वडोदरा की वरिष्ठ महिला से StarMaker ऐप पर बने भावनात्मक रिश्ते के जरिए ₹23.19 लाख की कथित ठगी का मामला सामने आया है।

दुबई के सिम से लखनऊ में बैठकर चला रहा था ठगी का नेटवर्क, ‘जोकर’ की तलाश में पुलिस

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By Roopa
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कानपुर। कानपुर में सामने आए बड़े साइबर ठगी नेटवर्क की जांच अब लखनऊ तक पहुंच गई है। फजलगंज पुलिस और साइबर सेल की कार्रवाई में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान एक ऐसे साइबर ठग का नाम सामने आया है, जो कथित तौर पर ‘जोकर’ के नाम से लखनऊ में बैठकर दुबई के सिम कार्ड के जरिए ठगी का नेटवर्क चला रहा था। पुलिस के मुताबिक, यह आरोपी कपिल वर्मा उर्फ कपिल देव उर्फ शंटी के समानांतर अपना गिरोह संचालित कर रहा था। उसके नेटवर्क में छह से ज्यादा साइबर ठगों के शामिल होने की जानकारी मिली है।

पुलिस को गिरफ्तार आरोपियों के पास से करीब एक दर्जन दुबई के सिम कार्ड मिले हैं। जांच में सामने आया है कि इन सिम कार्ड का इस्तेमाल विदेश में बैठे साइबर अपराधियों से संपर्क और ठगी के नेटवर्क को संचालित करने में किया जा रहा था। पुलिस का अनुमान है कि ‘जोकर’ के पकड़े जाने के बाद साइबर ठगी के इस नेटवर्क से जुड़े कई और लोगों तथा करोड़ों रुपये के लेनदेन का खुलासा हो सकता है।

कपिल के साथियों से खुली समानांतर गैंग की जानकारी

फजलगंज पुलिस और साइबर सेल ने शनिवार को कपिल वर्मा उर्फ कपिल देव उर्फ शंटी, अभय प्रताप और रोहित सिंह उर्फ रुद्र प्रताप सिंह को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि यह गिरोह दुबई में सक्रिय साइबर ठगों को म्यूल बैंक खाते और प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड उपलब्ध कराता था। पुलिस के मुताबिक, पिछले करीब दो वर्षों में इस नेटवर्क के जरिए देश-विदेश में ₹100 करोड़ से अधिक की ठगी किए जाने के संकेत मिले हैं।

पूछताछ में सामने आया कि कपिल वर्मा के नेटवर्क में अमित उर्फ जगदीश उर्फ अमित को उसका करीबी सहयोगी बताया जा रहा है, जबकि ‘जोकर’ लखनऊ से अलग और समानांतर नेटवर्क चला रहा था। पुलिस अब जोकर की वास्तविक पहचान और उसके नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही है।

जांच में यह भी सामने आया है कि केपी नाम का युवक कथित तौर पर गिरोह को प्री-एक्टिवेटेड सिम उपलब्ध कराता था। पुलिस को सुल्तान मिर्जा उर्फ अभय शुक्ला, केपी और अमित उर्फ जगदीश की तलाश है। इन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद नेटवर्क के संचालन और विदेश से जुड़े कनेक्शन की और जानकारी मिलने की उम्मीद है।

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कई जिलों में म्यूल खाते खुलवाने का नेटवर्क

पुलिस के अनुसार, लखनऊ में बैठा ‘जोकर’ अपने साथियों के जरिए प्रदेश के कई जिलों में म्यूल बैंक खाते खुलवाने का काम करवा रहा था। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से हासिल रकम प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किए जाने की आशंका है।

जांच में यह भी सामने आया है कि म्यूल खाते खुलवाने से लेकर नेटवर्क के दूसरे खर्चों तक की व्यवस्था कपिल वर्मा की ओर से किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कपिल और जोकर के नेटवर्क के बीच किस स्तर पर संपर्क था और दुबई में सक्रिय साइबर अपराधियों तक रकम और बैंक खातों की जानकारी कैसे पहुंचाई जाती थी।

मोबाइल चैट और बैंक खातों से मिले सुराग

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन और सिम कार्ड की जांच शुरू कर दी है। मोबाइल में मौजूद चैट, कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल जानकारी के अलावा बैंक खातों के लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है। इन्हीं सुरागों के आधार पर पुलिस नेटवर्क में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के मामलों में अलग-अलग स्तर पर काम करने वाले नेटवर्क बनाए जाते हैं। एक समूह म्यूल खाते और सिम उपलब्ध कराता है, दूसरा रकम को अलग-अलग खातों में घुमाता है और मुख्य संचालक विदेश में बैठे अपराधियों के साथ संपर्क बनाए रखते हैं। ऐसे नेटवर्क में इस्तेमाल बैंक खातों और सिम कार्ड की पूरी श्रृंखला को जोड़ना जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण होता है।

पुलिस अब ‘जोकर’ की वास्तविक पहचान सामने लाने के साथ उसके संपर्कों और नेटवर्क में शामिल छह से अधिक संदिग्धों की तलाश कर रही है। साथ ही दुबई के सिम कार्ड, म्यूल खातों और बैंक लेनदेन की कड़ियों को जोड़कर इस पूरे सिंडिकेट के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच की जा रही है।

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