नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छत्तीसगढ़ में जिला खनिज न्यास (DMF) निधि से जुड़े कथित धन शोधन मामले में मंगलवार को स्थानीय कारोबारी सतपाल सिंह चाबड़ा को गिरफ्तार किया। जांच एजेंसी के अधिकारियों के मुताबिक, चाबड़ा को गिरफ्तार करने के बाद विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे पांच दिन की ED हिरासत में भेज दिया गया।
यह मामला छत्तीसगढ़ में DMF के तहत आने वाली राशि के कथित दुरुपयोग और सरकारी धन की हेराफेरी से जुड़ा है। ED का आरोप है कि बड़ी मात्रा में DMF की राशि को छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम के माध्यम से कथित तौर पर गलत तरीके से स्थानांतरित और इस्तेमाल किया गया।
DMF का गठन खनन गतिविधियों से प्रभावित लोगों और क्षेत्रों के विकास के लिए किया गया है। खनन से मिलने वाली राशि से सभी जिलों में इसके तहत ट्रस्ट बनाए गए हैं। इसका उद्देश्य खनन परियोजनाओं और उनसे प्रभावित समुदायों के हित में विकास कार्यों को वित्तीय सहायता देना है।
तीन FIR के बाद शुरू हुई ED की जांच
ED ने कथित DMF घोटाले की जांच छत्तीसगढ़ पुलिस की ओर से दर्ज तीन FIR के आधार पर शुरू की थी। इन मामलों में ठेकेदारों पर राज्य सरकार के अधिकारियों और राजनीतिक पदाधिकारियों के साथ कथित मिलीभगत कर सरकारी धन की हेराफेरी करने के आरोप लगाए गए थे।
जांच आगे बढ़ने के बाद मामला धन शोधन के पहलू तक पहुंचा। ED ने अदालत को बताया कि चाबड़ा को इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला व्यक्ति माना गया है। एजेंसी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ आर्थिक अपराध शाखा की ओर से मई में दाखिल आरोपपत्र में उसे प्रभावशाली सरकारी अधिकारियों, जिला स्तर के अधिकारियों और निजी विक्रेताओं के बीच मुख्य संपर्ककर्ता और वित्तीय समन्वयक के रूप में नामित किया गया है।
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12 विक्रेताओं से ₹31 करोड़ से अधिक कमीशन का आरोप
ED ने अदालत में दावा किया कि चाबड़ा ने राज्य बीज निगम से जुड़े करीब 12 विक्रेताओं से कथित तौर पर ₹31 करोड़ से अधिक की कमीशन राशि प्राप्त की। जांच एजेंसी का आरोप है कि यह रकम कथित अपराध से अर्जित आय का हिस्सा थी और बाद में इसे अचल संपत्तियां खरीदने में लगाया गया।
एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित कमीशन का भुगतान किन परिस्थितियों में किया गया और इसके बदले किन सरकारी या निजी पक्षों को लाभ पहुंचाया गया। जांच में सरकारी निधि के प्रवाह, विक्रेताओं के भुगतान और उससे जुड़ी संपत्तियों के बीच संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है।
सरकारी योजनाओं की राशि के इस्तेमाल पर सवाल
DMF की राशि का इस्तेमाल खनन प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जनकल्याणकारी गतिविधियों के लिए किया जाना होता है। ऐसे में इस निधि के कथित दुरुपयोग ने सरकारी योजनाओं के लिए निर्धारित धन के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
ED का आरोप है कि सरकारी अधिकारियों, निजी विक्रेताओं और अन्य प्रभावशाली लोगों के बीच कथित सांठगांठ के जरिए धन के प्रवाह को व्यवस्थित किया गया। जांच एजेंसी अब इस कथित नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और कंपनियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
चाबड़ा की गिरफ्तारी के बाद मामले में वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों की जांच और तेज होने की संभावना है। एजेंसी यह भी जांच सकती है कि कथित अपराध से अर्जित धन को किन संपत्तियों में लगाया गया और क्या ऐसी संपत्तियों की खरीद में किसी अन्य व्यक्ति या संस्था की भूमिका रही।
मामले में आगे की कार्रवाई अदालत के समक्ष पेश किए जाने वाले दस्तावेजों और जांच के दौरान सामने आने वाले वित्तीय साक्ष्यों पर निर्भर करेगी। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगा।
