तेलंगाना के आदिलाबाद जिले में सोशल मीडिया के जरिए मोबाइल स्पेयर पार्ट्स और एसेसरीज बेचने के नाम पर साइबर ठगी करने वाले एक 22 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, राजस्थान के जालोर निवासी प्रकाश कुमार ने कथित तौर पर सस्ते मोबाइल सामान की पेशकश कर 19 राज्यों में करीब 140 लोगों को अपने जाल में फंसाया। इन लोगों से कुल ₹5.30 करोड़ से अधिक की रकम ठगे जाने की बात सामने आई है। आरोपी के पास से दो मोबाइल फोन और ₹1 लाख नकद बरामद किए गए हैं।
मामला आदिलाबाद के इचोड़ा मंडल में एक मोबाइल दुकानदार की शिकायत के बाद सामने आया। शिकायतकर्ता अपनी दुकान के लिए मोबाइल चार्जर, डिस्प्ले और दूसरे सामान की तलाश कर रहा था। इसी दौरान सोशल मीडिया पर उसकी नजर ऐसे खाते पर पड़ी, जहां मोबाइल स्पेयर पार्ट्स और एसेसरीज बाजार से कम कीमत पर उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा था। संपर्क करने पर सामने वाले व्यक्ति ने खुद को मोबाइल सामान का आपूर्तिकर्ता बताया और अग्रिम भुगतान के बाद कूरियर से सामान भेजने का भरोसा दिया।
सस्ते दाम और सामान की आपूर्ति के भरोसे में आकर दुकानदार ने 25 जुलाई से 8 अगस्त के बीच कई बार आरोपी के बताए बैंक खातों में रकम भेजी। उसने कुल ₹2.18 लाख का भुगतान किया। रकम मिलने के बाद आरोपी ने तत्काल संदेश भेजने वाले एक अनुप्रयोग के जरिए कूरियर की रसीद भी भेज दी। इससे शिकायतकर्ता को भरोसा हो गया कि उसका सामान भेज दिया गया है।
इसके बाद आरोपी ने उसे बताया कि पार्सल कूरियर कार्यालय पहुंच चुका है और वहां से प्राप्त किया जा सकता है। 22 अगस्त को शिकायतकर्ता जब इचोड़ा और आदिलाबाद में बताए गए कूरियर कार्यालयों में पहुंचा तो वहां उसके नाम से कोई पार्सल नहीं मिला। कई बार संपर्क करने के बावजूद जब आरोपी की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उसे ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की। बैंक खातों में हुए लेनदेन, मोबाइल नंबरों और डिजिटल गतिविधियों की जांच के दौरान आरोपी की पहचान प्रकाश कुमार के रूप में हुई। पुलिस ने राजस्थान में कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ और प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इसी तरीके से आरोपी ने देश के अलग-अलग राज्यों में लोगों को निशाना बनाया था।
जांच में करीब 140 पीड़ितों और ₹5.30 करोड़ से अधिक के कथित वित्तीय नुकसान का पता चला है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी के लिए कितने सोशल मीडिया खातों, मोबाइल नंबरों और बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी अकेले इस नेटवर्क को चला रहा था या उसके साथ अन्य लोग भी जुड़े थे। बरामद मोबाइल फोन और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, ऑनलाइन खरीदारी में कम कीमत का लालच साइबर ठगों का सबसे प्रभावी हथियार बनता जा रहा है। खासकर व्यापारियों को थोक दरों पर सामान उपलब्ध कराने के नाम पर बनाए गए सोशल मीडिया खातों की विश्वसनीयता की जांच किए बिना अग्रिम भुगतान करना जोखिम भरा है। उन्होंने कहा कि फर्जी विक्रेता अक्सर पहले कम कीमत और आकर्षक सौदे की पेशकश करते हैं, फिर भुगतान के बाद नकली कूरियर विवरण, रसीद या भेजे गए सामान की जानकारी देकर पीड़ित को भरोसे में रखते हैं। ऐसे मामलों में भुगतान से पहले विक्रेता के पते, कारोबार, संपर्क विवरण और बैंक खाते की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि किसी अनजान विक्रेता को केवल सोशल मीडिया पर मौजूद प्रोफाइल या भेजी गई रसीद के आधार पर भरोसेमंद नहीं माना जाना चाहिए। खासकर जब सामने वाला व्यक्ति बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर सामान देने और तत्काल भुगतान करने का दबाव बनाए, तो सावधानी बरतनी चाहिए।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर मिले अज्ञात विक्रेताओं से खरीदारी करते समय पूरी जानकारी की पुष्टि करें और बिना सत्यापन के अग्रिम भुगतान न करें। यदि साइबर ठगी हो जाती है तो पीड़ित को तुरंत 1930 पर शिकायत करनी चाहिए, ताकि रकम के लेनदेन को रोकने और धन की बरामदगी की संभावना बढ़ाई जा सके। मामले में आरोपी से पूछताछ और उसके डिजिटल तथा वित्तीय नेटवर्क की जांच जारी है।
