गोरखपुर। गुलरिहा थाना क्षेत्र के भटहट कस्बे में साइबर ठगों ने एक महिला को डराकर ₹44 हजार की ठगी कर ली। जालसाजों ने पहले खुद को डिलीवरी बॉय बताकर फोन किया और महिला के नाम से डायमंड ज्वेलरी के साथ प्रतिबंधित सामग्री मंगाए जाने का दावा किया। महिला ने जब किसी ऑनलाइन ऑर्डर से इनकार किया तो फोन काट दिया। इसके कुछ देर बाद विदेशी नंबर से उनके WhatsApp पर पुलिसकर्मियों का कथित AI-generated वीडियो भेजकर गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया गया। इसके बाद केस रफा-दफा करने के नाम पर महिला से रकम ट्रांसफर करा ली गई।
पीड़िता की पहचान भटहट कस्बा निवासी मीना विश्वकर्मा के रूप में हुई है। शुक्रवार सुबह उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को डिलीवरी बॉय बताते हुए कहा कि उनके नाम से एक पैकेज आया है। पैकेज में डायमंड ज्वेलरी के अलावा प्रतिबंधित सामग्री होने का दावा किया गया। मीना ने किसी भी तरह का ऑनलाइन ऑर्डर करने से इनकार किया। इसके बाद उन्होंने कॉल काट दी।
कुछ देर बाद WhatsApp पर आया वीडियो
फोन कटने के कुछ समय बाद मीना के WhatsApp पर +92 से शुरू होने वाले दूसरे नंबर से एक वीडियो भेजा गया। वीडियो में पुलिसकर्मियों जैसी वर्दी पहने लोगों को दिखाया गया था। जालसाजों ने वीडियो को कथित तौर पर इस तरह पेश किया कि महिला को लगा कि मामला वास्तव में पुलिस और किसी कानूनी कार्रवाई से जुड़ा है।
वीडियो भेजने के बाद जालसाजों ने महिला से संपर्क किया और उन्हें गिरफ्तारी तथा कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया। आरोपियों ने दावा किया कि यदि वह मामले से बचना चाहती हैं तो पैसे देकर केस को रफा-दफा कराया जा सकता है। लगातार दबाव और डर के बीच महिला जालसाजों के झांसे में आ गईं।
केस खत्म कराने के नाम पर कराई रकम ट्रांसफर
ठगों ने महिला को एक बैंक खाता उपलब्ध कराया और उसमें पैसे जमा करने के लिए कहा। पुलिस के मुताबिक, महिला ने आरोपियों के बताए खाते में ₹44,000 ट्रांसफर कर दिए। रकम भेजने के बाद भी जब ठगों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं और उन्हें पूरे घटनाक्रम का एहसास हुआ तो महिला ने मामले की जानकारी पुलिस को दी।
पीड़िता ने साइबर क्राइम पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस अब शिकायत में उपलब्ध मोबाइल नंबर, WhatsApp संपर्क, भेजे गए वीडियो और जिस खाते में रकम ट्रांसफर की गई, उसकी जानकारी के आधार पर जांच कर रही है।
AI वीडियो से बढ़ा फर्जीवाड़े का खतरा
इस घटना में जालसाजों ने कथित तौर पर AI-generated वीडियो का इस्तेमाल कर पीड़िता के सामने पुलिस कार्रवाई का भरोसेमंद दिखने वाला माहौल तैयार किया। ऐसे मामलों में अपराधी पहले किसी सामान्य बहाने से संपर्क करते हैं और फिर कथित अपराध, पुलिस जांच या गिरफ्तारी का डर पैदा कर पीड़ित को मानसिक दबाव में ले लेते हैं।
साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, साइबर ठग अब तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल करके फर्जी पहचान को अधिक विश्वसनीय बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी अनजान व्यक्ति की ओर से फोन कर कानूनी कार्रवाई, गिरफ्तारी या किसी संदिग्ध पार्सल का डर दिखाकर तुरंत पैसे मांगना गंभीर चेतावनी है। पुलिस या कोई सरकारी एजेंसी फोन अथवा वीडियो कॉल पर केस खत्म करने के लिए निजी खाते में रकम जमा कराने को नहीं कहती।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी अनजान कॉल पर अपने नाम से पार्सल, प्रतिबंधित सामग्री या किसी अपराध में संलिप्तता की बात सुनकर घबराएं नहीं। यदि कोई व्यक्ति पुलिस अधिकारी बनकर वीडियो भेजे या गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे मांगे तो बिना सत्यापन के कोई रकम ट्रांसफर न करें। संदिग्ध नंबर, WhatsApp चैट, वीडियो और भुगतान की जानकारी सुरक्षित रखते हुए तत्काल साइबर अपराध पोर्टल या पुलिस को शिकायत दें।
