्ड का प्रमाण पत्र व एनओसी भी दिखाई थी। बाद में इन दस्तावेजों की सत्यता को लेकर संदेह पैदा हुआ। शिकायतकर्ता का दावा है कि पड़ताल के दौरान उक्त दस्तावेज कूटरचित पाए गए। इसके बावजूद लंबे समय तक कार्यालयों का कब्जा नहीं दिया गया और न ही पूर्णता प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया गया।

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बिल्डर पर ₹21 करोड़ बकाये का दावा

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि परियोजना की पड़ताल के दौरान बिल्डर पर एलडीए का करीब ₹21 करोड़ बकाया होने की जानकारी सामने आई। इतनी बड़ी देनदारी की जानकारी मिलने के बाद शिकायतकर्ता ने आरोपियों से परियोजना और अपनी रकम के बारे में जवाब मांगा। आरोप है कि अंबरीश तिवारी, वर्णिका शर्मा और सोनी सोनकर से इस संबंध में पूछताछ करने पर विवाद बढ़ गया।

दिनेश गांधी ने आरोप लगाया है कि सवाल करने पर उनके साथ गाली-गलौज की गई। विरोध करने पर मारपीट की गई और धमकी भी दी गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने अपने साथ हुई कथित धोखाधड़ी और मारपीट के संबंध में पहले हजरतगंज थाने में शिकायत दी थी। इसके बाद पुलिस कमिश्नर को भी प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की गई, लेकिन तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं होने पर उन्होंने न्यायालय का रुख किया।

कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ मुकदमा

न्यायालय के आदेश के बाद हजरतगंज पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए भुगतान से संबंधित अभिलेख, कार्यालय आवंटन के दस्तावेज, परियोजना से जुड़े कागजात और कथित एनओसी की जांच करेगी। साथ ही एलडीए से परियोजना की स्वीकृतियों, बकाये और पूर्णता प्रमाण पत्र की स्थिति की जानकारी लिए जाने की संभावना है।

जांच में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि शिकायतकर्ता से ली गई ₹2.19 करोड़ की रकम किन खातों में जमा हुई, दोनों कार्यालयों के आवंटन के लिए कौन से दस्तावेज तैयार किए गए और अग्निशमन विभाग तथा एलडीए से संबंधित बताए जा रहे प्रमाणपत्र वास्तविक हैं या नहीं। पुलिस आरोपों और दस्तावेजों की जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी। फिलहाल मुकदमा दर्ज होने के बाद मामला जांच के चरण में है और आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस की विवेचना के बाद ही होगी।

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