रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं से जुड़े कथित नियुक्ति घोटाले की जांच में टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के चयन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण जांच बिंदु बनकर सामने आई है। जांच एजेंसियों के अनुसार, आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांगते कथित तौर पर TDPL को परीक्षा संबंधी जिम्मेदारी देने के पक्ष में थे। एजेंसियों का आरोप है कि एजेंसी की कार्यशैली और चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले अधिकारियों को आयोग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से हटाया गया। इनमें तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक असीम किस्मतोर्डा और लोकेश मिश्रा के नाम प्रमुखता से सामने आए हैं।
जांच में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार, JPSC की परीक्षा प्रक्रिया के लिए TDPL के चयन को लेकर आयोग के भीतर मतभेद थे। कुछ अधिकारियों ने एजेंसी की पात्रता और कामकाज से जुड़े सवाल उठाए थे। इसके बावजूद एजेंसी को परीक्षा संबंधी जिम्मेदारी देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि TDPL के चयन में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन हुआ था या नहीं और इस पूरी प्रक्रिया में तत्कालीन अध्यक्ष सहित अन्य अधिकारियों की क्या भूमिका रही।
ब्लैकलिस्टेड होने की जानकारी देकर असीम ने रोकी फाइल
जांच के मुताबिक, मई 2025 में तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक असीम किस्मतोर्डा को TDPL के मनोनयन से संबंधित फाइल आगे बढ़ाने के लिए कहा गया था। किस्मतोर्डा ने कथित तौर पर एजेंसी के ब्लैकलिस्टेड होने की जानकारी सामने रखी और फाइल आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया। उन्होंने एजेंसी की स्थिति को देखते हुए उसके मनोनयन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
इसके बाद उनसे परीक्षा नियंत्रक का काम वापस ले लिया गया और आयोग की सदस्य श्वेता गुप्ता को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई। जांच एजेंसियों के अनुसार, जून 2025 के पहले सप्ताह में TDPL का मनोनयन कर दिया गया। इसके बाद असीम किस्मतोर्डा की सेवा कार्मिक विभाग को वापस कर दी गई।
जांचकर्ताओं के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि TDPL के चयन को लेकर आपत्ति दर्ज किए जाने और उसके बाद परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी बदलने के बीच संभावित संबंध की पड़ताल की जा रही है। संबंधित फाइलों, आदेशों और अधिकारियों के बीच हुए पत्राचार की भी जांच की जा रही है।
ACF रिजल्ट पर भी लोकेश मिश्रा ने जताई थी आपत्ति
दूसरे तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक लोकेश मिश्रा का मामला भी जांच के दायरे में है। घटनाक्रम के अनुसार, असिस्टेंट कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट (ACF) परीक्षा का परिणाम जारी करने को लेकर मिश्रा ने तत्काल निर्णय लेने के बजाय पहले प्रक्रिया और परिणाम की समीक्षा करने की बात कही थी।
जांच एजेंसियों के अनुसार, लोकेश मिश्रा TDPL से संबंधित परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सतर्क थे और इसी वजह से परिणाम जारी करने से पहले पूरी प्रक्रिया की जांच करना चाहते थे। आरोप है कि परिणाम जारी करने में देरी के बाद तत्कालीन अध्यक्ष ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए उनकी सेवा भी कार्मिक विभाग को वापस करवा दी।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि लोकेश मिश्रा को हटाने का फैसला प्रशासनिक कारणों से था या TDPL से संबंधित उनकी आपत्तियों का भी इसमें कोई संबंध था। इसके लिए आयोग की फाइलों और निर्णय प्रक्रिया का अध्ययन किया जा रहा है।
TDPL चयन की पूरी प्रक्रिया जांच के केंद्र में
जांच में TDPL के चयन से लेकर परीक्षा संचालन और परिणाम जारी करने तक की पूरी प्रक्रिया को अलग-अलग स्तर पर देखा जा रहा है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि एजेंसी के चयन के समय उसकी पात्रता, पूर्व रिकॉर्ड और अन्य जरूरी मानकों की पर्याप्त जांच की गई थी या नहीं।
इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि परीक्षा प्रक्रिया में एजेंसी को कौन-कौन सी जिम्मेदारियां दी गई थीं और उसके काम की निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी। कथित अनियमितताओं का असर किन परीक्षाओं और अभ्यर्थियों पर पड़ा, इसकी भी जांच किए जाने की संभावना है।
मामले में आयोग के अधिकारियों की भूमिका, फाइलों की आवाजाही, निर्णय लेने की प्रक्रिया और एजेंसी के साथ हुए प्रशासनिक तथा वित्तीय संबंधों को भी जांचा जा रहा है। जांच एजेंसियां यह स्थापित करने की कोशिश कर रही हैं कि कथित गड़बड़ियां किसी एक स्तर तक सीमित थीं या इसमें कई लोगों की भूमिका थी।
पूर्व अध्यक्ष की जमानत पर 25 अगस्त को सुनवाई
JPSC नियुक्ति में कथित गड़बड़ी के मामले में जेल में बंद पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने जमानत के लिए याचिका दाखिल की है। उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई अब 25 अगस्त को होगी। अदालत मामले की जांच की स्थिति और आरोपों की प्रकृति समेत संबंधित कानूनी पहलुओं पर विचार करेगी।
फिलहाल जांच एजेंसियां TDPL के चयन, परीक्षा संचालन, परिणाम प्रक्रिया और आयोग के अधिकारियों की भूमिका से जुड़े दस्तावेज जुटा रही हैं। असीम किस्मतोर्डा और लोकेश मिश्रा को जिम्मेदारियों से हटाए जाने की परिस्थितियां भी जांच का हिस्सा हैं। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर होगी।
