सोशल मीडिया विज्ञापन से महिला को ‘Funds Invest’ टेलीग्राम समूह में जोड़ा, शेयर बाजार में ऊंचे रिटर्न का झांसा देकर ₹5.50 लाख ट्रांसफर कराए; आरोपियों से 86 डेबिट कार्ड, 28 चेकबुक और तीन लैपटॉप भी मिले

WhatsApp ग्रुप में ‘स्टॉक टिप’ का जाल, असली शेयरों में निवेश कराकर करोड़ों का खेल; ठग खुद मुनाफा लेकर निकल गए

Roopa
By Roopa
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नई दिल्ली: साइबर ठगी करने वाले गिरोह अब केवल फर्जी निवेश मंच या नकली बैंक खातों का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। एक नए तरीके में ठग व्हाट्सऐप समूहों के जरिए वास्तविक निवेशकों से वास्तविक शेयरों में खरीदारी करवाकर शेयर बाजार में कृत्रिम मांग पैदा कर रहे हैं। इस पूरे खेल में पीड़ित खुद अपने वैध बैंक खाते और अधिकृत शेयर ब्रोकर के माध्यम से कारोबार करता है, लेकिन शेयर की कीमत गिरने पर नुकसान उसी का होता है। साइबर सुरक्षा कंपनी ग्रुप-आईबी ने गोल्डबुल और कॉइनलर नाम से सामने आए दो संगठित निवेश धोखाधड़ी अभियानों की जांच में इस तरीके की पहचान की है।

जांच के अनुसार, ठग पहले वित्तीय विशेषज्ञों और निवेश सलाहकारों के रूप में पेश किए गए डीपफेक विज्ञापन चलाते हैं। ऐसे विज्ञापनों में कम समय में बड़े रिटर्न या विशेष शेयर टिप मिलने का दावा किया जाता है। विज्ञापन पर क्लिक करने वाले लोगों को उनकी लोकेशन के आधार पर अलग-अलग पन्नों या संपर्क माध्यमों पर भेजा जाता है। इसके बाद उन्हें ऐसे व्हाट्सऐप समूहों में जोड़ा जाता है, जहां एक व्यक्ति खुद को विशेषज्ञ या मुख्य विश्लेषक बताकर निवेश संबंधी निर्देश देता है।

व्हाट्सऐप समूह में बनाते थे खरीदारी का दबाव

गोल्डबुल अभियान में समूह के सदस्यों को किसी छोटे बाजार पूंजीकरण वाले वास्तविक शेयर को खरीदने के लिए कहा जाता था। उन्हें शेयर का निश्चित खरीद मूल्य और भविष्य का लक्ष्य भी बताया जाता था। कई मामलों में निवेशकों से यह प्रमाण भी मांगा जाता था कि उन्होंने वास्तव में शेयर खरीद लिया है।

ग्रुप-आईबी के अनुसार, दो या तीन समूहों में करीब 1,000 सदस्य होने पर भी इतनी खरीदारी हो सकती है कि कम कारोबार वाले किसी शेयर की कीमत प्रभावित हो जाए। एक अभियान में पीड़ितों की अनुमानित ₹125 करोड़ से ₹250 करोड़ तक की रकम बाजार में लगाई गई थी।

इस मॉडल में ठगों को किसी निवेशक के बैंक खाते या शेयर ब्रोकर के खाते में सेंध लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। वे केवल निवेशकों के भरोसे और सामूहिक खरीदारी के प्रभाव का इस्तेमाल करते हैं।

24.79 पर शेयर खरीदने की सलाह, बाद में कीमत गिर गई

जांच में सामने आए एक मामले में निवेशकों को 6 नवंबर 2025 को एक अमेरिकी शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनी के शेयर को 24.79 डॉलर पर खरीदने का निर्देश दिया गया था। समूह में इसका लक्ष्य 29 डॉलर बताया गया।

शेयर की कीमत बाद में 9 दिसंबर को 27.87 डॉलर तक पहुंची, यानी शुरुआती खरीद मूल्य से करीब 12.4 प्रतिशत ऊपर। इसी दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर पहले से अपने पास मौजूद शेयर बेच दिए। शेयर उस बताए गए लक्ष्य तक नहीं पहुंचा। फरवरी तक इसकी कीमत गिरकर 14.27 डॉलर रह गई, जो निवेशकों के शुरुआती खरीद मूल्य से करीब 42 प्रतिशत कम थी।

इस तरह गिरोह ने कीमत बढ़ने के दौरान अपनी हिस्सेदारी बेचकर लाभ उठाया, जबकि देर से खरीदारी करने वाले निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

नकली निवेश मंच से अलग तरीके की ठगी

कॉइनलर अभियान में ठगी का तरीका कुछ अलग था। इसमें खोज परिणामों में ऊपर आने वाले विशेष रूप से तैयार किए गए वेबपेज, सामाजिक मंचों पर विज्ञापन और भावनात्मक संबंध बनाने वाली ठगी के तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों को नकली निवेश मंचों तक पहुंचाया जाता था।

पीड़ितों को शुरुआत में पंजीकरण, पहचान सत्यापन और परीक्षण के लिए नकली धन जैसी सुविधाएं दिखाई जाती थीं। इससे पूरा मंच वास्तविक निवेश सेवा जैसा प्रतीत होता था। इसके बाद लोगों को अलग-अलग निवेश योजनाओं में अधिक रकम लगाने के लिए प्रेरित किया जाता था।

जब कोई निवेशक अपनी रकम निकालने की कोशिश करता, तो ठग नई शर्तें सामने रखते थे। कभी न्यूनतम शेष राशि, कभी कर या बीमा शुल्क और कभी तकनीकी समस्या का बहाना बनाया जाता था। कई मामलों में निकासी के लिए रकम के 10 से 30 प्रतिशत तक अतिरिक्त भुगतान की मांग की जाती थी।

एक मंच से जुड़े 208 डोमेन

ग्रुप-आईबी की जांच में एक कॉइनलर निवेश मंच से जुड़े 208 डोमेन की पहचान की गई। इन वेबसाइटों में 23 साझा डिजाइन प्रारूप, समान होस्टिंग व्यवस्था और दोहराई गई संपर्क जानकारी जैसी समानताएं मिलीं। जांच के आधार पर इस पूरे नेटवर्क से करीब ₹15,900 करोड़ के राजस्व का अनुमान लगाया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में किसी एक वेबसाइट या भुगतान खाते की जांच तक सीमित रहने के बजाय विज्ञापन, डोमेन, फोन नंबर, संपर्क पहचान, बैंक खाते और अन्य डिजिटल संकेतों को जोड़कर पूरे नेटवर्क की पहचान करना अधिक प्रभावी हो सकता है।

निवेशकों के लिए डीपफेक विज्ञापन और ‘गारंटी’ बड़ा संकेत

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी भी ऐसे निवेश प्रस्ताव से सावधान रहना चाहिए जिसमें जल्द निर्णय लेने का दबाव बनाया जाए, किसी प्रसिद्ध व्यक्ति या विशेषज्ञ की नकली आवाज या तस्वीर का इस्तेमाल हो अथवा निश्चित मुनाफे की गारंटी दी जाए। व्हाट्सऐप समूह में शामिल कर निवेश का प्रमाण मांगना और लगातार एक ही शेयर खरीदने के लिए दबाव बनाना भी गंभीर चेतावनी संकेत हो सकता है।

A Researcher at Algoritha Security के अनुसार, इस तरह के निवेश घोटालों में तकनीकी मंच से ज्यादा महत्वपूर्ण सामाजिक भरोसा होता है। ठग वैध बैंकिंग और निवेश प्रणालियों को सीधे तोड़ने के बजाय उपयोगकर्ता को स्वयं लेनदेन करने के लिए तैयार करते हैं। इसलिए निवेशकों को सलाहकार की पहचान स्वतंत्र रूप से सत्यापित करनी चाहिए, केवल अधिकृत ब्रोकर माध्यम का इस्तेमाल करना चाहिए और निकासी के नाम पर अतिरिक्त शुल्क मांगने वाले मंच से तुरंत दूरी बनानी चाहिए।

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