नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी के तरीके भी तेजी से बदल रहे हैं। अब ठग किसी व्यक्ति की कुछ सेकंड की आवाज का नमूना हासिल कर उसी जैसी आवाज तैयार कर सकते हैं। इसके बाद परिवार के सदस्य, दोस्त या सहकर्मी बनकर फोन किया जाता है और अचानक आई किसी कथित मुसीबत का हवाला देकर तुरंत पैसे भेजने के लिए कहा जाता है। इस तरह की ठगी को Voice Cloning Fraud कहा जाता है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, केवल कुछ सेकंड की आवाज से भी किसी व्यक्ति की आवाज की नकल तैयार की जा सकती है।
साइबर ठगों के लिए सोशल मीडिया, YouTube वीडियो, Instagram Reels और WhatsApp पर मौजूद Voice Notes आवाज के नमूने जुटाने का आसान माध्यम बन सकते हैं। AI Voice Synthesis Tools के जरिए छोटी Audio Clip से आवाज के स्वर और बोलने के तरीके की नकल तैयार की जा सकती है। इसके बाद ठग अपनी जरूरत के मुताबिक उसी आवाज में नए वाक्य तैयार कर पीड़ित से बातचीत कर सकते हैं।
पहले आवाज जुटाते हैं, फिर तैयार करते हैं ठगी की कहानी
Voice Cloning Fraud में सबसे पहले ठग अपने संभावित लक्ष्य या उसके किसी करीबी की आवाज का नमूना जुटाते हैं। यह नमूना सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वीडियो या ऑडियो से लिया जा सकता है। इसके बाद AI आधारित तकनीक की मदद से उस आवाज का कृत्रिम संस्करण तैयार किया जाता है।
अगले चरण में ठग ऐसी कहानी तैयार करते हैं, जो पीड़ित को घबराने पर मजबूर कर दे। दुर्घटना, अस्पताल में भर्ती होने, पुलिस कार्रवाई या अपहरण जैसी स्थिति का हवाला देकर परिवार के सदस्य से तत्काल पैसे मांगे जा सकते हैं।
कॉल पर सुनाई देने वाली आवाज परिचित होने के कारण पीड़ित को शुरुआती स्तर पर शक नहीं होता। ठग बातचीत में जल्दबाजी और भावनात्मक दबाव बढ़ाते हुए तुरंत भुगतान करने के लिए कहते हैं। कई मामलों में पीड़ित को फोन नहीं काटने और किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क नहीं करने का निर्देश भी दिया जा सकता है।
Prof. Triveni Singh ने बताया- आवाज की नकल ही सबसे बड़ा हथियार
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी Prof. Triveni Singh लंबे समय से AI आधारित Voice Cloning और Deepfake Fraud के खतरे को लेकर लोगों को आगाह करते रहे हैं। वह बता चुके हैं कि ऐसे मामलों में अपराधियों को अत्यधिक तकनीकी विशेषज्ञ होने की जरूरत नहीं होती। उपलब्ध AI Tools के जरिए वे सोशल मीडिया से आवाज हासिल कर उसकी कृत्रिम नकल तैयार कर सकते हैं।
Prof. Singh के मुताबिक, Voice Cloning Scam में अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार तकनीक से ज्यादा पीड़ित का भरोसा और भावनात्मक प्रतिक्रिया होती है। इसलिए केवल आवाज पहचान में आने को व्यक्ति की वास्तविक पहचान का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। किसी करीबी की आवाज में अचानक पैसे मांगे जाने पर बातचीत रोककर स्वतंत्र माध्यम से पहचान की पुष्टि करना जरूरी है।
नकली आवाज के साथ Caller ID का भी इस्तेमाल
Voice Cloning Scam को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए ठग Caller ID Spoofing जैसी तकनीकों का सहारा भी ले सकते हैं। इससे फोन स्क्रीन पर दिखाई देने वाला नंबर किसी परिचित व्यक्ति के नंबर जैसा नजर आ सकता है।
ठग बातचीत के दौरान रोने, चिल्लाने या घबराहट जैसी Background Sounds भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे पीड़ित पर मानसिक दबाव और बढ़ जाता है। इसके बाद UPI, QR Code, Digital Wallet या अन्य माध्यम से तत्काल भुगतान कराने की कोशिश की जाती है।
एक बार रकम ट्रांसफर होने के बाद उसे कई बैंक खातों या अन्य माध्यमों से आगे भेजा जा सकता है, जिससे पैसे की वास्तविक दिशा का पता लगाना और रकम वापस हासिल करना मुश्किल हो सकता है।
परिवार के लिए पहले से तय करें Secret Code Word
ऐसी ठगी से बचने के लिए परिवार के सदस्यों के बीच एक Secret Code Word या खास वाक्य तय किया जा सकता है। यदि किसी करीबी की आवाज में अचानक कोई आपात स्थिति बताकर पैसे मांगे जाएं, तो उससे पहले से तय शब्द पूछकर पहचान की पुष्टि की जा सकती है।
संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत भुगतान करने के बजाय फोन काटकर संबंधित व्यक्ति के पुराने और सुरक्षित नंबर पर खुद कॉल करना चाहिए। Incoming Call में दिखाई देने वाले नंबर पर भरोसा करके सत्यापन नहीं करना चाहिए।
घबराहट में कभी न करें तत्काल भुगतान
साइबर सुरक्षा के लिहाज से किसी भी आपात स्थिति में कुछ सेकंड के भीतर पैसे भेजने का दबाव अपने आप में बड़ा चेतावनी संकेत है। यदि कॉल करने वाला व्यक्ति बार-बार फोन नहीं काटने, किसी से बात नहीं करने या तुरंत भुगतान करने के लिए दबाव डाल रहा है, तो स्थिति की स्वतंत्र रूप से जांच करनी चाहिए।
लोगों को अपने Voice और Video Footprint पर भी ध्यान देना चाहिए। सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध लंबी Audio या Video सामग्री को सीमित करना और Privacy Settings को मजबूत करना आवाज की नकल किए जाने का जोखिम कम कर सकता है।
ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत
यदि किसी व्यक्ति के साथ Online Financial Fraud हो जाता है, तो भारत में इसकी शिकायत 1930 साइबर अपराध हेल्पलाइन के माध्यम से की जा सकती है। साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी दर्ज की जा सकती है। संदिग्ध कॉल या संदेशों की जानकारी संचार साथी से जुड़े उपलब्ध रिपोर्टिंग माध्यमों पर दी जा सकती है।
Voice Cloning Fraud की सबसे बड़ी कमजोरी यही है कि ठग आवाज की नकल कर सकते हैं, लेकिन वास्तविक व्यक्ति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सकते। इसलिए किसी परिचित की आवाज सुनकर भावनात्मक प्रतिक्रिया देने के बजाय फोन काटना, अलग नंबर से संपर्क करना और पहचान की पुष्टि करना सबसे प्रभावी सुरक्षा उपायों में शामिल है।
