SEBI ने धेनु बिल्डकॉन में कथित वित्तीय अनियमितताओं और ₹1,000 करोड़ के फंड फ्लो को लेकर अंतरिम कार्रवाई की है।

धेनु बिल्डकॉन पर SEBI का बड़ा एक्शन, ₹1,000 करोड़ के फंड फ्लो पर उठे सवाल

Team The420
4 Min Read

नई दिल्ली: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने धेनु बिल्डकॉन के खिलाफ कथित वित्तीय अनियमितताओं और पहली नजर में फ्रॉड से जुड़ी चिंताओं को लेकर अंतरिम आदेश जारी किया है। नियामक ने कंपनी को अगले आदेश तक किसी भी तरह का नया कॉरपोरेट एक्शन करने से रोक दिया है। इसके साथ ही कंपनी के प्रेफेंशियल अलॉटमेंट से जुड़े छह आवंटियों पर भी कार्रवाई की गई है। इन सभी को धेनु बिल्डकॉन के शेयर बेचने, ट्रांसफर करने या किसी अन्य तरीके से डिसपोज करने से रोक दिया गया है।

FCRF Launches Flagship Certified Cyber Security Auditor (CCSA) Program for Next-Generation Cyber Auditors

SEBI की कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब नियामक ने कंपनी में हुए प्रेफेंशियल अलॉटमेंट और इसके बाद शेयरहोल्डिंग में आए बड़े बदलाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। अंतरिम आदेश के मुताबिक, प्रेफेंशियल अलॉटमेंट के बाद छह आवंटियों के पास कंपनी की डाइल्यूटेड इक्विटी में करीब 99.7 प्रतिशत हिस्सेदारी पहुंच गई। इतनी बड़ी हिस्सेदारी के गठन को लेकर नियामक ने लेनदेन की प्रकृति और उसके पीछे मौजूद आर्थिक गतिविधियों की जांच की जरूरत महसूस की है।

₹1,000 करोड़ के फंड इनफ्लो की जांच

SEBI की नजर धेनु बिल्डकॉन में हुए करीब ₹1,000 करोड़ के फंड इनफ्लो पर भी है। नियामक को इन पैसों के लेनदेन में कथित राउंड ट्रिपिंग की आशंका है। राउंड ट्रिपिंग का मतलब ऐसे वित्तीय लेनदेन से है जिसमें पैसा अलग-अलग खातों या संस्थाओं के माध्यम से घूमकर किसी न किसी रूप में मूल स्रोत या उससे जुड़े पक्षों तक वापस पहुंच सकता है।

नियामक की चिंता केवल रकम के आने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी जांच का विषय है कि इन फंड्स का वास्तविक आर्थिक उद्देश्य क्या था और क्या लेनदेन के जरिए कंपनी की वित्तीय स्थिति या शेयरों की तस्वीर को प्रभावित करने की कोशिश की गई। मामले की विस्तृत जांच के दौरान इन पहलुओं की पड़ताल की जाएगी।

छह आवंटियों के शेयरों पर रोक

अंतरिम आदेश के तहत छह प्रेफेंशियल अलॉटियों को धेनु बिल्डकॉन के शेयरों से जुड़े किसी भी तरह के डिसपोजल से रोक दिया गया है। इसका मतलब है कि जांच पूरी होने और आगे का आदेश आने तक संबंधित पक्ष अपनी हिस्सेदारी बेच या ट्रांसफर नहीं कर सकेंगे। SEBI का यह कदम संभावित रूप से विवादित शेयरों या लेनदेन से जुड़े अधिकारों में बदलाव रोकने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इसके अलावा कंपनी को भी आगे कोई कॉरपोरेट एक्शन करने की अनुमति नहीं होगी। ऐसे निर्देशों का उद्देश्य जांच के दौरान कंपनी की पूंजी संरचना, शेयरहोल्डिंग या अन्य महत्वपूर्ण कॉरपोरेट गतिविधियों में ऐसे बदलाव को रोकना होता है, जिससे नियामकीय जांच प्रभावित हो सकती है।

निवेशकों के हितों की सुरक्षा पर जोर

SEBI की अंतरिम कार्रवाई का प्रमुख उद्देश्य जांच पूरी होने तक निवेशकों के हितों और प्रतिभूति बाजार की पारदर्शिता बनाए रखना है। नियामक ने जिन गतिविधियों पर सवाल उठाए हैं, उनकी अंतिम स्थिति विस्तृत जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

महत्वपूर्ण बात यह है कि मौजूदा कार्रवाई अंतरिम प्रकृति की है और इसमें सामने आए आरोप पहली नजर में पाए गए संदेहों पर आधारित हैं। इसे कंपनी या संबंधित पक्षों की अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। आगे की जांच में सामने आने वाले दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और लेनदेन की वास्तविक प्रकृति के आधार पर मामले में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

हमसे जुड़ें

Share This Article