लखनऊ। प्रतिष्ठित संस्थान BITS Pilani में बेटी का दाखिला कराने का सपना दिखाकर एक महिला से ₹46 लाख की साइबर ठगी के मामले में लखनऊ पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच ने 21 वर्षीय BTech छात्र को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान शहीद विहार निवासी यशराज बाजपेई के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, उसे उस समय पकड़ा गया, जब वह चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से फ्लाइट के जरिए लखनऊ से बाहर जाने की तैयारी में था। आरोपी दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) में BTech के तीसरे वर्ष का छात्र है।
पुलिस के अनुसार, मामले की शिकायत आईआईएम रोड निवासी किरण चौबे ने की थी। शिकायत के आधार पर 20 अगस्त को साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज किया गया। महिला ने आरोप लगाया कि Facebook और Instagram पर संचालित फर्जी एजुकेशन कंसल्टेंसी अकाउंट के जरिए उससे संपर्क किया गया। आरोपियों ने खुद को अलग-अलग शिक्षा परामर्श संस्थानों का प्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी बताया और उसकी बेटी का BITS Pilani में दाखिला कराने का भरोसा दिलाया।
आरोपियों ने परिवार का विश्वास जीतने के लिए एडमिशन से जुड़ी पूरी प्रक्रिया का झांसा दिया। इसके बाद रजिस्ट्रेशन, एडमिशन फीस और अन्य खर्चों के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई। सीट सुरक्षित कराने के नाम पर कथित तौर पर नकद भुगतान भी लिया गया। पुलिस के मुताबिक, पीड़िता से ऑनलाइन ट्रांसफर और नकद भुगतान के जरिए कुल ₹46 लाख वसूले गए।
ठगी को असली एडमिशन प्रक्रिया जैसा दिखाने के लिए आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी एडमिशन लेटर, फीस रसीद और अन्य दस्तावेज भी उपलब्ध कराए। पीड़िता से अलग-अलग मोबाइल नंबरों और फर्जी पहचान के जरिए संपर्क किया जाता रहा। रकम मिलने के बाद जब दाखिले की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी और पैसे वापस नहीं किए गए तो महिला को ठगी का एहसास हुआ।
जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और अन्य इनपुट के आधार पर यशराज बाजपेई को ट्रेस किया। पुलिस के मुताबिक, वह लखनऊ से बाहर जाने की तैयारी में था, तभी एयरपोर्ट पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। तलाशी के दौरान उसके पास से ₹40,225 नकद, एक Apple MacBook Pro, तीन मोबाइल फोन, पांच डेबिट/ATM कार्ड और दो SIM कार्ड बरामद किए गए। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है।
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पुलिस की जांच में सामने आया कि कथित गिरोह ने सोशल मीडिया पर फर्जी एजुकेशन कंसल्टेंसी प्रोफाइल तैयार कर रखे थे। इन प्रोफाइल के जरिए प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग और मेडिकल संस्थानों में एडमिशन दिलाने का दावा किया जाता था। छात्रों और अभिभावकों को आकर्षित करने के लिए सोशल मीडिया पर एडमिशन संबंधी विज्ञापन और दावे किए जाते थे। संपर्क में आने वाले लोगों को गारंटीड एडमिशन या प्रतिष्ठित संस्थानों में सीट दिलाने का भरोसा दिया जाता था।
पुलिस का कहना है कि आरोपी कथित तौर पर अपनी पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग मोबाइल नंबर और नाम इस्तेमाल करते थे। कुछ मामलों में पीड़ितों से अलग-अलग व्यक्तियों के जरिए संपर्क किया जाता था। रकम को विभिन्न बैंक खातों और दूसरे माध्यमों से आगे ट्रांसफर कर कथित तौर पर लेनदेन की कड़ी छिपाने की कोशिश की जाती थी। पूछताछ में यशराज ने कथित तौर पर फर्जी कंसल्टेंसी अकाउंट चलाने और एडमिशन की तलाश कर रहे छात्रों तथा अभिभावकों को निशाना बनाने से जुड़ी जानकारी दी है।
पुलिस अब आरोपी के अन्य साथियों की पहचान करने में जुटी है। बरामद मोबाइल फोन, लैपटॉप, SIM और बैंक कार्ड की जांच से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि गिरोह ने कितने लोगों को निशाना बनाया और ठगी की रकम कहां-कहां भेजी गई। पुलिस ठगी की रकम की बरामदगी के लिए भी बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की पड़ताल कर रही है।
साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, प्रतिष्ठित संस्थानों में एडमिशन की प्रतिस्पर्धा और अभिभावकों की जल्द सीट सुरक्षित कराने की चिंता का फायदा साइबर ठग उठाते हैं। फर्जी दस्तावेज और संस्थान के नाम का इस्तेमाल भरोसा पैदा करने के लिए किया जाता है। अभिभावकों को किसी एजेंट के दावे पर भुगतान करने के बजाय संस्थान की आधिकारिक प्रवेश प्रक्रिया से हर जानकारी का सत्यापन करना चाहिए।
पुलिस ने छात्रों और अभिभावकों से किसी भी एजुकेशन कंसल्टेंसी या एडमिशन एजेंट को भुगतान करने से पहले उसकी विश्वसनीयता जांचने की अपील की है। एडमिशन से संबंधित फीस और दस्तावेज केवल संस्थान के अधिकृत माध्यमों से सत्यापित करने की सलाह दी गई है। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज कराने या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के जरिए शिकायत करने को कहा गया है।
