चंडीगढ़। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने हरियाणा में सामने आए ₹504 करोड़ के बैंक घोटाले की जांच में पांच भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों समेत 19 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। मामले में सरकारी धन को कथित तौर पर तय बैंकों से निकालकर IDFC First Bank और AU Small Finance Bank की चुनिंदा शाखाओं में भेजने और बाद में फर्जी लेनदेन के जरिए रकम को दूसरे खातों में स्थानांतरित करने का आरोप है।
CBI के अनुसार, आरोपी सरकारी अधिकारियों ने दोनों बैंकों के अधिकारियों के साथ कथित मिलीभगत कर हरियाणा सरकार के आठ विभागों और संस्थाओं की जमा राशि को उन बैंकों में स्थानांतरित कराया। जांच एजेंसी का आरोप है कि इसके बाद धन को ऐसे तीसरे पक्ष के खातों में भेजा गया, जिनका सरकारी विभागों से कोई संबंध नहीं था। कई बैंक खातों के माध्यम से रकम को घुमाने के बाद उसे नकदी में बदले जाने और आरोपियों द्वारा निजी लाभ हासिल करने की बात भी आरोपपत्र में कही गई है।
मामले में आरोपपत्र दाखिल किए गए पांच IAS अधिकारियों में पंकज अग्रवाल, आरके सिंह, प्रदीप कुमार, विनीत गर्ग, साकेत कुमार और मोहम्मद शायिन के नाम सामने आए हैं। इनमें पंकज अग्रवाल और आरके सिंह को पहले गिरफ्तार किया जा चुका है और निलंबित भी किया गया। प्रदीप कुमार को जून में उस दिन गिरफ्तार किया गया था, जिस दिन उनकी सेवानिवृत्ति निर्धारित थी।
आरोपपत्र में IDFC First Bank के तीन अधिकारियों और AU Small Finance Bank के एक अधिकारी के अलावा हरियाणा सरकार के नौ अन्य अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है। CBI ने आरोपियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, रिश्वतखोरी, जालसाजी, सबूत नष्ट करने, आपराधिक विश्वासघात और अपराध में सहयोग करने जैसे आरोप लगाए हैं।
जिन आठ सरकारी संस्थाओं की रकम कथित तौर पर स्थानांतरित की गई, उनमें पंचायत विभाग, पंचकूला और कालका नगर निगम, हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद, हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और हरियाणा पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड शामिल हैं।
37 आरोपी, 26 गिरफ्तार
CBI ने बताया कि इस मामले में अब तक कुल 37 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल हो चुका है, जिनमें से 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच के दौरान एजेंसी ने 54 स्थानों पर तलाशी ली और करीब ₹20 करोड़ मूल्य का सोना समेत कई आपत्तिजनक दस्तावेज और अन्य साक्ष्य बरामद किए।
यह इस मामले में CBI की तीसरी चार्जशीट है। इससे पहले एजेंसी 18 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। इनमें बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी, निजी व्यक्ति और कंपनियां शामिल हैं। राज्य सरकार के अनुरोध पर CBI ने इस मामले की जांच हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से अपने हाथ में ली थी।
जांच का दायरा केवल हरियाणा तक सीमित नहीं रहा। CBI ने चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और चंडीगढ़ नगर निगम से जुड़े एक अन्य मामले तथा चंडीगढ़ अक्षय ऊर्जा एवं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रोत्साहन सोसाइटी से संबंधित मामले को भी अपने हाथ में लिया है। दोनों मामलों में आरोपपत्र पहले ही दाखिल किए जा चुके हैं।
तीन वरिष्ठ IAS अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
चार्जशीट में नामजद अन्य वरिष्ठ अधिकारियों में 1991 बैच के IAS अधिकारी विनीत गर्ग, 2005 बैच के साकेत कुमार और 2002 बैच के मोहम्मद शायिन शामिल हैं। जांच के दौरान विनीत गर्ग को हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटाकर मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर भेजा गया था।
विनीत गर्ग ने हाल के वर्षों में आबकारी एवं कराधान, स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा समेत कई महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारियां संभाली हैं। साकेत कुमार नवंबर 2024 से अप्रैल 2026 तक मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव भी रहे। फिलहाल वह अभिलेखागार विभाग में आयुक्त एवं सचिव के पद पर हैं। मोहम्मद शायिन इससे पहले चंडीगढ़ के उपायुक्त रह चुके हैं और वर्तमान में आवास विभाग से जुड़े पद पर तैनात हैं।
CBI का कहना है कि जांच का उद्देश्य कथित तौर पर हड़पी गई सरकारी रकम की पूरी लेनदेन श्रृंखला का पता लगाना, उससे जुड़े धन को चिन्हित करना और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। आरोपपत्र दाखिल होने के बाद अब मामले में आरोपियों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
