नई दिल्ली: दिल्ली में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी का एक और मामला सामने आया है, जिसमें भारतीय सेना के एक सेवानिवृत्त कर्नल को पुलिस, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अदालत के नाम पर डराकर ₹15.50 लाख ट्रांसफर करा लिए गए। दक्षिण-पश्चिम जिला साइबर सेल ने मामले की जांच करते हुए पंजाब और राजस्थान से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक बैंक कर्मचारी भी शामिल है। पुलिस के अनुसार, गिरोह म्यूल बैंक खातों के जरिए साइबर ठगी की रकम को अलग-अलग स्तरों पर भेजता था और इसके तार विदेश में बैठे कथित साइबर अपराधियों तक जुड़े मिले हैं।
पुलिस के मुताबिक, मुनिरका एन्क्लेव निवासी सेवानिवृत्त कर्नल को 15 अप्रैल को एक कॉल आया था। कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और दावा किया कि महाराष्ट्र पुलिस के आदेश पर उनका मोबाइल नंबर बंद किया जा रहा है। कुछ देर बाद पीड़ित को दूसरे नंबर पर कनेक्ट किया गया। वहां आरोपियों ने दावा किया कि उनके नाम से मुंबई में एक बैंक खाता खोला गया है और उसका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग, निवेश धोखाधड़ी तथा आतंकी फंडिंग के लिए किया जा रहा है।
फर्जी दस्तावेजों से पैदा किया गिरफ्तारी का डर
आरोपियों ने कथित तौर पर अपनी कहानी को विश्वसनीय बनाने के लिए पीड़ित और उनकी पत्नी को कई फर्जी दस्तावेज भेजे। इनमें ED के नाम से तैयार कथित गिरफ्तारी वारंट, अदालत से जुड़े दस्तावेज, अग्रिम जमानत के कागजात और बॉम्बे हाईकोर्ट तथा RBI के नाम से बनाए गए फर्जी पत्र शामिल थे।
इन दस्तावेजों के जरिए दंपती को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की गई कि वे गंभीर आपराधिक मामले में फंस चुके हैं और किसी भी समय गिरफ्तार किए जा सकते हैं। इसके बाद उन्हें लगातार फोन और वीडियो कॉल पर संपर्क में रखा गया। पुलिस के अनुसार, इसी दौरान डिजिटल अरेस्ट का दबाव बनाकर उनसे बैंक खाते में रकम ट्रांसफर कराई गई।
आरोपियों ने कथित तौर पर रकम को जांच प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए पीड़ित से ₹15.50 लाख एक बैंक खाते में जमा करा लिए। बाद में पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई।
लुधियाना के खाते से खुला ठगी का रास्ता
शिकायत मिलने के बाद साइबर सेल ने बैंकिंग लेनदेन और तकनीकी साक्ष्यों की जांच शुरू की। जांच में पता चला कि ठगी की रकम पंजाब के लुधियाना स्थित एक बैंक खाते में पहुंची थी। इसके बाद पुलिस ने खाते से जुड़े लोगों और रकम के आगे हुए लेनदेन की जानकारी जुटाई।
तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस ने पंजाब और राजस्थान में कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें लुधियाना निवासी सरबजीत, कथित खाता धारक, लुधियाना निवासी सूरज, एक बैंक कर्मचारी और राजस्थान के सीकर निवासी नरेश उर्फ लकी शामिल हैं। आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन और छह सिम कार्ड बरामद किए गए हैं।
म्यूल खातों के जरिए विदेश तक पहुंच रही थी रकम
जांच में आरोपियों के कथित तौर पर साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी साइबर अपराधियों को म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। ऐसे खातों का इस्तेमाल पीड़ितों से ठगी गई रकम को पहले जमा करने और फिर कई खातों के जरिए आगे भेजने के लिए किया जाता है।
जांच में इन लेनदेन के तार कथित तौर पर कंबोडिया, UAE और दुबई में बैठे साइबर अपराधियों तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरफ्तार आरोपियों ने कितने बैंक खाते उपलब्ध कराए और इनके जरिए कितनी रकम का लेनदेन किया गया।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी Prof. Triveni Singh के मुताबिक, डिजिटल अरेस्ट की ठगी में अपराधी कानून और जांच एजेंसियों के नाम का इस्तेमाल कर पीड़ित को मानसिक रूप से इतना दबाव में ले आते हैं कि वह स्वतंत्र रूप से सत्यापन नहीं कर पाता। उनके अनुसार, फर्जी दस्तावेज और लगातार वीडियो कॉल इस दबाव को और मजबूत करते हैं, जबकि म्यूल खाते ठगी की रकम को मुख्य नेटवर्क तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के साथ उनके बैंक खातों, मोबाइल फोन और सिम कार्ड की जांच कर रही है। जांच का अगला फोकस म्यूल खातों की पूरी श्रृंखला और विदेश में बैठे कथित संचालकों की पहचान पर है। साथ ही पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इसी नेटवर्क ने पहले कितने लोगों को निशाना बनाया और कितनी रकम की साइबर ठगी में इसकी भूमिका रही है।
