प्रयागराज। अजमेर स्थित बैद फिनसर्व लिमिटेड से कथित तौर पर फर्जी बैलेंस शीट और बैंक स्टेटमेंट के आधार पर ₹75 लाख का लोन हासिल करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि लोन की दो किस्तें चुकाने के बाद संबंधित कंपनी ने भुगतान बंद कर दिया। मामले में कोर्ट के आदेश पर जॉर्जटाउन पुलिस ने आसरा फिनकॉर्प प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अशोक कुमार सिंह, मीना सिंह और संजय शाही के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
FIR के मुताबिक, बैद फिनसर्व लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधि नरपत सिंह खंगारोत ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि आसरा फिनकॉर्प प्राइवेट लिमिटेड ने वर्ष 2025 में कंपनी से ₹75 लाख के वित्तीय ऋण के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि ऋण हासिल करने के लिए आवेदक कंपनी ने अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत दिखाने के उद्देश्य से कथित तौर पर फर्जी बैलेंस शीट और बैंक स्टेटमेंट तैयार किए और इन्हीं दस्तावेजों को वित्तीय संस्थान के समक्ष प्रस्तुत किया।
शिकायत के अनुसार, उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और अन्य औपचारिकताओं के आधार पर 25 जुलाई 2025 को लोन संबंधी अनुबंध किया गया। इसके बाद 31 जुलाई 2025 को तीन अलग-अलग लोन एग्रीमेंट के तहत ₹25-₹25 लाख की तीन किस्तों में कुल ₹75 लाख आसरा फिनकॉर्प के बैंक खाते में भेजे गए। ऋण की शर्तों के अनुसार कंपनी को प्रत्येक लोन के लिए निर्धारित मासिक किस्तों के माध्यम से रकम वापस करनी थी।
आरोप है कि कंपनी ने शुरुआत में दो किस्तों का भुगतान किया, जिससे फाइनेंस कंपनी को ऋण की नियमित अदायगी जारी रहने की उम्मीद रही। हालांकि, इसके बाद भुगतान बंद कर दिया गया। शिकायत में कहा गया है कि 1 नवंबर और 1 दिसंबर 2025 को देय तीसरी और चौथी किस्त का भुगतान नहीं किया गया। भुगतान नहीं मिलने पर फाइनेंस कंपनी के प्रतिनिधियों ने कंपनी के निदेशकों से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन कथित तौर पर उनके फोन का कोई जवाब नहीं मिला।
मामला यहीं नहीं रुका। शिकायतकर्ता के अनुसार, फाइनेंस कंपनी की ओर से कानूनी नोटिस भेजकर बकाया रकम चुकाने और स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया, लेकिन कथित तौर पर उसका भी कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद कंपनी के कर्मचारी आसरा फिनकॉर्प के कार्यालय पहुंचे। आरोप है कि वहां कार्यालय बंद मिला और दरवाजे पर ताला लगा हुआ था। इससे फाइनेंस कंपनी को ऋण लेने की प्रक्रिया और रकम के इस्तेमाल को लेकर संदेह हुआ।
इसके बाद उपलब्ध बैंक रिकॉर्ड और लेनदेन की जांच की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आसरा फिनकॉर्प के बैंक स्टेटमेंट में विभिन्न कंपनियों से बड़ी रकम ऋण के रूप में प्राप्त होने की जानकारी सामने आई। हालांकि, आरोप है कि इन रकमों का पूरा इस्तेमाल ग्राहकों को वित्तीय सहायता या ऋण देने में नहीं किया गया।
जांच के लिए उपलब्ध कराए गए बैंक लेनदेन में कथित तौर पर यह भी सामने आया कि कंपनियों से प्राप्त रकम का एक हिस्सा आसरा फिनकॉर्प के निदेशकों, उनके रिश्तेदारों और परिचितों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। फाइनेंस कंपनी ने इन लेनदेन को संदिग्ध बताते हुए आरोप लगाया कि कंपनी ने वास्तविक वित्तीय स्थिति और रकम के इस्तेमाल से संबंधित जानकारी छिपाकर ऋण हासिल किया।
पुलिस अब FIR में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है। जांच के दौरान लोन आवेदन के समय जमा किए गए बैलेंस शीट, बैंक स्टेटमेंट, आय-व्यय से जुड़े रिकॉर्ड, तीनों लोन एग्रीमेंट और रकम के बैंकिंग ट्रेल की पड़ताल की जा सकती है। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि प्रस्तुत किए गए वित्तीय दस्तावेज वास्तविक थे या उनमें किसी स्तर पर बदलाव या जालसाजी की गई थी।
पुलिस संबंधित बैंक खातों में हुई रकम की आवाजाही की भी जांच करेगी। खासतौर पर निदेशकों, उनके रिश्तेदारों और परिचितों के खातों में कथित रूप से ट्रांसफर की गई रकम का उद्देश्य और उपयोग जांच का अहम हिस्सा होगा। यदि जांच में दस्तावेजों की जालसाजी या ऋण की रकम के कथित दुरुपयोग के आरोपों की पुष्टि होती है, तो मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपियों पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगी। मामला सामने आने के बाद वित्तीय संस्थानों के लिए ऋण स्वीकृत करने से पहले कंपनियों की बैलेंस शीट, बैंक स्टेटमेंट और वास्तविक वित्तीय गतिविधियों की स्वतंत्र जांच की जरूरत भी सामने आई है।
