नई दिल्ली: Income Tax Department ने संदिग्ध विदेशी रेमिटेंस के खिलाफ देशव्यापी अभियान शुरू करते हुए पिछले तीन वर्षों में बड़ी रकम विदेश भेजने वाली 394 संस्थाओं को चिन्हित किया है। इनमें से 117 संस्थाएं भारत की अंतरराष्ट्रीय जमीनी सीमाओं से लगे जिलों में स्थित हैं। विभाग ने इन लेन-देन से जुड़े 36 प्रोफेशनल्स को भी जांच के दायरे में रखा है, जिनमें चार्टर्ड अकाउंटेंट्स शामिल हैं।
यह कार्रवाई फर्जी चैरिटेबल ट्रस्टों के एक नेटवर्क के खिलाफ की गई तलाशी के बाद सामने आई। इन ट्रस्टों पर कथित तौर पर फर्जी दान और योगदान के बदले accommodation entries उपलब्ध कराने का आरोप है। जांच के दौरान आयकर अधिकारियों को ऐसी कई संस्थाओं के बारे में जानकारी मिली, जिन्होंने विदेश में बड़ी रकम भेजी, जबकि उनके आयकर रिकॉर्ड में उतनी बड़ी कारोबारी गतिविधि दिखाई नहीं दी।
विभाग के अनुसार, शुरुआती जमीनी सत्यापन में पता चला कि कई चिन्हित संस्थाओं ने या तो आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया था या बेहद कम कारोबार दिखाया था। उनके घोषित कारोबार और विदेश भेजी गई रकम के बीच कोई स्पष्ट संबंध नहीं मिला। कई मामलों में घोषित वित्तीय गतिविधियां विदेश भेजी गई बड़ी रकम के अनुपात में नहीं थीं।
फ्रेट, सॉफ्टवेयर और कंसल्टिंग भुगतान भी जांच के घेरे में
Income Tax Department के अनुसार, कुछ विदेशी रेमिटेंस को फ्रेट भुगतान, सॉफ्टवेयर आयात और कंसल्टिंग सेवाओं के भुगतान के रूप में दिखाया गया था। हालांकि, जांच में इन लेन-देन और उनके बताए गए उद्देश्यों के बीच स्पष्ट मेल नहीं मिला। इससे अधिकारियों को आशंका है कि कुछ संस्थाओं का इस्तेमाल विदेश में रकम भेजने के लिए किया गया हो सकता है।
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ संस्थाएं अपने आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज पते पर संचालित ही नहीं हो रही थीं। ऐसे मामलों ने फर्जी या शेल संस्थाओं के जरिए वित्तीय लेन-देन करने और रकम को देश से बाहर भेजने की आशंका को बढ़ाया है।
अब विभाग इन संस्थाओं के बैंक खातों, वित्तीय रिकॉर्ड और विदेश भेजी गई रकम की पूरी ट्रेल की जांच कर रहा है। अधिकारियों का फोकस यह पता लगाने पर है कि रकम का वास्तविक स्रोत क्या था, विदेश में पैसा किसे भेजा गया और क्या संबंधित लेन-देन के पीछे वास्तविक कारोबारी गतिविधि मौजूद थी।
Form 15CB जारी करने वाले CAs भी जांच के दायरे में
Income Tax Department ने उन प्रोफेशनल्स की भूमिका की भी जांच शुरू की है, जिन्होंने विदेशी रेमिटेंस के लिए Form 15CB प्रमाणपत्र जारी किए थे। Form 15CB चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा जारी किया जाने वाला प्रमाणपत्र है, जिसमें विदेशी रेमिटेंस की टैक्स देनदारी से जुड़े तथ्यों का उल्लेख किया जाता है।
विभाग के अनुसार, Form 15CB जारी करने से पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट को संबंधित लेन-देन और उससे जुड़े तथ्यों की उचित जांच करनी होती है। अब यह देखा जा रहा है कि जांच के दायरे में आए प्रोफेशनल्स ने प्रमाणपत्र जारी करने से पहले जरूरी सत्यापन किया था या नहीं।
विदेश में संपत्ति खरीदने के तरीकों पर भी नजर
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब विदेश में अघोषित धन भेजने की आशंका वाले लेन-देन पर विभिन्न जांच एजेंसियों की नजर है। एक पूर्व Enforcement Directorate अधिकारी के अनुसार, विदेश में नकद रकम के जरिए रियल एस्टेट खरीदने जैसे मामलों की भी जांच की जाती रही है।
पूर्व अधिकारी के मुताबिक, कुछ मामलों में ड्राइवरों, घरेलू कामगारों या अन्य व्यक्तियों के नाम पर विदेश में संपत्ति खरीदने का तरीका अपनाया जा सकता है। इसका उद्देश्य Reserve Bank of India की Liberalised Remittance Scheme के तहत निर्धारित सीमा से बचने का प्रयास करना हो सकता है। मौजूदा नियमों के तहत पात्र व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में निर्धारित शर्तों के अधीन $250,000 तक विदेश भेज सकते हैं।
जांच एजेंसियों ने इससे पहले under-invoicing से जुड़े मामलों में भी इसी तरह के तरीकों का पता लगाया है, जहां किसी लेन-देन का घोषित मूल्य कथित वास्तविक मूल्य से कम दिखाकर धन के प्रवाह को छिपाने का प्रयास किया जाता है।
सीमा से लगे जिलों की संस्थाएं भी रडार पर
394 चिन्हित संस्थाओं में 117 का संबंध भारत की जमीनी सीमाओं से लगे जिलों से है। इनमें कई संस्थाओं ने पिछले तीन वर्षों में विदेश में बड़ी रकम भेजी, जबकि कुछ ने आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया या बेहद कम कारोबार घोषित किया था।
Income Tax Department अब यह जांच रहा है कि ये संस्थाएं वास्तव में वही कारोबार कर रही थीं, जिसका उन्होंने आधिकारिक रिकॉर्ड में उल्लेख किया था या नहीं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि विदेश भेजी गई रकम वास्तविक कारोबारी लेन-देन से जुड़ी थी या नहीं और क्या किसी प्रोफेशनल ने जानबूझकर संदिग्ध लेन-देन को प्रमाणित या सुविधाजनक बनाया।
विभाग की यह कार्रवाई विदेश में अघोषित धन भेजने के लिए इस्तेमाल होने वाले वित्तीय नेटवर्क की पहचान करने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है। आगे की कार्रवाई बैंकिंग रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेजों, विदेशी लेन-देन और संबंधित संस्थाओं तथा प्रोफेशनल्स की भूमिका की विस्तृत जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
