नई दिल्ली: WhatsApp का इस्तेमाल आज करोड़ों लोग निजी बातचीत, कामकाज और वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए करते हैं। ऐसे में WhatsApp अकाउंट पर साइबर ठगों की नजर भी लगातार बढ़ रही है। खास बात यह है कि ठगों को अकाउंट पर कब्जा करने के लिए हमेशा पासवर्ड की जरूरत नहीं होती। फर्जी वोटिंग लिंक, इंपर्सनेशन, सोशल इंजीनियरिंग और डिवाइस लिंकिंग के जरिए यूजर से ऐसी गलती कराई जा सकती है, जिससे उसका अकाउंट किसी दूसरे डिवाइस से जुड़ जाए।
WhatsApp में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, एन्क्रिप्टेड बैकअप, स्पैम डिटेक्शन और टू-स्टेप वेरिफिकेशन जैसे सुरक्षा उपाय मौजूद हैं। इसके बावजूद साइबर ठग लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। AI की मदद से तैयार किए जा रहे फर्जी संदेश और भरोसेमंद व्यक्ति बनकर की जाने वाली ठगी ने खतरा और बढ़ा दिया है।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी Prof. Triveni Singh के मुताबिक, WhatsApp यूजर्स को किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर verification code, PIN या device-linking approval साझा नहीं करना चाहिए। उनका कहना है कि साइबर ठग अक्सर भरोसा पैदा करने के बाद यूजर से एक छोटी-सी प्रक्रिया पूरी करवाते हैं और इसी दौरान अकाउंट का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश करते हैं।
बिना पासवर्ड कैसे हो सकता है अकाउंट हैक
साइबर ठग WhatsApp के device linking फीचर का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए वे यूजर को किसी दोस्त, रिश्तेदार, कंपनी या परिचित के नाम से संदेश भेजकर वोट करने, किसी सुविधा को सक्रिय करने या किसी समस्या को ठीक करने का बहाना बना सकते हैं। इसके बाद verification code या linking request को मंजूर कराने की कोशिश की जाती है।
यदि यूजर गलती से छह अंकों का verification code साझा कर देता है या किसी संदिग्ध device को अपने WhatsApp अकाउंट से लिंक कर देता है, तो ठग दूसरे डिवाइस से चैट और संदेशों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकता है। इसलिए किसी भी परिस्थिति में WhatsApp का verification code दूसरे व्यक्ति को नहीं देना चाहिए।
Two-Step Verification से बढ़ेगी सुरक्षा
यूजर्स को WhatsApp में Two-Step Verification जरूर सक्रिय करना चाहिए। इससे अकाउंट पर अतिरिक्त PIN सुरक्षा जुड़ जाती है। इसके अलावा Passkey का इस्तेमाल भी सुरक्षा बढ़ा सकता है। Passkey डिवाइस के सुरक्षा सिस्टम, जैसे fingerprint, face authentication या screen lock से जुड़ी होती है।
यूजर को समय-समय पर WhatsApp के Linked Devices सेक्शन की जांच करनी चाहिए। यदि वहां कोई ऐसा डिवाइस दिखाई दे जिसे वह पहचानता नहीं है, तो उसे तुरंत लॉग आउट करना चाहिए।
AI आधारित Scam Alert करेगा सावधान
WhatsApp संदिग्ध बातचीत की पहचान के लिए डिवाइस पर आधारित machine learning और AI तकनीक वाले Scam Alert फीचर पर काम कर रहा है। यह फीचर अनजान लोगों से आने वाले संदेशों में मौजूद संभावित scam patterns का विश्लेषण कर सकता है। संदिग्ध गतिविधि मिलने पर यूजर को चैट के भीतर चेतावनी दिखाई जा सकती है, जिसके बाद वह बातचीत को ब्लॉक, रिपोर्ट या जारी रखने का फैसला कर सकेगा।
इन संकेतों को नजरअंदाज न करें
यदि कोई व्यक्ति WhatsApp पर नौकरी, निवेश, लोन, लॉटरी या इनाम का लालच दे, निजी जानकारी मांगे, किसी लिंक पर क्लिक करने या ऐप डाउनलोड करने को कहे, पैसे भेजने का दबाव बनाए या खुद को किसी परिचित व्यक्ति के रूप में पेश करे, तो सावधान हो जाएं। गलत भाषा, जल्दबाजी पैदा करने वाले संदेश और verification code मांगना भी खतरे के संकेत हो सकते हैं।
यूजर्स अनजान कॉल को silence कर सकते हैं, Privacy Checkup का इस्तेमाल कर सकते हैं और स्क्रीन शेयरिंग के दौरान विशेष सावधानी बरत सकते हैं। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंकिंग जानकारी, कार्ड विवरण, पासवर्ड, OTP या WhatsApp verification code साझा नहीं करना चाहिए। थोड़ी-सी सतर्कता अकाउंट के साथ-साथ निजी और वित्तीय जानकारी को भी साइबर ठगी से बचा सकती है।
