गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में कथित तौर पर शॉर्टकट से अरबपति बनने की कोशिश में एक महिला और उसके गिरोह द्वारा अफसरों, डॉक्टरों और सरकारी कर्मचारियों से करीब ₹12 करोड़ की ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस की अब तक की जांच में नौ एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। आरोप है कि ठगी से हासिल रकम का बड़ा हिस्सा फ्यूचर एंड ऑप्शन ट्रेडिंग, लोन की व्यवस्था कराने के नाम पर कमीशन और पीड़ितों का भरोसा बनाए रखने में खर्च किया गया। जांच के अनुसार, करीब ₹4 करोड़ ट्रेडिंग में लगाए गए, जो कथित तौर पर डूब गए, जबकि कुल करीब ₹10 करोड़ खर्च किए जाने की बात सामने आई है।
मामले में पुलिस ने 3 अगस्त को सहजनवां रेलवे स्टेशन के स्टेशन अधीक्षक और उनकी बेटी गरिमा सिंह को गिरफ्तार किया था। इसके बाद गोरखपुर और महराजगंज में लगातार नई शिकायतें सामने आईं। पुलिस अब कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों, बैंक खातों, लोन दस्तावेजों और पैसों के लेनदेन की जांच कर रही है।
लोन के नाम पर भरोसा, फिर करोड़ों की रकम
पुलिस जांच के मुताबिक, कथित गिरोह ऐसे लोगों को निशाना बनाता था जिन्हें नया लोन चाहिए होता था या पहले से चल रहे कर्ज की किस्त चुकाने में परेशानी हो रही थी। आरोप है कि गरिमा सिंह लोगों को भरोसा दिलाती थी कि बैंक से लोन मंजूर कराने के बाद उसकी किस्तें वह खुद चुकाएगी।
लोन मंजूर होने के बाद रकम का बड़ा हिस्सा कथित तौर पर अपने खाते में ट्रांसफर करा लिया जाता था। शुरुआत में कुछ किस्तें खुद भरकर पीड़ितों का विश्वास कायम रखा जाता था। इसके बाद धीरे-धीरे संपर्क कम कर दिया जाता और कथित तौर पर भुगतान बंद कर दिया जाता था।
दूसरे तरीके में पहले से चल रहे लोन को खत्म कराने का भरोसा दिया जाता था। पीड़ित से नया पर्सनल लोन लेने को कहा जाता और उसकी रकम कथित तौर पर आरोपितों के खाते में ट्रांसफर कराई जाती थी।
₹4 करोड़ F&O ट्रेडिंग में लगाने का आरोप
जांच में सामने आया है कि कथित तौर पर ठगी से हासिल रकम का इस्तेमाल तेजी से पैसा बढ़ाने के लिए शेयर बाजार की फ्यूचर एंड ऑप्शन ट्रेडिंग में किया गया। पुलिस के अनुसार, करीब ₹4 करोड़ इस कारोबार में लगाए गए, लेकिन यह रकम कथित तौर पर डूब गई।
इसके अलावा करीब ₹4 करोड़ रकम लोन जल्दी मंजूर कराने के नाम पर कमीशन में खर्च किए जाने का आरोप है। जिन लोगों के नाम पर लोन कराया गया, उनका भरोसा बनाए रखने के लिए करीब ₹2 करोड़ की किस्तें भी कथित तौर पर भरी गईं। इस तरह लगभग ₹10 करोड़ खर्च होने की बात जांच में सामने आई है।
डॉक्टर के नाम पर ₹1.37 करोड़ लोन का आरोप
महराजगंज के घुघली थाने में दर्ज मामले में एक सरकारी पशु चिकित्साधिकारी ने आरोप लगाया कि गरिमा सिंह ने रिश्तेदारी का हवाला देकर उनका भरोसा जीता। शिकायत के मुताबिक, कार लोन खत्म कराने का भरोसा देकर उनके नाम पर कथित तौर पर ₹1.37 करोड़ का लोन कराया गया।
इस मामले में छह बैंकों से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि लोन की मंजूरी के दौरान नियमों का पालन हुआ था या नहीं और बैंकिंग प्रक्रिया में किसी स्तर पर कथित अनियमितता हुई थी या नहीं।
रेलवे कर्मचारियों को भी बनाया निशाना
एक अन्य मामले में एक स्टेशन अधीक्षक ने आरोप लगाया कि उनके नाम पर अलग-अलग बैंकों से कुल ₹1.67 करोड़ का लोन कराया गया। शिकायत के अनुसार, उन्हें भरोसा दिया गया था कि लोन की किस्तें बाद में आरोपित खुद चुकाएगी। शुरुआत में करीब ₹10 लाख उनके खाते में भेजे गए, जिसे कथित तौर पर उनका लाभ बताया गया।
पुलिस अब ऐसे मामलों को जोड़कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित नेटवर्क ने कितने सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों और डॉक्टरों को निशाना बनाया।
डायरी में लिखा था- ‘मैं अरबपति बनूंगी’
जांच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर गरिमा सिंह की एक डायरी भी मिली है। इसमें उसने अप्रैल-मई 2026 तक बड़ी रकम कमाने और अरबपति बनने का लक्ष्य लिखा था। डायरी में ₹100 करोड़ कमाने का लक्ष्य भी दर्ज होने की बात सामने आई है।
पुलिस इस डायरी में दर्ज बातों को कथित आर्थिक लेनदेन और ठगी के पैटर्न से जोड़कर जांच कर रही है। हालांकि, डायरी में लिखी गई बातों को अकेले अपराध का प्रमाण नहीं माना जा सकता; इसकी पुष्टि अन्य जांच और साक्ष्यों से की जाएगी।
डॉक्टर की मौत के बाद मामला और गंभीर
मामले में 13 अगस्त को एक गंभीर घटनाक्रम सामने आया। ठगी के कथित पीड़ित 45 वर्षीय डॉक्टर की मौत हो गई। पुलिस को मिले कथित सुसाइड नोट में उन्होंने अपनी मौत के लिए गरिमा सिंह और उसके गिरोह को जिम्मेदार बताया था।
पुलिस के अनुसार, डॉक्टर से करीब ₹1.40 करोड़ की कथित ठगी हुई थी और इसके बाद वह मानसिक दबाव में थे। डॉक्टर की मौत और कथित वित्तीय ठगी के बीच संबंध की जांच की जा रही है। पुलिस ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू की है।
नौ एफआईआर, कई शिकायतों की जांच जारी
अब तक गोरखपुर और महराजगंज में नौ एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, कई अन्य लोगों ने भी शिकायतें दी हैं, जिनकी जांच की जा रही है। शिकायतों की संख्या बढ़ने पर कथित ठगी की कुल रकम भी बढ़ सकती है।
जांच एजेंसियां बैंक खातों, मोबाइल फोन, लोन आवेदन, दस्तावेजों और डिजिटल लेनदेन की जांच कर रही हैं। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि कथित नेटवर्क में गरिमा सिंह और उसके पिता के अलावा कौन-कौन लोग शामिल थे।
गैंगस्टर एक्ट लगाने की तैयारी
पुलिस कथित गिरोह के अन्य सदस्यों की भूमिका का पता लगाने के साथ आरोपितों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की तैयारी कर रही है। इसके लिए संबंधित कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस आरोपितों को पूछताछ के लिए रिमांड पर लेने की भी कोशिश कर रही है, ताकि लोन की रकम, बैंक खातों और कथित ठगी से जुड़े पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा सके।
फिलहाल जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि करीब ₹12 करोड़ की कथित ठगी से जुटाई गई रकम कहां-कहां गई, कितने लोगों के नाम पर लोन कराया गया और इस पूरे नेटवर्क में बैंकिंग तथा अन्य स्तरों पर किन लोगों की भूमिका रही।
